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'रामायण' की आवाज बन गया था ये सिंगर, 4 साल की उम्र में तालीम लेकर बने महान संगीतकार

Thu, 28 Feb 2019 06:28 AM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: shrilata biswas Updated Thu, 28 Feb 2019 06:28 AM IST
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ravindra jain - फोटो : file photo

संगीतकार और गायक रविंद्र जैन ने संगीत की दुनिया को एक से बढ़कर एक कई यादगार गीत दिए। जन्म से ही उनकी आंखों की रोशनी नहीं थी। उनका जन्म 28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हुआ था। रविंद्र जैन सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई अलीगढ़ विश्वविद्यालय के ब्लाइंड स्कूल से की। 4 साल की उम्र से ही उन्होंने संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी। इसके बाद वो संगीत के शिक्षक बनकर कोलकाता पहुंचे।

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ravindra jain - फोटो : file photo

रविंद्र जैन की मुलाकात इसी बीच फिल्मकार राधेश्याम झुनझुनवाला से हुई। उन्होंने रविंद्र जैन को मुंबई जाने की सलाह दी।साल 1969 में रविंद्र जैन मुंबई पहुंचे। झुनझुनवाला अपनी एक फिल्म में उनका संगीत चाहते थे। 1971 में रविंद्र जैन के संगीत निर्देशन में पहली बार पांच गाने रिकॉर्ड हुए। जिसे मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और आशा भोसले ने अपनी आवाज से सजाया था हालांकि यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकी।

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ravindra jain - फोटो : file photo

रविंद्र जैन के संगीत से सजी फिल्म कांच और हीरा 1972 में रिलीज हुई। बतौर संगीतकार रविंद्र जैन के करियर की ये पहली फिल्म थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही लेकिन रवींद्र जैन ने हिम्मत नहीं हारी। अगले ही साल राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म सौदागर से उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया। 

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ravindra jain

रविंद्र जैन इसके बाद कहां रुकने वाले थे। उन्होंने फिल्म चोर मचाए शोर, चितचोर, तपस्या, दुल्हन वही जो पिया मन भाए, अंखियों के झरोखों से, राम तेरी गंगा मैली, हिना, इंसाफ का तराजू, प्रतिशोध जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया। रविंद्र जैन के मुख्य गानों की बात करें तो गीत गाता चल ओ साथी गुनगुनाता चल, घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं, जब दीप जले आना, ले जाएंगे ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में, ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए, एक राधा एक मीरा, सजना है मुझे सजना के लिए और हर हसीं चीज का मैं तलबगार हूं जैसे सैकड़ों गाने हैं जिसे उन्होंने अपनी धुन से सजाया।

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रवींद्र जैन

फिल्मों के अलावा रविंद्र जैन ने टीवी की दुनिया का मशहूर पौराणिक सीरियल रामायण का भी संगीत दिया था, साथ कई चौपाईयों को उन्होंने अपनी आवाज दी थी। रामायण में दिया गया उनका संगीत आज भी याद किया जाता है। रविंद्र जैन अपनी आंखों का इलाज नहीं कराना चाहते थे हालांकि वो कहते थे कि अगर आंखों की रोशनी वापस आ जाए तो वो सबसे पहले सिंगर यसुदास को देखना चाहते हैं। रविंद्र जैन ने यसुदास को सबसे पहले हिंदी सिनेमा में मौका दिया था। आखिरी वक्त तक रविंद्र जैन के पास काम की नहीं रही। 9 अक्टूबर 2015 को किडनी की बीमारी की वजह से उनका निधन हो गया।

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