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Shamshad Behum: हिंदी सिनेमा में खनकती हुई आवाज की मल्लिका थीं शमशाद बेगम, पहले गाने के मिले थे मात्र 15 रुपये
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निधि पाल
Updated Fri, 22 Apr 2022 09:16 PM IST
हिंदी सिनेमा के गीतों को शिखर पर पहुंचाने वाली गायिका शमशाद बेगम बॉलीवुड का जाना पहचाना नाम हैं। आज के समय में शमशाद बेगम के जितने गानों का रिमिक्स बनाया गया है शायद ही किसी और के गानों का बना हो। वह चौथे और पांचवे दशक की फिल्मों की खनकती हुई आवाज की मल्लिका हैं। शमशाद बेगम अपने जमाने की शोख हसीनाओं की आवाज हुआ करती थीं। हिंदी सिनेमा में कालजयी गाने 'मेरे पिया गये रंगून' और 'कजरा मोहब्बत' जैसे गानों को अपनी आवाज में पिरोने वाली गायिका शमशाद बेगम की कल पुण्यतिथि है। वह 23 अप्रैल 2013 को दुनिया को अलविदा कहकर चली गई थीं, लेकिन उनके सुरीले सुर आज भी लोगों के कानों में गूंजते हैं। शमशाद बेगम की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें-
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शमशाद बेगम
- फोटो : Social media
14 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जन्मीं शमशाद बेगम का शुरू से ही संगीत की ओर झुकाव रहा। वह अपने जमाने की सबसे चर्चित सिंगर थीं। पहली बार गाना गाने के लिए इनको 15 रुपये बतौर फीस मिले थे। अपने करियर में शमशाद बेगम ने करीब 6000 गाने गाए। 40 और 50 के दशक में तो हर संगीत पर उनका ही नाम लिखा रहता था। इनका गाया गाना मेरे पिया गए रंगून आज भी पसंद किया जाता है।
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शमशाद बेगम
शमशाद बेगम ने अपने करियर की शुरुआत रेडियो से की थी। 1947 में रेडियो पर इनकी खनकती आवाज को संगीतकार नौशाद और ओ.पी. नैय्यर ने पहचाना। उन्होंने फिल्मों में इनको प्लेबैक सिंगर के तौर पर मौका दिया। शमशाद बेगम ने ऑल इंडिया रेडियो के लिए भी गाना गाया। बाद में इन्होंने अपना म्यूजिकल ग्रुप 'द क्राउन थिएट्रिकल कंपनी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट' बनाया और इसके माध्यम से पूरे देश में तमाम प्रस्तुतियां दीं।
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शमशाद बेगम
शमशाद बेगम को कभी भी लता मंगेशकर, गीता दत्त, आशा भोंसले से कम नहीं समझा गया। साल 2009 में इन्हें प्रेस्टिजियस ओ.पी. नैयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। शमशाद बेगम भले ही एक कट्टरवादी मुस्लिम परिवार से थीं, लेकिन उनका दिल एक हिंदू गणपत लाल पर आ गया। गणपत लाल पेशे से वकील थे। परिवार में खूब विरोध हुआ लेकिन उसके बावजूद इन्होंने मात्र 15 साल की उम्र में गणपत लाल से शादी कर ली।
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शमशाद बेगम
शमशाद बेगम ने छोड़ बाबुल का घर, होली आई रे कन्हा', गाडी वाले गाडी धीरे हांक रे, तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर, मेरे पिया गए रंगून, कभी आर कभी पार, लेके पहला पहला प्यार, कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना, मिलते ही आंखें दिल हुआ दीवाना किसी का, बचपन के दिन भुला न देना, दूर कोई गाए, सैया दिल में आना रे जैसे सदाबहार गाने गाए।
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