बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुका आरके स्टूडियो अब बिक चुका है। कपूर खानदान की यह धरोहर गोदरेज प्रॉपर्टीज ने खरीदी है। इस जगह पर गोदरेज लग्जरी फ्लैट बनाएगा। आरके स्टूडियो 1948 में बनकर तैयार हुआ था। 70 और 80 के दशक में इस स्टूडियो ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। इस धरोहर को बिकने के बाद रणधीर कपूर का बयान सामने आया है। इस बयान से आप रणधीर कपूर (Randhir Kapoor) की भावुकता का अंदाजा लगा सकते हैं।
71 साल पुराने RK Studio के बिकने पर रणधीर कपूर हुए इमोशनल, छलक पड़ा दर्द
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रणधीर कपूर (Randhir Kapoor) ने कहा- 'हम लोगों ने 6-7 महीने पहले ही बेच दिया था। यह फैसला हम लोग बहुत पहले ले चुके थे। बेशक इस स्टूडियो से हम लोग जुड़े हुए हैं लेकिन मजबूरी में इसको बेचा जा रहा है। हमने काफी कोशिश की लेकिन मैनेज नहीं हो पा रहा था। मेरे पिता समय के साथ आगे बढ़ने में विश्वास करते थे। वह हमेशा कहते थे शो हमेशा ऑन रहेगा। हम लोगों ने बिल्कुल वैसा ही किया जब बात आरके स्टूडियो की आई। हम लोगों का इससे भावनात्मक जुड़ाव है। इसे हमारे पिता ने बनवाया था लेकिन इसे बेचना समय की जरूरत थी।'
जब आरके स्टूडियो को बेचने की बात पहली बार सामने आई थी तो ऋषि कपूर का एक बयान वायरल हुआ था। उस वक्त ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) ने कहा था- 'हमने अपने दिलों पर पत्थर रखकर और सोच-समझकर यह फैसला लिया है। हम सभी भाई एक-दूसरे से काफी जुड़े हैं लेकिन हमारे बच्चे और पोते क्या ऐसा कर पाएंगे? हम नहीं चाहते कि हमारे पिता के प्यार की निशानी किसी कोर्ट रूप का ड्रामा बने।' आरके स्टूडियो में 16 सितंबर, 2017 को 'सुपर डांसर' शो के दौरान इसमें आग लग गई थी हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था।
ऋषि कपूर ने नई तकनीक के साथ इसके पुनर्निर्माण की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं होगा। स्टूडियो बेचने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि ईस्टर्न मुंबई में बना यह स्टूडियो अब फिल्मकारों की पसंद नहीं रहा। ज्यादातर लोग अब अंधेरी और गोरेगांव में शूटिंग करना पसंद करते हैं। ऐसे कई कारण हैं जो अब पूरे कपूर परिवार ने इस प्रसिद्ध आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया।
आरके के बैनर तले 'आग', 'बरसात', 'आवारा', 'श्री 420', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'मेरा नाम जोकर', 'बॉबी', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'राम तेरी गंगा मैली' जैसी सुपरहिट फिल्में बनी थीं। राज कपूर का 1988 में जब निधन हुआ था, तो उनके बड़े बेटे रणधीर कपूर ने इसका जिम्मा संभाला। इसके बाद उनके भाई राजीव कपूर ने यहीं 'प्रेम ग्रंथ' का निर्देशन किया था। इस स्टूडियो में बनी आखिरी फिल्म थी ‘आ अब लौट चलें।’