39 साल के वेंकट सत्यनारायण प्रभास राजू। प्यार से इन्हें लोग सिर्फ प्रभास कहकर पुकारते हैं। देश की पहली दो अखिल भारतीय फिल्मों बाहुबली-द बिगनिंग और बाहुबली- द कॉन्क्लूजन ने उन्हें सिनेमा का बड़ा सितारा बना दिया है। अपनी अगली फिल्म साहो की रिलीज से पहले प्रभास ने अमर उजाला के पाठकों के मुंबई के एक पंचसितारा होटल में खुलकर जवाब दिए।
'बाहुबली' का अमिताभ से है खास 'कनेक्शन', पढ़ें पाठकों के सवाल और प्रभास के रोचक जवाब
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दिल्ली की सोनल सिंह पूछती हैं कि आपका हिंदी सिनेमा से संपर्क का अब तक का अनुभव कैसा रहा और बाहुबली सीरीज की फिल्मों के बाद आपके जीवन में क्या खास बदलाव आए हैं?
बाहुबली सीरीज से मुझे पूरे देश के फिल्म दर्शकों का बेइतंहा प्यार मिला है और इसे मैं किसी वरदान या आशीर्वाद से कम नहीं मानता। इन फिल्मों की कामयाबी ने मुझे एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी है। भारतीय सिनेमा में भाषाओं की सरहदें करीब करीब मिट चुकी हैं। दक्षिण की फिल्में हिंदी में और हिंदी की फिल्में अब तमिल, तेलुगू में भी एक साथ रिलीज हो रही हैं और यह सिनेमा का अब तक का सबसे अच्छा समय है। रही बात बाहुबली के बाद के बदलाव की तो इसने मेरी झिझक थोड़ी कम की है। मैं थोड़ा शर्मीला किस्म का इंसान रहा हूं लेकिन अब लोगों से खुलकर मिलने में अच्छा महसूस करता हूं।
मुक्तसर, पंजाब के जगदीश जोशी जानना चाहते हैं कि क्या बाहुबली के बाद आपको अब भी पौराणिक या ऐतिहासिक किरदारों के और भी प्रस्ताव मिल रहे हैं?
जी हां, बाहुबली की सफलता के बाद से मेरे पास ऐसे प्रस्तावों की झड़ी सी लग गई लेकिन एक अभिनेता का विकास इसी में है कि वह खुद को पहले से बेहतर साबित करने के लिए अलग अलग तरह के किरदार करे। बाहुबली में लोगों ने मेरा पौराणिक किरदार देखा। साहो में दर्शक मुझे एक एक्शन रोल में देखेंगे और इसके बाद मैं एक और फिल्म पर काम शुरू कर चुका हूं जो एक लव स्टोरी है।
वाराणसी के संघप्रिय गौतम जानना चाहते हैं कि हिंदी सिनेमा के किस अभिनेता के साथ आपकी काम करने की इच्छा है और दक्षिण भारत की फिल्मों में व हिंदी फिल्मों के एक्शन दृश्य में क्या खास अंतर आप महसूस करते हैं?
ये तो दो सवाल हो गए (हंसते हुए)। हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन सबसे बड़े सितारे हैं और उनके साथ काम करना हर कलाकार का सपना तो होता ही है। वह अदाकारी का एक स्कूल हैं और सिर्फ अदाकारी ही नहीं वह काम के प्रति समर्पण, समयबद्धता और अनुशासन की भी पाठशाला हैं। मैंने शायद कभी ये किसी इंटरव्यू में बताया नहीं लेकिन मैं जब गर्भ में था तो मेरी मां ने उनकी फिल्म शोले कई बार देखी थी। मुझे भी कई बार महसूस होता है कि कुछ तो असर है उनका मेरे ऊपर।
बिल्कुल सही कहा आपने कि ये सवाल व्यक्तिगत है लेकिन किसी कलाकार के बारे में उनके प्रशंसकों का ऐसी जानकारी रखने का हक भी है। इस बारे में मुझसे तरह तरह के सवाल होते रहते हैं लेकिन ऐसा सीधा सवाल कम ही पूछा गया। मैं अपने प्रशंसकों को बताना चाहता हूं कि मैं प्रेम विवाह करूंगा और वह भी अपने घरवालों की अनुमति से।
मुरादाबाद की अंशू गुप्ता जानना चाहती हैं कि आपका कोई ड्रीम रोल भी है क्या?
मैं अपनी हर फिल्म का किरदार अपना ड्रीम रोल समझकर ही करता हूं। इतने साल काम करने के बाद बाहुबली ने मुझे जो जिम्मेदारी का एहसास कराया है उसके बाद मेरा फिल्में चुनने का नजरिया थोड़ा बदला है। अब मुझे हर किरदार में अपने दर्शकों का प्यार नजर आता है और यही मेरा सपना है कि ये प्यार कभी कम न हो।
वाराणसी के अंकित यादव जानना चाहते हैं कि फिल्म बाहुबली के निर्देशक एस एस राजमौली ने आपको कैसे चुना?
दक्षिण की फिल्मों के ज्यादातर निर्देशक मेरे मित्र हैं। मेरा बचपन फिल्मी माहौल में ही बीता है ये अलग बात है कि बचपन में मैंने कभी फिल्म अभिनेता बनने के बारे में सोचा नहीं था। मेरे पिता तेलुगू फिल्मों के निर्माता रहे। उनके साथ उठने बैठने वाले लोगों से मेरा परिचय रहा। एस एस राजामौली से मेरी मित्रता थोड़ा देरी से हुई लेकिन इस फिल्म के लिए उन्होंने ही मेरा चयन किया। इस चयन के पीछे शायद मेरी कद काठी और मेरे व्यक्तित्व जैसा ही अभिनेता उन्हें चाहिए था।
वापस लौटते हैं आपकी आने वाली फिल्म साहो की तरफ। शाहजहांपुर के जुनैद खान का सवाल श्रद्धा कपूर के बारे में है। वह जानना चाहते हैं कि उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
श्रद्धा से पहले दिन जब मैं मिला तो हमारी ट्यूनिंग बैठ गई। फिल्म की शूटिंग से पहले हमने कई मर्तबा स्टोरी सिटिंग की, रिहर्सल्स किए और फिर शूटिंग के दौरान सब कुछ सही होता गया। श्रद्धा बहुत ही मेहनती हैं, अपने काम को लेकर वह किसी तरह की कोताही नहीं करतीं। वह किसी भी क्षेत्र में एक अच्छी सहयोगी हैं, टीम वर्क में उनका विश्वास है। श्रद्धा ने फिल्म में एक्शन सीन्स भी किए हैं और इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की है।

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