वेब सीरीज 'महारानी' के बाद हुमा कुरैशी अब इसकी अगली कड़ी 'महारानी 2' में जल्द ही नजर आने वाली है। पहले सीजन की सफलता के बाद हुमा कुरैशी दूसरे सीजन को लेकर खूब उत्साहित है। इस सीरीज को लेकर उन्होंने अमर उजाला से बहुत सारी बाते शेयर की, साथ ही उन्होंने अपनी पहले की फिल्मों के भी कुछ किस्से शेयर किए। उन्होंने बताया कि 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की शूटिंग के दौरान जब नवाजुद्दीन सिद्दीकी को वह भाई कहकर बुलाती थी, तो कैसे उन्हें डांट पड़ी थी। 'डेढ़ इश्किया' की शूटिंग के दौरान क्यों नसीरुद्दीन शाह से डरती थी? और, जब 'महारानी' का उन्हें ऑफर मिला था, तब उनकी क्या प्रतिक्रिया थी। आइए जानते हैं...
Huma Qureshi: रोमांटिक सीन की शूटिंग के बीच हुमा बोलीं, ‘नवाज भाई’, और फिर सेट पर जो हुआ, वह यहां पढ़िए...
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नहीं पता था जूम के बारे में
हुमा कुरैशी कहती है, 'महारानी के पहले सीजन के दौरान कोविड शुरू ही हुआ था, जब सुभाष कपूर सर का फोन आया। उनके साथ पहले भी 'जॉनी एल एल बी 2' कर चुकी थी। उस समय मुझे ओटीटी के बारे में उतना पता नहीं था, मैंने पहली बार 'स्कैम 1992' सोनी लिव पर देखा था। तब मुझे पता चला कि ऐसा भी कोई शो होता है, जो ओटीटी पर आता है। 'महारानी' को लेकर मेरा पहला मेरा जूम नरेशन हुआ था, खैर अब तो जूम का काफी चलन हो गया है। उस समय मेरे लिए यह नया था। मैंने इसे डाउनलोड करना सीखा, फिर 'महारानी' की कहानी सुनी। जब मैंने कहानी सुनी, तो मुझे कहानी बहुत इंटरेस्टिंग लगी। लेकिन किरदार को लेकर मेरे मन में बहुत शंका थी कि अरे, ये तो गांव का किरदार है, साड़ी पहनती है। पता नहीं मैं कर पाऊंगी कि नहीं। फिर मैंने सोचा कि मुझे ऐसा क्यों लग रहा है? मैं तो एक्टर हूं, इस तरह के ख्याल मेरे मन में क्यों आ रहे हैं?'
लोगों की फालतू सलाह पर अमल नहीं किया
हुमा कुरैशी कहती है, 'कोविड के दौरान मेरे पास यह सोचने का पूरा मौका था कि कोई फिल्म या शो क्यों करते है, किस मानसिकता से करते है? जब मैने सोचा तो मुझे लगा कि स्टोरी तो बहुत ही इंटरेस्टिंग है करनी चाहिए। बहुत लोगो से सलाह दी कि तीन बच्चे हैं, तो उसको एक बच्चा कर देना चाहिए। लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी, मुझे लगा कि जैसी कहानी है, वैसे ही मुझे काम करना है। मुझे लगा कि अगर मैं अपने इनसिक्योरिटी की वजह से एक भी शब्द बदलती हूं, तो कहानी बिगड़ जाएगी। जब मैंने काम किया तो लोगो से बहुत तारीफ मिली, इसका पूरा क्रेडिट क्रिएटिव टीम को जाता है। मैने अपनी किसी भी पुरानी चीज को आड़े नहीं आने दी। चाहे कपड़े पहनने का स्टाइल हो, बोलने का अंदाज हो, खाना बनाना हो या फिर भैंस को चारा खिलाना, मैंने सब वैसा ही किया, जैसा स्क्रिप्ट में लिखा था।'
पिता को बताया कि आईएएस की तैयारी कर रही
हुमा कुरैशी थियेटर से रही है, थियेटर से जुड़े रहने का इस शो में कितना फायदा मिला? हुमा कुरैशी कहती है, 'भले ही थियेटर से मैं जुड़ी रही हूं, लेकिन फिल्म आपको करप्ट कर देती है। हालांकि मैंने काफी समय से थियेटर नहीं किया है। बहुत सारी चीजें आप जिंदगी में गलत सीख जाते हो।जब मैं कॉलेज में थी, तो इस बात को लेकर बहुत कंफ्यूज थी कि लाइफ में क्या करना है? जब मार्क्स अच्छे आए तो मैने साइंस भी लिया, मैथ भी लिया। लेकिन पढ़कर पढ़ कर बहुत बोर हो गई थी। जब मैने सब्जेक्ट बदला और इतिहास लिया, तो मेरे पेटेंट बहुत नाराज हुए कि इतने अच्छे मार्क्स आने के बाद सब्जेक्ट क्यों चेंज किया? मैने झूठ बोल दिया किया कि मैं आईएएस की तैयारी कर रही हूं। उनको बड़ा अच्छा लगा। इसी दौरान थियेटर से जुड़ गई, जहां मुझे अच्छा लगने लगा। वहां बहुत अलग बातें होती थी, किताबों की बातें होती थी, जो मुझे बहुत अच्छा लगता था। आज जो भी मैं एक्टिंग कर रही हूँ, वहां की ही जमा पूंजी खत्म कर रही हूं।'
पिता ने एक साल का दिया अल्टीमेटम
हुमा कुरैशी कहती है, जब पिता जी को पता चला कि मैं उनसे झूठ बोलकर आईएएस की तैयारी न करके थियेटर से जुडी हूं, तो उनको बहुत निराशा हुई। आमतौर पर मिडिल क्लास फैमिली की सोच होती है कि कोई अच्छी नौकरी कर लो, डॉक्टर या इंजिनियर बन जाओ या फिर आईएएस की तैयारी कर लो। मुझे भी बचपन में एक्टिंग या मॉडलिंग में कभी दिलचस्पी रही ही नहीं। जब थियेटर में काम करने के दौरान मेरी दिलचस्पी हुई, तो मैंने पिताजी को समझाया तो उन्होंने साल भर का टाइम देते हुए कहा कि एक साल कोशिश कर लो, अगर हो गया तो बहुत बढ़िया, नहीं हुआ तो समय बर्बाद मत करना। उसके बाद मुंबई आ गई और किस्मत ने साथ दिया मुझे विज्ञापन फिल्में मिलनी शुरू हो गई। जब आईपीएल चलता था, तो उस समय मेरे ऐड बहुत चलते थे। मेरी किस्मत अच्छी थी कि कभी अभिषेक बच्चन के साथ, तो कभी शाहरुख खान के साथ ऐड में दिखती थी, तो लोगों को लगा कि कुछ तो कर ही रही है।'