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बेटी के जन्म के बाद शिल्पा शेट्टी ने खोला राज, इस बीमारी की वजह से लिया सरोगेसी से मां बनने का फैसला

बीबीसी हिंदी Published by: anand anand Updated Thu, 14 May 2020 10:52 AM IST
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Shilpa Shetty become mother of daughter to Surrogacy due to Suffered antiphospholipid syndrome
शिल्पा शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने इसी साल फरवरी में सरोगेसी से एक बेटी को जन्म दिया है। उनकी बेटी का नाम समिशा है और उनका पहले से एक बेटा भी है वियान। हाल ही में मर्दस डे के मौके पर शिल्पा शेट्टी ने अपनी सरोगेसी से पहले गर्भधारण की समस्या के बारे में बताया। उन्होंने एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि वो कई सालों तक गर्भधारण की कोशिश करती रहीं लेकिन एक बीमारी के कारण बार-बार उन्हें गर्भपात से गुजरना पड़ा। शिल्पा शेट्टी ने बताया, “वियान के बाद हम लंबे समय से एक और बच्चा चाह रहे थे। लेकिन, मुझे कई कॉम्प्लिकेशंस से गुजरना पड़ा। मुझे एक ऑटो इम्यून डिजीज एप्ला (APLA) हो गई। जिसके कारण मेरे कई गर्भपात हुए। एक बार तो मैंने उम्मीद ही छोड़ दी थी।”उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहती थी कि वियान अकेला ही बड़ा हो। फिर हमने सोचा की चलो सरोगेसी से कोशिश करते हैं और तब तीन बार कोशिश करने के बाद हम फिर से माता-पिता बनने में सफल हुए। ”

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Shilpa Shetty become mother of daughter to Surrogacy due to Suffered antiphospholipid syndrome
शिल्पा शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया

शिल्पा शेट्टी ने एप्ला नाम की जिस बीमारी का जिक्र किया वो अधिकतर महिलाओं में पाई जाती है। इस बीमारी का पूरा नाम है एंटीफोसफोलिपिड सिंड्रोम। मैक्स अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तान्या बख्शी रोहतगी कहती हैं, “एंटीफोसफोलिपिड सिंड्रोम एक ऑटो इम्यून बीमारी है। इसमें हमारा शरीर ऐसी कोशिकाएं बनाता है जो स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें खत्म कर देती हैं। ऑटो इम्यून में एक ऐसी खराबी पैदा हो जाती है जिससे असामान्य कोशिकाएं शरीर के थक्के जमने की प्रक्रिया पर हमला करने लगती हैं। इससे खून में जल्दी-जल्दी थक्के जमने लगते हैं।”

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Shilpa Shetty become mother of daughter to Surrogacy due to Suffered antiphospholipid syndrome
एंटीफोसफोलिपिड सिंड्रोम - फोटो : सोशल मीडिया

इस सिंड्रोम का असर शरीर की धमनियों, नसों और अंगों पर पड़ता है। उनमें खून के थक्के जमने से रक्तप्रवाह में बाधा आती है और अंगों में समस्याएं आने लगती हैं। इसके कारण गर्भ, किडनी, फेफड़े, दिमाग, हाथ-पैर आदि अंग प्रभावित होते हैं जिससे गर्भपात, अंगो का निष्क्रिय होना और आघात जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। डॉक्टर तान्या बताती हैं, “ये समस्या महिला और पुरुष दोनों में होती है। कई बार बच्चों को भी हो जाती है। लेकिन ये ज्यादातर महिलाओं में ही देखने को मिलती है।” डॉक्टर तान्या रोहतगी के मुताबिक महिलाओं में ऑटो इम्यून संबंधी बीमारियां ज्यादा पाई जाती हैं। ऐसा होने का कारण आनुवांशिक भी हो सकता है और हार्मोनल भी। महिलाओं के शरीर में मौजूद हार्मोन जैसे इस्ट्रोजन आदि के कारण भी उनका खून गाढ़ा होता है और थक्के जमने का खतरा ज्यादा होता है।

Shilpa Shetty become mother of daughter to Surrogacy due to Suffered antiphospholipid syndrome
शिल्पा शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया

एप्ला सिंड्रोम के गर्भधारण पर असर पड़ने से गर्भपात हो सकता है, बच्चा अविकसित पैदा हो सकता है या मृत बच्चा भी पैदा हो सकता है। डॉक्टर तान्या रोहतगी ने बताया, “हमारे शरीर में छोटी-छोटी रक्तवाहिनियां (नसें) हैं जिनमें ये थक्के बनने लगते हैं। गर्भ में बच्चे को विकसित होने के लिए निर्बाध रक्त प्रवाह चाहिए होता है ताकि उसे पर्याप्त पोषण मिल सके। लेकिन, खून में थक्के जमने से रक्त प्रवाह में रुकावट आ जाती है और बच्चे को पोषण नहीं मिलता, वो विकसित नहीं हो पाता। इससे गर्भपात हो सकता है। गर्भपात शुरुआती महीनों में या बाद के महीनों में भी हो सकता है। जिन महिलाओं में गर्भपात नहीं होता उनमें प्लेसेंटा पर छोटे-छोटे थक्के जमने की वजह से बच्चा विकास नहीं कर पाता और वो छोटा या अविकसित पैदा होता है। उनका वजन काफी कम हो जाता है। बच्चा समय से पहले भी पैदा हो सकता है। प्लेसेंटा से ही बच्चे पोषण प्राप्त करते हैं। कुछ मामलों में जब बच्चे का पोषण बहुत ही कम हो जाता है तो वो गर्भ के अंदर ही मर जाता है। ऐसे में बच्चा मृत पैदा होता है।”

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Shilpa Shetty become mother of daughter to Surrogacy due to Suffered antiphospholipid syndrome
शिल्पा शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया

ये सिंड्रोम होने की एक से ज्यादा वजहें हो सकती हैं। ये शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। डॉक्टर तान्या बताती हैं कि इसके कारणों का पता लगाने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री क्या है। उसमें इस सिड्रोम की शुरुआत कैसे हुई जैसे उसे दौरे पड़े, पैरों में सूजन आई या बार-बार गर्भपात हुआ। ये बीमारी होने के संभावित कारण हैं-

- कई लोगों को ऑटो इम्यून की दूसरी बीमारियां भी होती हैं। इन लोगों में एप्ला सिंड्रोम ज्यादा पाया जाता है।

- गर्भनिरोधक दवाइयों से भी खून में थक्के जमने का खतरा हो सकता है।

- इसके पीछे आनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं।

- खराब जीवनशैली के चलते भी एप्ला सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।

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