67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन सोमवार को विज्ञान भवन में किया गया। इसी दौरान सुपरस्टार रजनीकांत को 51वें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विज्ञान भवन में मौजूद सभी लोगों ने रजनीकांत के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं।
Dadasaheb Phalke Award: रजनीकांत को दादा साहब फाल्के सम्मान, अभिनेता ने इन लोगों को समर्पित किया अवॉर्ड
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रजनीकांत बीते पांच दशक से सिनेमा पर राज कर रहे हैं। वह अभी भी सिनेमा में एक्टिव हैं। रजनीकांत की असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ था। रजनीकांत पांच साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई। रजनीकांत के लिए भी घर चलाना इतना आसान नहीं था। उन्होंने घर चलाने के लिए कुली तक का काम किया।
रजनीकांत फिल्मों में आने से पहले बस कंडक्टर की नौकरी करते थे। रजनीकांत ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बालचंदर की फिल्म 'अपूर्वा रागनगाल' से एंट्री ली थी। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत की हीरो बनाने का श्रेय बालाचंदर को ही जाता है। दादा साहब पुरस्कार लेते हुए रजनीकांत ने कहा कि उन्हें दुख है कि बालाचंदर इस पल को देखने के लिए उनके साथ नहीं है। रजनीकांत बालाचंदर को अपना गुरु मानते हैं।
रजनीकांत ने अपने अभिनय की शुरुआत कन्नड़ नाटकों से की थी। दुर्योधन की भूमिका में रजनीकांत घर-घर में लोकप्रिय हुए थे।
रजनीकांत की फिल्में सुबह साढ़े तीन बजे तक रिलीज हो जाती हैं। कुली से सुपरस्टार बनने वाले रजनीकांत कभी यहां तक नहीं पहुंच पाते अगर उनके दोस्त राज बहादुर ने उनके अभिनेता बनने के सपने को जिंदा न रखा होता। और उन्होंने ही रजनीकांत को मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के लिए कहा। दोस्त की बदौलत ही रजनीकांत आगे बढ़ते गए और फिर फिल्मों में काम करने लगे।
साल 1983 में उन्होंने बॉलीवुड में कदम रख दिया। उनकी पहली हिंदी फिल्म अंधा कानून थी। रजनीकांत ने इसके बाद सिर्फ तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं। आज वे दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े स्टार कहे जाते हैं। रजनीकांत के दामाद और एक्टर धनुष को भी बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है।