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एक थप्पड़ ने ललिता पवार की खूबसूरती पर लगा दिया था दाग, 3 दिन तक घर में पड़ी रही थी लाश
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: भावना शर्मा
Updated Sun, 24 Feb 2019 03:32 PM IST
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80 के दशक की पॉपुलर हीरोइन ललिता पवार की आज 21वीं पुण्यतिथि है । फिल्मों में मां और सास के रोल निभाकर फेमस हुईं ललिता ने 24 फरवरी 1998 को पुणे में अंतिम सांस ली थी । ललिता ने अपने करियर में कई फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम किया। ललिता पवार का सबसे प्रचलित किरदार 'रामायण' में मंथरा का था।
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ललिता का असली नाम अंबा था। ललिता कभी स्कूल नहीं जा पाईं क्योंकि उस समय लड़कियों को स्कूल भेजना ठीक नहीं माना जाता था। ललिता ने फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। ललिता ने पहली बार एक मूक फिल्म में काम किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें 18 रुपए दिए गए थे।
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आपको जानकर हैरानी होगी कि ललिता पवार अच्छी अदाकारा के साथ बेहतरीन गायिका भी थीं। कामयाबी का सफर लगातार जारी था कि एक दिन उनकी खूबसूरती को किसी की नजर लग गई। 1942 में ललिता फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ के एक सीन की शूटिंग कर रही थीं।
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एक सीन में एक्टर भगवान दादा को ललिता को थप्पड़ मारना था। उन्होंने ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वो गिर गईं और उनके कान से खून बहने लगा। इसी इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा दी गई किसी गलत दवा के नतीजे में ललिता पवार के शरीर के दाहिने भाग को लकवा मार गया।
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इसी लकवे की वजह से उनकी दाहिनी आंख पूरी तरह सिकुड़ गई और चेहरा खराब हो गया। इस घटना के बाद ललिता पवार को काम मिलना बंद हो गया। कई साल तक ललिता अपनी सेहत और हौसले को फिर से हासिल करने की कोशिश में जुटी रहीं। आखिरकार 1948 में अपनी एक मुंदी आंख के साथ निर्देशक एसएम यूसुफ की फिल्म ‘गृहस्थी’ से एक बार फिर वापसी की।
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