हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना (Rajesh Khanna Death Anniversary) एक अभिनेता, फिल्म निर्माता और एक कुशल राजनीतिज्ञ थे। राजेश लगातार 15 फिल्में सुपरहिट देने वाले वह दुनिया के इकलौते अभिनेता हैं। उनका यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। अपने करियर में तीन फिल्मफेयर और चार बीएफजेए पुरस्कार जीतने वाले राजेश खन्ना 1970 से 1987 तक सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेता रहे। भारत सरकार की तरफ से उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से सुशोभित किया गया। लंबे समय तक बीमार रहने के बाद जुलाई 2012 में आज ही के दिन उनका निधन हो गया। आज काका की पुण्यतिथि है। आज हम आपको उनकी कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं।
ये हैं सुपरस्टार राजेश खन्ना की 10 बेहतरीन फिल्में, इस तरह से भारतीय सिनेमा के पहले मेगास्टार बने 'काका'
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आखिरी खत (1966)
राजेश खन्ना ने 1966 में आखिरी खत नामक फिल्म से अपने सिनेमाई करियर की शुरुआत की जिसे चेतन आनंद ने निर्देशित किया था। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में 168 फीचर फिल्मों और 12 शॉर्ट फिल्मों में काम किया। राजेश खन्ना एफटीआईआई के छात्र सुभाष घई और धीरज कुमार के साथ उन आठ फाइनल प्रतियोगियो में से एक थे, जिन्हें साल 1967 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स नाम की कंपनी और फिल्मफेयर की प्रतियोगिता में 10,000 प्रतियोगियों में से चुना गया। यह प्रतियोगिता राजेश खन्ना ने जीती और उन्हें पहली फिल्म मिली आखिरी खत।
राज (1967)
राजेश खन्ना ने 'द हिन्दू' अखबार को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, 'हालांकि 'आखिरी खत' मेरी पहली फिल्म है, लेकिन मुझे पहली बार 1967 में रवींद्र दवे की फिल्म 'राज' में एक मुख्य अभिनेता की भूमिका निभाने का मौका मिला था। मेरी हीरोइन बबीता पहले से ही एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं। मुझमें बहुत आत्मविश्वास था लेकिन शुरू में कैमरे का सामना करने में मुझे दिक्कत आ रही थी। अपने पहले तीन शॉट्स में, मुझे अपनी देह की चाल-ढाल और संवादों के प्रवाह पर जोर देना था। हालांकि मैं अपने संवादों के साथ सही था, लेकिन मेरी हरकतें वैसी नहीं थीं। रवींद्र दवे ने मेरे चलने के अंदाज को सही करते हुए मुझे मेरे दृश्यों और हलचल को स्पष्ट रूप से समझाया।'
आराधना (1969)
राजेश खन्ना ने साल 1969 से 1971 के दो साल के अंतराल में ही हिंदी सिनेमा में लगातार 15 सफल फिल्में दी थीं। जिसमें फिल्म आराधना भी एक थी। आराधना फिल्म का आम तौर पर भारतीयों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा था। इसने कई कलाकारों को फिल्मों में अभिनय को एक व्यवसाय के रूप में लेने के लिए प्रेरित किया था। उनमें से एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेता टॉम ऑल्टर थे। टॉम ने एक साक्षात्कार में यह स्वीकार किया था कि 1970 में राजेश खन्ना की फिल्म आराधना देखकर ही वह प्रभावित हुए और इसके बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लेने की बात सोची थी।
कटी पतंग (1970)
राजेश खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में आशा पारेख के साथ चार फिल्मों में बतौर मुख्य कलाकार काम किया था और फिल्म कटी पतंग उनमें से दूसरी फिल्म थी। इससे पहले फिल्म आन मिलो सजना में इस सफल जोड़ी को देखा गया था। स्क्रीन पर राजेश खन्ना कभी भी सुर से सुर मिलाते हुए नहीं दिखाई दिए इसलिए उनके भाव स्पष्ट थे। संगीत समर्थित उनकी उपस्थिति ही एक फिल्म की सफलता के लिए शक्ति का मुख्य स्रोत बनी रही।
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