{"_id":"5cbd0ae1bdec221455450835","slug":"kanan-devi-birthday-special-indian-cinema-first-actress","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"B'day Spl: बॉलीवुड की पहली फीमेल स्टार थी ये एक्ट्रेस, इनकी वजह से हुई थी रवींद्रनाथ टैगोर की आलोचना","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
B'day Spl: बॉलीवुड की पहली फीमेल स्टार थी ये एक्ट्रेस, इनकी वजह से हुई थी रवींद्रनाथ टैगोर की आलोचना
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mishra Mishra
Updated Mon, 22 Apr 2019 05:59 AM IST
विज्ञापन
1 of 7
कानन देवी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
भारतीय सिनेमा में कानन देवी एक ऐसा नाम है जिन्होंने अपने अभिनय से कामयाबी के शिखर को छुआ और वह बांग्ला सिनेमा की पहली कलाकार हैं जिन्हें स्टार का दर्जा हासिल हुआ। कानन देवी का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में आज ही के दिन यानी 22 अप्रैल को 1916 में एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। उन्हें भारतीय सिनेमा में एक ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने न केवल फिल्म निर्माण बल्कि एक्टिंग और गायिकी से भी दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई थी।
2 of 7
कानन देवी
कानन के दत्तक पिता रमेशचन्द्र दास की जब मृत्यु हुई उस समय वह महज 10 साल की थीं। परिवार की आर्थिक तंगी के चलते उन्हें 10 साल की उम्र से ही काम करना पड़ा। एक पारिवारिक मित्र की मदद से उन्हें 'ज्योति स्टूडियो' की फिल्म 'जयदेव' में काम करने का मौका मिला। इसके बाद कानन देवी ने ज्योतिस बनर्जी के निर्देशन में राधा फिल्म्स के बैनर तले बनी कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया।
3 of 7
कानन देवी
कानन देवी की मुलाकात उसी दौरान रायचंद बोराल से हुई, जिन्होंने उनके सामने हिन्दी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा, तभी कानन देवी ने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की। उन्होंने उस्ताद अल्लारक्खा और भीष्मदेव चटर्जी से संगीत की ट्रेनिंग ली। 1937 में फिल्म 'मुक्ति' सुपरहिट हुई, पी.सी.बरुआ के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कानन देवी को न्यू थियेटर की टॉप एक्ट्रेस में शामिल कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 7
कानन देवी
कानन देवी ने 1941 में न्यू थियेटर छोड़ दिया और स्वतंत्र रूप से काम करने लगीं। 1942 में आयी 'जवाब' कानन देवी के हिंदी फिल्मों के करियर में सबसे हिट फिल्म साबित हुई। इसी फिल्म में उन पर फिल्माया गया गीत- 'दुनिया है तूफान मेल' उन दिनों का टॉप सॉन्ग बना। 1948 में आई 'चंद्रशेखर' कानन देवी की बतौर एक्ट्रेस आखिरी हिंदी फिल्म थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट अशोक कुमार थे।
विज्ञापन
5 of 7
कानन देवी
फिल्मों में कानन ने भले ही अपनी एक अलग पहचान बनाई लेकिन निजी जिंदगी में उन्हें काफी मुश्किलों और दर्द का सामना करना पड़ा। 1940 में कानन देवी ने ब्रह्म समाज के मशहूर शिक्षाविद् हरम्बा चंद्र मैत्रा के बेटे अशोक मैत्रा से शादी की लेकिन पूरा समाज इस शादी के खिलाफ था क्योंकि उस दौर में महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।