कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी पर ये शेर एकदम सही बैठता है। 19 मई को जन्मदिन मनाने वाले नवाज बॉलीवुड का ऐसा नाम हैं जो किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। नवाज आज जिस फिल्म में हों उसके एक-दो अवार्ड जीतने की तो गारंटी बन जाती है।
उनकी लगन के साथ-साथ एक और वजह है जिसने आज फिल्मी दुनिया को ये सितारा देने में बड़ी भूमिका अदा की। ये वजह थी एक लड़की, जिसने 'सांवले' और साधारण से चेहरे-मोहरे वाले नवाज को शक्ल आइने में देखने की नसीहत दे दी और नवाज ने ठान ली कि वो अब हीरो बन कर दिखाएंगे।
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Nawazuddin Siddiqui
- फोटो : social media
नवाजुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के शहर मुजफ्फरनगर के कस्बे बुढ़ाना में पैदा हुए। शहर (मुजफ्फरनगर) से 15-16 किमी दूर इस कस्बे में नवाज को कोई फिल्मी माहौल नहीं मिला। 80 के दशक के आखिरी दौर का ये वक्त था जब टीवी घर मे होना बड़ी शान माना जाता था। कस्बे और छोटे शहर में कलर टीवी नहीं पहुंचा था। जवान होते लोग छुप-छुप के ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखा करते थे। मुहल्ले भर के बच्चे एक ही घर में टीवी देख रहे होते थे क्योंकि अमूनन मुहल्ले में एक या दो टीवी ही हुआ करते थे। नवाज भी टीवी देखते और दूसरे काम छोड़ देर तक टीवी के सामने रहते, यहीं से एक सपना नवाज के मन में पल गया।
टीवी की तरफ लोगों की दीवानगी देख नवाज के मन में आया कि वो भी कभी ऐसे ही पर्दे पर दिखें, लोग उनके भी दीवाने हों। इसी दौरान नवाज को पहली बार प्यार हुआ। पड़ोस की इस लड़की को नवाज ने प्रपोज किया तो जवाब मिला अपनी शक्ल आइने में देख लो। लड़की की ये ना नवाज को चुभ गई, दिल में एक बागी ने सिर उठा लिया।
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Nawazuddin Siddiqui
- फोटो : social media
नवाजुद्दीन ने ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली की राह पकड़ ली। दिल्ली की तरफ नवाज को कोई लाया था तो वो था उनके भीतर पल राह एक्टिंग का कीड़ा। उनके लिए ये शहर बिल्कुल नया था, नवाज ने अपनाया। दिल्ली आकर नवाज को पहली सफलता तब मिली जब उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला मिल गया। एकटिंग के इतने बड़े इदारे में दाखिले के बाद नवाज को लगा अब भला उनको पर्दे पर दिखने से कौन रोक सकता है? नवाज कुछ और सोच रहे थे जबकि किस्मत ने कुछ और ही बदा था।
नवाज ने एनएसडी के बाद कई प्ले में काम किया, लेकिन पेट कैसे भरे? दूसरे काम करना था फिल्मों में। नवाज ने मायानगरी का रुख किया। फिल्मों में काम नहीं मिला तो पेट भरने को चौकीदार की नौकरी की। कई और भी छोटे-छोटे काम किए। फिल्म के लिए जब भी काम मांगने जाते रिजेक्ट कर दिए जाते। नवाज घर जाते तो मां के दुपट्टे में मुंह छुपा लेते और अम्मी की गोद मे लेट कर देर तक रोते।