अभी बीते शनिवार ही विविध भारती पर मशहूर गायक मनहर उधास की पहले से रिकॉर्ड की गई फौजी भाइयों के लिए विशेष जयमाला का प्रसारण हुआ। कार्यक्रम में मनहर ने अपने छोटे भाई पंकज उधास की खूब तारीफ की और कार्यक्रम में फिल्म 'नाम' का गाना 'चिट्ठी आई है...' कार्यक्रम के श्रोताओं को सुनाया। यही वह गाना है जिसे सुनकर उस समय के शोमैन राज कपूर भी रो पड़े थे। 40 साल से भी अधिक समय से पंकज की आवाज सुगम संगीत की सरताज बनी हुई है। चलिए बताते हैं आपको पंकज उधास के जीवन की कुछ सुनी अनसुनी कहानियां..
Pankaj Udhas Birthday: पंकज उधास का हनुमान चालीसा से दिव्य कनेक्शन, 'चिट्ठी आई है' सुनकर रो पड़े थे राज कपूर
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'चिट्ठी आई है' सुनकर रो पड़े राज कपूर
वैसे तो पंकज उधास के प्रशंसक पूरी दुनिया में हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिग्गज अभिनेता और शो मैन के रूप में मशहूर हुए निर्माता, निर्देशक राज कपूर भी पंकज की गायकी के दीवाने थे। ये उस समय की बात है जब 'चिट्ठी आई है' बस रिकॉर्ड ही हुआ था। फिल्म के निर्माता इसके एक हीरो कुमार गौरव के पिता राजेंद्र कुमार थे। एक दिन राजेंद्र कुमार ने राज कपूर को डिनर पर बुलाया और गाना चला दिया। यह गजल सुनने के बाद राज कपूर की आंखों में आंसू आ गया और उन्होंने कहा कि यह गाना बहुत बड़ा हिट होगा और राज कपूर की भविष्यवाणी सच साबित हुई।
जगजीत सिंह को देते हैं श्रेय
पंकज उधास यूं तो पाकिस्तानी गजल गायक मेहंदी हसन के गजलों के दीवाने हैं। लेकिन अपने देश के गायकों में उनको जगजीत सिंह से बेहद प्यार रहा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जगजीत की आवाज ने भारत में गजलों की एक अलग क्रांति लाई है। जगजीत सिंह ने गजल को हर व्यक्ति की पसंदीदा बना दी क्योंकि वह उसको लोगों की मांग के हिसाब से तोड़ मरोड़ देते थे। जगजीत की आवाज उन्हें गजलों की यूएसपी लगती है।
10 साल की उम्र में मिला पहला इनाम
एक संगीत से परिपूर्ण परिवार में पैदा होने के कारण पंकज के जीवन में संगीत आना तो लाजमी था। पिता गुजराती गायक थे और बड़े भाई हिंदी फिल्मों में गाते थे। जिस कारण पंकज की संगीत की तालीम घर पर ही हो जाती थी। एक बार की बात है, भारत चीन युद्ध के समय मनहर का स्टेज शो था। इस दौरान 10 साल के पंकज भी उनके साथ यह स्टेज शो देखने चले गए। पंकज ने रंगमंच पर 'ए मेरे वतन के लोगों' गा कर लोगों का मन मोह लिया। उनकी आवाज और लगन से खुश होकर एक दर्शक ने उन्हे 51 रुपये का इनाम दिया।
लगता था संगीत से घर नहीं चलेगा
गायन में इतनी रुचि होने के बाद भी पंकज के परिवार ने कभी संगीत को पेशा नहीं समझा। हां संगीत से कभी रोकते नहीं थे और सीखने के लिए प्रोत्साहित भी करते थे। और शायद यही कारण था कि राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी में चार साल तबला वादन सीखने के बाद पंकज ने मुंबई का रुख किया। दरअसल उन्हें विज्ञान विषय से स्नातक करना था। जिसके लिए उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज में एडमिशन ले लिया। लेकिन पढ़ाई के साथ साथ पंकज मास्टर नवरंग से शास्त्रीय संगीत और गायिकी की बारीकियां सीखते रहे।