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अस्पताल के बिस्तर से धुनें बनाने वाले पंचम दा के जीवन की ये हैं 10 अनसुनी कहानियां

Thu, 27 Jun 2019 01:21 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Thu, 27 Jun 2019 01:21 AM IST
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rd burman pancham da birthday special and life facts
R. D. Burman - फोटो : Social Media

हिंदी सिनेमा के क्रांतिकारी संगीतकारों में से एक आर डी बर्मन ने अपने संगीत और कला से सिर्फ देश ही नहीं पूरी दुनिया में भारतीय फिल्म संगीत को एक अलग पहचान दिलाई। पंचम दा के नाम से मशहूर संगीतकार आर डी बर्मन ने लगातार तीन दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया और 331 फिल्मों को अपने संगीत से सजाया। पंचम जितना अपने संगीत के लिए मशहूर थे, उतना ही अपनी आवाज के लिए भी। इस महान संगीतकार के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी कुछ अनसुनी कहानियां। 

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R. D. Burman - फोटो : Social Media

राजसी खानदान
हिंदी संगीत के सबसे नामचीन संगीतकरों में से एक आर डी बर्मन का पूरा नाम राहुल देव बर्मन था। ब्रिटिश शासित कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में 27 जून 1939 को पैदा हुए राहुल त्रिपुरा के राजसी खानदान से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता सचिन देवबर्मन हिंदी सिनेमा के अग्रणी संगीतकारों में से एक रहे जबकि इनकी मां मीरा देवबर्मन एक गीतकार थीं। इनके दादा नाबद्विपचंद्र देवबर्मन त्रिपुरा के राजकुमार थे और इनकी दादी थीं मणिपुर की राजकुमारी निर्मला देवी। 

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R. D. Burman - फोटो : Social Media

राहुल से तबलू और तबलू से पंचम
आर डी बर्मन का नाम राहुल देव से पंचम होने के पीछे कई किस्से हैं। पंचम नाम पड़ने से पहले इनका एक और उपनाम ‘तबलू’ हुआ करता था। संगीत के प्रति इनकी दिलचस्पी के चलते ये नाम उन्हें अपनी नानी से मिला। पंचम नाम पड़ने के पीछे का किस्सा ये बताते हैं कि जब बचपन में वह रोते थे तो यह शास्त्रीय संगीत के पांचवें सरगम ‘प’ की तरह प्रतीत होता था। 

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R. D. Burman - फोटो : Social Media

नौ साल की उम्र में पहला गाना
राहुल देव बर्मन की प्रारम्भिक शिक्षा बंगाल से ही हुई। राहुल देव बर्मन ने महज नौ साल की उम्र में ही पहला गाना ‘ऐ मेरी टोपी पलट के आ’ बना लिया। इस गाने को इनके पिता सचिन देव बर्मन ने 1956 में बनी फिल्म ‘फंटूश ‘में प्रयोग किया। कहा जाता है कि ‘सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए’ गाने की धुन भी राहुल देव ने बचपन में ही तैयार कर ली थी जिसे इनके पिता ने 1957 में गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ में इस्तेमाल किया।

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R. D. Burman - फोटो : Social Media

आरकेस्ट्रा में हारमोनियम वादक
हिंदी सिनेमा में आने से पहले पंचम दा ऑर्केस्ट्रा में हारमोनियम बजाया करते थे। मुंबई  आने के बाद आर डी बर्मन ने प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान और पं. समता प्रसाद से तबला बजाना सीखा। आर डी बर्मन संगीतकार सलिल चौधरी को भी अपना गुरू मानते थे। हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध संगीतिक जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल भी पंचम दा के आर्केस्ट्रा के दिनों के साथी रहे।
 

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