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फिल्मों में आने से पहले किराने की दुकान चलाते थे ये संगीतकार, बिना ट्रेनिंग लिए बने 'संगीत के सरताज'

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: shrilata biswas Updated Sat, 24 Aug 2019 10:12 AM IST
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कल्याणजी - फोटो : सोशल मीडिया

हिंदी सिनेमा के गानों का जब भी जिक्र होता है संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी का नाम जरूर आता है। दोनों ने एक से बढ़कर एक गानों का संगीत दिया। जिसमें हिमालय की गोद में, सरस्वतीचंद्र, डॉन, सफर, कोरा कागज, मुकद्दर का सिकंदर, पूरब और पश्चिम, हसीना मान जाएगी, जंजीर, सफर और गीत जैसी अनगिनत फिल्में रही हैं। इस जोड़ी में से कल्याणजी की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से...

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कल्याणजी आनंदजी

कल्याणजी वीरजी शाह का परिवार गुजरात के कच्छ का रहने वाला था। कल्याणजी के पिता का नाम वीरजी था। वीरजी शाह का परिवार कच्छ से मुंबई पहुंचा और यहां किराने की दुकान खोल ली। उनके दुकान से एक ग्राहक सामान तो लेता लेकिन पैसे नहीं चुका पा रहा था। वीरजी ने एक दिन उससे उधार चुकाने के लिए कहा तो उस शख्स ने उनके दोनों बेटों कल्याणजी और आनंदजी को संगीत सिखाने की जिम्मेदारी ली। इस तरह उधार के पैसों को चुकाने के लिए कल्याणजी को संगीत की शिक्षा मिली। 

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कल्याणजी आनंदजी - फोटो : फाइल फोटो

यहीं से कल्याणजी-आनंदजी की रुचि संगीत की ओर बढ़ने लगी और दोनों भाई संगीत की दुनिया से जुड़ गए। कल्याणजी ने अपने भाई आनंदजी के साथ मिलकर 'कल्याणजी वीरजी एंड पार्टी' के नाम से एक आर्केस्ट्रा कंपनी बनाई थी। जो अलग-अलग शहरों में जाकर परफॉर्मेंस किया करती थी। इसी दौरान वो फिल्म संगीतकारों के संपर्क में आए और दोनों भाई हिंदी सिनेमा की दुनिया में पहुंचे।

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अमिताभ बच्चन के साथ कल्याणजी-आनंदजी - फोटो : file photo

उस वक्त एसडी बर्मन, हेमंत कुमार, मदन मोहन, नौशाद जैसे संगीतकार हुआ करते थे, ऐसे में कल्याणजी-आनंदजी के लिए अपना मुकाम बना पाना वाकई काफी मुश्किल था। शुरुआत में कल्याणजी ने कल्याणजी वीरजी शाह के नाम से फिल्मों में संगीत देना शुरू किया। उनकी पहली फिल्म 1959 में सम्राट चंद्रगुप्त थी। बाद में उनके साथ आनंदजी जुड़ गए और यहीं से ये जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के नाम से मशहूर हो गई।

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मो. रफी के साथ कल्याणजी आनंदजी - फोटो : सोशल मीडिया

कल्याणजी-आनंदजी ने करीब 250 फिल्मों में संगीत दिया है, जिसमें से 17 फिल्में गोल्डन जुबली और 39 फिल्में सिल्वर जुबली रहीं। अपनी धुनों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले कल्याणजी ने 24 अगस्त 2000 को 72 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।

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