कोरियोग्राफर सरोज खान ने बीते साल इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। लेकिन उनकी यादें और उनके द्वारा सिखाया गया डांस आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है। खासतौर पर उन अभिनेत्रियों के मन में सरोज खान की यादें आज भी जिंदा है, जिन्हें उन्होंने डांस सिखाया। सरोज खान ने अभिनेत्रियों को सिर्फ नृत्य का जादू ही नहीं बल्कि कैमरे पर खुद को कैसे पेश करना है, नज़ाकत, चेहरे के भाव भी सिखाए। इसी बात को याद करते हुए अभिनेत्री माधुरी दीक्षित भावुक हो गईं। सरोज खान और माधुरी दीक्षित के बीच काफी अच्छी बॉन्डिंग थी। सरोज जी ने उन्हें कई गानों पर कोरियोग्राफ किया था और उन दोनों का साथ में आखिरी गाना फिल्म 'कलंक' का 'तबाह हो गए' था। माधुरी दीक्षित हाल ही में डांस रियलिटी शो 'डांस दीवाने 3' अपने और दिवंगत कोरियोग्राफर सरोज खान के सम्मान में दी गई एक प्रस्तुति पर भावुक हो गईं। उन्होंने सरोज जी से जुड़ी कई यादें भी साझा कीं।
सरोज खान को याद कर भावुक हुईं माधुरी दीक्षित, बोलीं- वह मुझे ताकत देती थीं
शो की होस्ट और कॉमेडियन भारती सिंह ने माधुरी दीक्षित से पूछा कि क्या कभी सरोज खान ने उन्हें डांट लगाई? इस पर माधुरी दीक्षित ने कहा कि हां। उन्होंने कहा, 'मेरे डायरेक्टर ने मुझे डांटा था तो मेरे आंसू आ गए थे। इस पर वह और डांटने लगीं, रो क्यों रही हो? रोने का नहीं कभी लाइफ में। वह सेट्स पर मुझे ताकत देती थीं। उनको मैं आज भी बहुत याद करती हूं।'
माधुरी ने बताया कि उन्होंने सरोज खान से बहुत कुछ सीखा। एक्सप्रेशंस, मूवमेंट्स, फिटनेस, कैमरे पर कैसे प्रेजेंटेबल दिखना है। माधुरी ने बताया, जब उन्होंने करियर शुरू किया तो खुद की जगह बनाई। उस वक्त सारे मेल कोरियोग्राफर्स थे। उन्होंने खुद को 'मास्टरजी' के रूप में साबित किया। मुझे उनका ये सफर काफी अच्छा लगता है।
रियलिटी शो के दो कंटेस्टेंट्स पल्लवी और सिजा ने 'कलंक' फिल्म के गाने 'तबाह हो गए' पर परफॉर्मेंस उनको समर्पित की थी। सरोज खान ने फिल्म में इस गाने को कोरियोग्राफ किया था, जिसके लिए उन्हें बेस्ट कोरियॉग्रफी का अवॉर्ड भी मिला। माधुरी दीक्षित को इस गाने पर डांस ट्रेनिंग सरोज खान ने दी थी।
सरोज जी ने माधुरी को 'एक दो तीन', 'टम्मा टम्मा', 'डोला रे डोला', 'धक-धक करने लगा' जैसे हिट गानों पर डांस सिखाया था, जो कि सुपरहिट साबित हुए थे। बता दें, सरोज खान का बीते साल जुलाई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। इंडस्ट्री में सभी लोग उन्हें प्यार और सम्मान से 'मास्टरजी' कहकर बुलाते थे।
