'ग़जनी' के प्रमोशन के लिए आमिर ख़ान सैलून में जाकर हज्जाम का रोल निभा रहे थे। आप भूले नहीं होंगे। दर्शक सिनेमाहॉल तक चले आएं, इसके लिए नए-नए तरक़ीब आजमाए जा रहे हैं, जिसे आज कल फ़िल्म प्रोमोशन और फ़िल्म मार्केटिंग का नाम दिया जाता है।
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'जीरो' बनने से बचने को बेहद अनोखे तरीके अपना रहे शाहरुख, यही करते हैं आमिर-सलमान
Wed, 19 Dec 2018 08:02 AM IST
विजय जैन
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 19 Dec 2018 08:02 AM IST
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- फोटो : Screengrab
आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, बॉलीवुड हर साल उतनी फ़िल्में बना रहा है। ट्रेड पंडित तो यहां तक कहते हैं कि ये संख्या हज़ार से ज़्यादा है। जहाँ एक ज़माने में पोस्टर देखकर दर्शक सिनेमाघरों की तरफ खींचे चले आते थे, आज पोस्टर, होर्डिंग या ट्रेलर दर्शकों को सिनेमाघर तक लाने के लिए काफी नहीं रह गए हैं। शाहरुख खान भी अपनी फ़िल्मों की मार्केटिंग बहुत ही अनोखे तरीके से करते आए हैं।
फ़िल्म 'रा-वन' के प्रमोशन के दौरान शाहरुख पहले भारतीय स्टार बने जो गूगल प्लस से जुड़े और दर्शकों से रूबरू हुए। 'हैप्पी न्यू ईयर' की थीम के मुताबिक शाहरुख और पूरी टीम ने 'स्लैम वर्ल्ड टूर' किया। शाहरुख के मुंबई निवास 'मन्नत' की दिवार पर एक फ़ैन द्वारा ग्राफ़िटी बनाई गई जो उनकी फ़िल्म 'फ़ैन' के प्रोमोशन का हिस्सा था।
फ़िल्म 'रा-वन' के प्रमोशन के दौरान शाहरुख पहले भारतीय स्टार बने जो गूगल प्लस से जुड़े और दर्शकों से रूबरू हुए। 'हैप्पी न्यू ईयर' की थीम के मुताबिक शाहरुख और पूरी टीम ने 'स्लैम वर्ल्ड टूर' किया। शाहरुख के मुंबई निवास 'मन्नत' की दिवार पर एक फ़ैन द्वारा ग्राफ़िटी बनाई गई जो उनकी फ़िल्म 'फ़ैन' के प्रोमोशन का हिस्सा था।
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- फोटो : file photo
शाहरुख खान अपनी आने वाली फ़िल्म 'ज़ीरो' में एक बौने का किरदार निभा रहे हैं। उनके बौने किरदार का नाम 'बऊआ सिंह' है। फ़िल्म का प्रमोशन कुछ अनोखे ही तरीके से किया जा रहा है। उनके किरदार 'बऊआ सिंह' को दर्शकों से रूबरू करवाने के लिए 'अमेज़न अलेक्सा' पर उपलब्ध करवाया गया है। व्हॉट्सऐप पर किरदार के इमोटिकॉन और GIF भी बनाये गए हैं। ट्विटर पर 'बऊआ सिंह' किरदार का अकाउंट भी है जिससे वो दर्शकों से अपने अंदाज़ में बात कर रहा है।
फ़िल्म की मार्केटिंग पर शाहरुख खान कहते हैं, "बऊआ का किरदार मेरे लिए बहुत ही अजीब प्राणी है। मैं उसे किसी को समझा नहीं सकता। वो मेरे जैसा नहीं है। फ़िल्म की मार्केटिंग इस तरह से करने की कोशिश की है कि लोग जब थिएटर में फ़िल्म देखने जाएं तो शुरुआत के 10 मिनट में भूल जाएं कि शाहरुख खान बौने का क़िरदार निभा रहा है। आप उसे पसंद करें या रिजेक्ट करें तो सिर्फ बऊआ समझकर। इसलिए हमारी मार्केटिंग भी किरदार की तरफ है।" शाहरुख मानते हैं कि फ़िल्म की मार्केटिंग बहुत ज़रूरी है क्योंकि फ़िल्म 'ज़ीरो' अलग और महंगी फ़िल्म है। क्रिसमस पर फ़िल्म रिलीज़ हो रही है और इसलिए वो फ़िल्म के अच्छे कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
फ़िल्म की मार्केटिंग पर शाहरुख खान कहते हैं, "बऊआ का किरदार मेरे लिए बहुत ही अजीब प्राणी है। मैं उसे किसी को समझा नहीं सकता। वो मेरे जैसा नहीं है। फ़िल्म की मार्केटिंग इस तरह से करने की कोशिश की है कि लोग जब थिएटर में फ़िल्म देखने जाएं तो शुरुआत के 10 मिनट में भूल जाएं कि शाहरुख खान बौने का क़िरदार निभा रहा है। आप उसे पसंद करें या रिजेक्ट करें तो सिर्फ बऊआ समझकर। इसलिए हमारी मार्केटिंग भी किरदार की तरफ है।" शाहरुख मानते हैं कि फ़िल्म की मार्केटिंग बहुत ज़रूरी है क्योंकि फ़िल्म 'ज़ीरो' अलग और महंगी फ़िल्म है। क्रिसमस पर फ़िल्म रिलीज़ हो रही है और इसलिए वो फ़िल्म के अच्छे कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
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- फोटो : file photo
साल 2008 में रिलीज़ हुई आमिर खान की फ़िल्म 'ग़जनी' में आमिर खान दर्शकों को अपनी फ़िल्म की तरफ रुझान बढ़ाने के लिए नाई बने और एक फ़ैन को नया हेअरकट 'ग़जनी हेअरकट' दिया। 'ग़जनी हेअरकट' ट्रेंड बन गया और पूरे देश में कई फैंस ने ये हेअरकट स्टाइल अपनाया। फ़िल्म की ये अनोख़ी मार्केटिंग कामियाब रही और फ़िल्म को फ़ायदा हुआ। साल 2009 में राजकुमार हिरानी की फ़िल्म '3 इडियट्स' का एक अनोखा प्रोमोशन हुआ।
फ़िल्म के थीम को मद्देनज़र रखते हुए मुख्य किरदार निभा रहे आमिर ख़ान दो हफ़्ते के लिए ग़ुमशुदा हो गए और उनके दोस्त का क़िरदार निभाने वाले आर माधवन और शरमन जोशी पूरे देश में उनकी खोज करने लगे। इस अनोखे प्रोमोशन ने दर्शकों के बीच फ़िल्म के लिए जिज्ञासा जगाई। फ़िल्म उस समय की सबसे अधिक कमाई करने वाली फ़िल्म बनी। विद्या बालन की 2012 में आई फ़िल्म 'कहानी' का अनोखा प्रमोशन हुआ जहाँ विद्या गर्भवती महिला बनकर घूम रही थीं। 'कहानी' पहली महिला प्रधान फ़िल्म बनी, जिसने 100 करोड़ कमाए। वहीं, साल 2014 में आई विद्या की फ़िल्म 'बॉबी जासूस' के प्रमोशन के लिए विद्या ने अलग-अलग ड्रेस पहने।
फ़िल्म के थीम को मद्देनज़र रखते हुए मुख्य किरदार निभा रहे आमिर ख़ान दो हफ़्ते के लिए ग़ुमशुदा हो गए और उनके दोस्त का क़िरदार निभाने वाले आर माधवन और शरमन जोशी पूरे देश में उनकी खोज करने लगे। इस अनोखे प्रोमोशन ने दर्शकों के बीच फ़िल्म के लिए जिज्ञासा जगाई। फ़िल्म उस समय की सबसे अधिक कमाई करने वाली फ़िल्म बनी। विद्या बालन की 2012 में आई फ़िल्म 'कहानी' का अनोखा प्रमोशन हुआ जहाँ विद्या गर्भवती महिला बनकर घूम रही थीं। 'कहानी' पहली महिला प्रधान फ़िल्म बनी, जिसने 100 करोड़ कमाए। वहीं, साल 2014 में आई विद्या की फ़िल्म 'बॉबी जासूस' के प्रमोशन के लिए विद्या ने अलग-अलग ड्रेस पहने।
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फिल्म जीरो का टीजर
- फोटो : अमर उजाला
एक वेशभूषा में वो भिखारी भी बनीं जिसका वीडियो बहुत पॉपुलर भी हुआ। पेन प्रोडक्शन द्वारा निर्मित 'कहानी' के निर्माता जयंतीलाल गड़ा का मानना है कि फ़िल्मों की मार्केटिंग बहुत ज़रूरी है क्यूंकि फ़िल्मी व्यापार बहुत ही जोख़िम भरा व्यापार है।"दर्शकों को सिनेमाहॉल तक लाने के लिए किसी भी फ़िल्म को लगभग दो महीने समय मिलता है। इसलिए ये काम बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है।" 'कहानी' की मार्केटिंग पर जयंतीलाल गड़ा कहते हैं, "कहानी से पहले सुजॉय घोष की फ़िल्म फ्लॉप हुई थी। उस पर अच्छी फ़िल्म बनाने का दबाव था। अगर फ़िल्म अच्छी ना होती तो मार्केटिंग नाकाम हो जाती। अच्छी कहानी और अच्छी मार्केटिंग दोनों ही ज़रूरी है फ़िल्म की सफलता के लिए।"
तकरीबन 300 फ़िल्मों को डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फ़िल्मों का प्रमोशन कर चुके एवेरीमिडिया टेक्नॉलॉजीज़ के सीईओ गौतम बी ठक्कर का कहना है कि आज के दौर में डिजिटल मार्केटिंग भारत में ना सिर्फ किफ़ायती है बल्कि सबसे ज़्यादा प्रभावशाली भी है। वो आगे कहते हैं, "मुंबई में रहने वालों को फ़िल्म स्टार दिखाना आम बात है पर भारत के छोटे शहर में फ़िल्मी कलाकारों को देखने का ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम ही ज़रिया है। इन शहरों में फ़िल्मी कॉन्टेंट की भूख है। इन दर्शकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल मार्केटिंग बहुत ही ज़रूरी होती है और फ़िल्म का परसेप्शन भी बनता है।"
तकरीबन 300 फ़िल्मों को डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फ़िल्मों का प्रमोशन कर चुके एवेरीमिडिया टेक्नॉलॉजीज़ के सीईओ गौतम बी ठक्कर का कहना है कि आज के दौर में डिजिटल मार्केटिंग भारत में ना सिर्फ किफ़ायती है बल्कि सबसे ज़्यादा प्रभावशाली भी है। वो आगे कहते हैं, "मुंबई में रहने वालों को फ़िल्म स्टार दिखाना आम बात है पर भारत के छोटे शहर में फ़िल्मी कलाकारों को देखने का ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम ही ज़रिया है। इन शहरों में फ़िल्मी कॉन्टेंट की भूख है। इन दर्शकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल मार्केटिंग बहुत ही ज़रूरी होती है और फ़िल्म का परसेप्शन भी बनता है।"