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EXCLUSIVE: कामयाबी का राज पूछने पर बोलीं सिंगर शिल्पा राव, मैंने कभी खुद को पिंजरे मैं कैद नहीं किया
फिल्म ‘वॉर’ के गाने ‘घुंघरू’ को लेकर अब तक श्रोताओं का प्यार और पुरस्कार जीत रहीं पार्श्वगायिका शिल्पा राव इन दिनो थोड़ा उदास हैं। ये उदासी है फ्रांस के मशहूर म्यूजिक बैंड ‘डाफ्ट पंक’ के बिखर जाने की, लेकिन जीवन के हर मुश्किल लम्हे को सीखने का नया मौका मानने वाली शिल्पा राव का कहना है कि हो सकता हो इसमें भी संगीत का कुछ अच्छा होना छुपा हो। बिखरने के बाद हो सकता है ये अलग अलग क्षेत्रों में जाकर और कुछ नया करने में कामयाब रहें। शिल्पा ने कहा कि संगीत उनके लिए एक ऐसी तपस्या है जिसकी साधना कभी पूरी नहीं होती और वह खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि बोलना सीखने से पहले उन्होंने राग में रोना सीखा।
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शिल्पा राव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इंडियन म्यूजिक प्रो लीग में ‘मुंबई वॉरियर्स’ टीम की गायक कैलाश खेर के साथ अगुआई कर रहीं शिल्पा राव कहती हैं, “संगीत कहीं का भी हो, मुझे अच्छा लगता है। मैं ये नहीं सोचती कि मैंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा है तो वेस्टर्न संगीत मेरे लिए अछूत है। मैं सब सुनती हूं। सब गाती हूं। संगीत ने पूरी दुनिया को जोड़ने में काफी अहम भूमिका निभाई है और ये संगीत के सुर ही है जो हर जगह एक से होते हैं। संगीत की दूसरी खूबी ये भी है कि ये वंचितों को एक आवाज देता है। दुनिया के तमाम इलाकों में संगीत ने ही शोषण से मुक्ति को आवाज दी है।”
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आईएमपीएल टीम के साथ शिल्पा राव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
संगीतकार मिथुन को वह अपने करियर को फिल्मों से जोड़ने का श्रेय देती हैं। वह बताती हैं, “मैं पढ़ाई के दौरान शौकिया जिंगल्स गाया करती थी। मिथुन ने ही मुझे एक गाना सुनाया और जिद की कि मुझे इसे गा लेना चाहिए। मैंने गाना सुना, मुझे अच्छा भी लगा। मिथुन ने मुझे बता रखा था कि फिल्म ‘अनवर’ का ये गाना एक प्रयोग है। पता नहीं लोगों को अच्छा लगेगा कि नहीं लगेगा। ये भी तय नहीं था कि ये गाना फिल्म में रहेगा या नहीं रहेगा। मैंने इसे मुक्तकंठ से गाया बिना किसी अपेक्षा के और गाना लोगों को पसंद आ गया।”
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शिल्पा राव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
शिल्पा राव ने लॉकडाउन के दौरान अच्छा समय बिताया। घर वालों के साथ बिताए समय को वह जीवन का अनमोल तोहफा मानती हैं। वह ये भी कहती हैं कि गाने उन्हें खुद तलाश लेते हैं। शिल्पा बताती हैं, ‘मैं कभी गानों के पीछे नहीं भागी। अच्छे गाने खुद मुझे तलाशकर मुझ तक पहुंच जाते हैं। इसकी वजह ये भी है कि मैंने खुद को किसी तरह के पिंजरे में कैद नहीं किया है। मैं सबसे घुलती मिलती हूं। सब मुझ तक आसानी से पहुंच सकते हैं। बस दिन भर का काम खत्म करने के बाद मैं थोड़ा समय अपने लिए निकालती हूं और आप मानेंगे नहीं लेकिन रियाज का मेरा सबसे पसंदीदा समय देर रात का है। जब न कोई घंटी बजती है और न ही कोई डिस्टर्ब करता है।’
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शिल्पा राव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
गायिकाओं में शिल्पा राव की आवाज काफी अलग मानी जाती है। तो वह खुद किसकी आवाज से सबसे ज्यादा प्रभावित रही हैं? ‘मेहंदी हसन’, शिल्पा तपाक से उत्तर देती हैं, वह कहती हैं, ‘मुझे हमेशा उनको सुनते समय इस बात पर गुस्सा आता है कि कोई इतना अच्छा कैसे गा सकता है। कठिन से कठिन गजल को वो यूं सुना देते हैं जैसे कि श्रोताओं से बात कर रहे हों। उनको मैं अब भी सुनती हूं। शुरू से सुनती आ रही हूं। उन्होंने ही मुझे गायन में अपनी खुद की कसौटी बनने के लिए प्रेरित किया। उनका गायन मेरे लिए आज भी एक चुनौती है।’
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