फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने रविवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कैंसर से लड़ी अपनी जंग की एक-एक बात बताई। गौरतलब है कि हाल ही में अभिनेत्री ने एक किताब भी लांच की है जिसमें उन्होंने जीवन में किए संघर्ष को बतलाया है। वहीं, मनीषा ने फेस्टिवल बताया 'बुरा दौर आपकी सफलता को नहीं रोक सकता, लेकिन यह समय कुछ सिखाने और सीखने का होता है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कैंसर पर बोलीं एक्ट्रेस मनीषा कोइराला, 'जिंदगी फूलों की सेज नहीं'
फेस्टिवल में मनीषा ने कई बाते कहीं जिसमें उन्होंने कहा कि जीवन फूलों की सेज नहीं होती, उतार-चढ़ाव जिंदगी का असल पहलू है, बस हर इंसान को समझना चाहिए की बुरे समय के बाद अच्छा समय भी आता है। मनीषा ने कहा 'कैंसर ने मुझे एक इंसान के तौर पर बदल दिया है और कहीं ज्यादा दयालु और सौम्य भी हो गई हूं और प्रकृति के हर पहलू का आनंद ले रही हूं।' उन्होंने कहा कि फॉर्मास्युटिकल कंपनियों और सरकार के बीच साझेदारी बहुत जरूरी है ताकि भारत में मरीजों को सस्ता मेडिकल उपचार आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।'
Actor @mkoirala shares with @SanjoyRoyTWA the highs and lows of her life, career, relationships; her battle with ovarian cancer; & her learnings about the process of healing
— ZEE Jaipur Lit Fest (@ZEEJLF) January 27, 2019
Part of the Women Uninterrupted Series at @NexaExperience Front Lawn. #ZEEJLF2019 @DiggiPalace pic.twitter.com/rK5hZ9b8Ut
मनीषा ने आगे कहा 'विकासशील देशों में कैंसर के बारे में जागरुकता फैलाना बहुत जरूरी हो गया है, क्योंकि विकसित देश इस चीज को पहले ही समझ चुके हैं और सही समय पर इलाज करवाने में सक्षम हैं, यही कारण हैं कि वहां कैंसर शुरुआती स्तर पर ही ठीक हो जाता है, लेकिन मेरे शरीर ने भी समय रहते मुझे इसके संकेत दे दिए थे, उधर में इससे बिल्कुल अंजान थी, अगर मुझे इस बीमारी का पहले ही एहसास हो जाता तो मैं पहले ही इलाज करवाकर ठीक हो जाती।'
बता दें कि कैंसर की जंग जीतने के बाद मनीषा कोइराला ने किताब लिखी और अब उसके प्रमोशन में व्यस्त हो गई थीं। मनीषा ने कहा था कि 'यह बहुत दर्दनाक है कि किताब के प्रमोशन के दौरान वो सारी बातें मुझे दोबारा याद आ गईं। उन्हें फिर से याद करना कैंसर की यादें ताजा करने जैसा है।'
मनीषा कोइराला ने किताब लांचिंग पर आगे कहा था कि 'ऐसा कई बार हुआ जब मैं किताब लिखना बंद कर देती थी और मुझे लगता था कि मैं इसे खत्म नहीं कर पाऊंगी। मुझे कई बार ऐसा लगा था कि यह एक बुरा विचार है और मुझे फिर से लिखना चाहिए।' बता दें कि मनीषा की किताब 'हील्ड: हाउ कैंसर गेव मी ए न्यू लाइफ' हाल ही में लांच किया गया है।