हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कुमार का जन्म आठ अक्तूबर 1926 को बलूचिस्तान में हुआ था। वह कश्मीरी पंडित थे। राज कुमार ने बॉलीवुड की कई सदाबहार फिल्मों में अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। फिल्मों में राज कुमार के डायलॉग कहने का अंदाज भी काफी अलग था। साथ ही उनकी फिल्मों के डायलॉग्स आज तक काफी मशहूर हैं। जन्मदिन के खास मौके पर हम आपको राज कुमार के शानदार डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
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Raaj Kumar Birthday: हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार थे राज कुमार, पढ़ें उनकी फिल्मों के ये 10 सदाबहार डायलॉग्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Mon, 05 Oct 2020 03:29 PM IST
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राज कुमार
- फोटो : twitter: @Bollywoodirect
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राज कुमार
- फोटो : file photo
फिल्म- बेताज बादशाह (1994)
डायलॉग- जिसके दालान में चंदन का ताड़ होगा वहां तो सांपों का आना-जाना लगा ही रहेगा।
फिल्म- मरते दम तक (1987)
डायलॉग- बाजार के किसी सड़क छाप दर्जी को बुलाकर उसे अपने कफन का नाप दे दो।
डायलॉग- जिसके दालान में चंदन का ताड़ होगा वहां तो सांपों का आना-जाना लगा ही रहेगा।
फिल्म- मरते दम तक (1987)
डायलॉग- बाजार के किसी सड़क छाप दर्जी को बुलाकर उसे अपने कफन का नाप दे दो।
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राज कुमार
- फोटो : file photo
फिल्म- तिरंगा (1993)
डायलॉग- हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है। दुश्मन से सीधी बात करती है।
फिल्म- मरते दम तक(1987)
डायलॉग- हम कुत्तों से बात नहीं करते- मरते दम तक
डायलॉग- हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है। दुश्मन से सीधी बात करती है।
फिल्म- मरते दम तक(1987)
डायलॉग- हम कुत्तों से बात नहीं करते- मरते दम तक
राज कुमार
- फोटो : file photo
फिल्म- सौदागर (1991)
डायलॉग- जानी...हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी और वह वक्त भी हमारा होगा।
फिल्म- तिरंगा (1993)
डायलॉग- हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते। हम आंखें ही चुरा लेते हैं।
डायलॉग- जानी...हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी और वह वक्त भी हमारा होगा।
फिल्म- तिरंगा (1993)
डायलॉग- हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते। हम आंखें ही चुरा लेते हैं।
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- फोटो : file photo
फिल्म- मरते दम तक(1987)
डायलॉग- इस दुनिया के तुम पहले और आखिरी बदनसीब कमीने होगे, जिसकी न तो अर्थी उठेगी ओर न किसी के कंधे का सहारा, सीधे चिता जलेगी।
फिल्म- बेताज बादशाह (1994)
डायलॉग- आजकल का इश्क जन्मों का रोग नही है, वक्ती नशा है, शाम को होता है, सुबह उतर जाता है।
डायलॉग- इस दुनिया के तुम पहले और आखिरी बदनसीब कमीने होगे, जिसकी न तो अर्थी उठेगी ओर न किसी के कंधे का सहारा, सीधे चिता जलेगी।
फिल्म- बेताज बादशाह (1994)
डायलॉग- आजकल का इश्क जन्मों का रोग नही है, वक्ती नशा है, शाम को होता है, सुबह उतर जाता है।
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