{"_id":"5bf3ad5ebdec22699d5addc5","slug":"preity-zinta-returns-with-bhaiyyaji-superhit-sunny-deol-arshad-warsi-shreyas-talpade","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"प्रीति जिंटा ने ऐसा क्यों कहा-जब भी मैं बीवी बनती हूं, मर जाती हूं","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
प्रीति जिंटा ने ऐसा क्यों कहा-जब भी मैं बीवी बनती हूं, मर जाती हूं
एंटरटेनमेंट डेस्ट, अमर उजाला
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:14 PM IST
विज्ञापन
priety zinta
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कभी लिरिल गर्ल बनकर पूरी दुनिया में छा जाने वाली प्रीति जिंटा क्रिकेट के कारोबार में जाने के बाद फिल्मों से दूर हो गई थीं। इस हफ्ते उनकी एक कॉमेडी फिल्म भैयाजी सुपरहिट रिलीज हो रही है, इस फिल्म में पहली बार वह सपना दुबे बनकर भोजपुरी बोलती नजर आएंगी। हाल ही में अपकमिंग फिल्म की प्रमोशन के सिलसिले में प्रीति बिग बॉस के मंच पर भी आई थी और उन्होंने सलमान के साथ मस्ती की थी। देखिए, प्रीति जिंटा का ये दिलचस्प इंटरव्यू जिसमें उन्होंने इस फिल्म में अपने किरदार, अपने साथी कलाकारों और आईपीएल पर खुलकर बातें की हैं। प्रीति जिंटा आगामी फिल्म 'भैयाजी सुपरहिट' में बनारस की सपना दूबे का किरदार निभा रही हैं। जानिए, इस किरदार के बारे में क्या कहती हैं वो..
priety zinta
प्रीति कहती हैं कि फिल्म भैयाजी सुपरहिट को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। पहली बार ऐसा रोल मिला है जहां मैं साड़ी पहनूं और सिंदूर के साथ उत्तर प्रदेश की एक देसी हाउसवाइफ नजर आऊं। ये अच्छा भी लगा और अजीब भी क्योंकि शूटिंग के दौरान कभी कभी जब मैं शीशे की तरफ जाती थी तो चौंक जाती थी। जब भी मैने फिल्मों में भारतीय किरदार निभाए तो ज्यादा मुस्लिम किरदार ही किए।
प्रीति जिंटा-जीन गुडएएनएफ
प्रीति आगे कहती हैं कि जब भी मैं बीवी बनती हूं मर जाती हूं। जैसे दिल ने जिसे अपना कहा. मैं मेरी शादी होते ही मैं मर जाती हूं। कोई मिल गया के बाद जैसे ही कृष आई और उसमें मुझे बच्चा हुआ और मैं मर गई। नीरज पाठक ने इस फिल्म में सपना दुबे का किरदार ऐसा लिखा है जिसमें बहुत सारे रंग हैं। वह बारहवीं फेल है लेकिन अंग्रेजी बड़े शौक से बोलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
t
- फोटो : solaris
उसके दिमाग में हर समय शक रहता है। उसका दिल साफ है। छोटे शहरों की मिठास है। बड़े शहरों में लोग मारेंगे तो पीठ पर मारेंगे सामने से नहीं। पूरी फिल्म में मैंने सिर्फ साड़ियां ही पहनी हैं और सिर्फ बनारसी। मैंने और फिल्म के लेखक निर्देशक नीरज पाठक ने फैसला किया था कि फिल्म में बनारसी साड़ियां पहनेंगे ताकि बनारस की जो ये कला धीरे धीरे गायब हो रही है उसे वापस मुख्य धारा में लाया जा सके।
विज्ञापन
priety zinta
अपने करियर में शुरू से ही मैंने बहुत खास फिल्में ही की हैं। मेरी पहली फिल्म क्या कहना और उससे पहले आई दिल से दोनों ऑफबीट फिल्में थीं। मैंने कभी एक साथ दो या तीन फिल्मों से ज्यादा फिल्में नहीं कीं। 10 साल पहले मैंने फैसला किया कि मैं क्रिकेट में जाना चाहती हूं। कारोबार करना चाहती हूं। अब मेरा बिजनेस जम गया है तो मेरे पास समय है और अब मैं फिर से फिल्में करना चाहती हूं।