हिंदी सिनेमा की चोटी की अभिनेत्रियों में अपनी जगह पुख्ता करने की कोशिशों में लगीं अभिनेत्री नुसरत भरूचा की नई फिल्म 'जनहित में जारी' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित होने जा रही है। इस फिल्म में नुसरत ने कंडोम बेचने वाली महिला का किरदार निभाया है। वह कहती हैं, ‘फिल्म में मेरा किरदार जितना दिलचस्प है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। अगर रियल लाइफ में कोई महिला किसी केमिस्ट की दुकान पर जाकर कंडोम मांगे तो लोगो का बड़ा अजीब सा रिएक्शन होता है। गांव की बात हो तो फिर तो पूरे इलाके में ये बात फैलते देर नहीं लगेगी। अब भी लोग कंडोम के बारे में बात करने से डरते हैं, खरीदने की बात तो बहुत दूर की है।
Nushrratt Bharuccha: केमिस्ट की दुकान पर अब भी कोई महिला कंडोम मांगे तो क्या होता है, बता रही हैं नुसरत भरुचा
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आयुष्मान खुराना से तुलना
लीक से इतर फिल्में करने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना के साथ 'ड्रीमगर्ल' में काम कर चुकीं नुसरत भरूचा की तुलना इन दिनों उनसे खूब हो रही है। वह कहती हैं, ‘मैंने आयुष्मान खुराना के साथ 'ड्रीम गर्ल 'में काम किया है, इसलिए लोग मुझे ‘फीमेल आयुष्मान खुराना’ के के नाम से भी पुकारते हैं। आयुष्मान जिस तरह से काम कर रहे हैं अगर उनके जैसा मैं थोड़ा भी कर पाई तो मुझे बहुत खुशी होगी।’
दर्शकों के नजरिये से कहानी
नुसरत भरूचा कहती हैं, ‘जब भी मुझे किसी फिल्म का ऑफर आता है तो मैं स्क्रिप्ट दर्शक के नजरिए से सुनती हूं और सोचती हूं कि क्या एक दर्शक के तौर पर मैं सिनेमा हाल में टिकट खरीद कर ये फिल्म देख सकती हूं। अगर मुझे लगता है हां, तो मैं फिल्म साइन कर लेती हूं। अब ऐसी फिल्में बनने लगी हैं कि दर्शकों को भी महिला प्रधान भूमिकाओं वाली फिल्में देखने में आनंद आता है।’
कंडोम की बात होगी तो बोलना पड़ेगा
इन दिनों अभिनेत्री नुसरत भरूचा को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है। कंडोम बेचने वाली महिला के किरदार को लेकर उन्हें खूब ट्रोल किया जा हैं। नुसरत कहती हैं, ‘पहले जब मैं सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करती थी तो कमेंट बॉक्स में जाकर नहीं देखती थी कि लोग क्या कमेंट कर रहे हैं। लेकिन जब मैं ऐसी फिल्म कर रही हूं तो इस बारे में खुलकर बात करने में परेशानी क्या है?’
किसी की सोच नहीं बदल सकते
लगातार लीक से इतर फिल्मों से अपनी पहचान बनाने में लगीं नुसरत भरूचा कहती हैं, ‘कंडोम के बारे में सबको पता है लेकिन कोई इस पर खुल कर बात नहीं करता। इस बारे में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को सचेत होना चाहिए क्योंकि समस्या पुरूषों को नहीं बल्कि महिलाओं को होती है। आज हर साल एक करोड़ अबॉर्शन हो रहे हैं। हम इस फिल्म के माध्यम से किसी की सोच को नही बदल सकते क्योंकि जब तक खुद पर कोई समस्या नहीं आती तब तक इंसान नही बदलता है।