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फिल्मों से स्टॉकिंग का आइडिया तो ले लिया, हैप्पी एंडिंग कैसे बनाओगे ?
Thu, 23 Mar 2017 03:00 PM IST
संगीता तोमर
संगीता तोमर
Updated Thu, 23 Mar 2017 03:00 PM IST
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'तेरे नाम' में भूमिका चावला का पीछा करते सलमान
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रोज का पीछा, रोज के फोन कॉल और रोज ढिठाई..ये सब करके लड़का समझ लेता है कि 'हसीना मान जाएगी', लेकिन ऐसा नहीं है जनाब। लड़की पटाने के लिए आपने फिल्मों से तो आइडिया ले लिया लेकिन ये फिल्म नहीं है, असल जिंदगी है, जहां जरूरी नहीं कि हर बार स्टॉकिंग का सबब हैप्पी एंडिंग हो।
फिल्मों से स्टॉकिंग का आइडिया तो ले लिया, हैप्पी एंडिंग कैसे बनाओगे ?
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डेमो पिक
अक्सर हम छेड़छाड़ की खबरों रोजाना रूबरू होते हैं। कभी मनचले लड़कियों को छेड़ते हैं तो कभी कोई सिरफिरा आशिक अपने प्यार का हक जताने के लिए लड़कियों को प्रताड़ित करना शुरू कर देते है..और इसके बाद भी अगर सफलता ना मिले तो समझो लड़की का रास्ते से सफाया या फिर उस पर तेजाब फेंक दिया जाता है। 'वो मेरी नहीं तो किसी की नहीं'..कुछ इसी तरह की भावना ये लड़के अपने मन में पाल लेते हैं। लेकिन ताज्जुब तो इन लड़कों की उन तकनीकों को देखकर होता है जो ये अपनाते हैं।
फिल्मों से स्टॉकिंग का आइडिया तो ले लिया, हैप्पी एंडिंग कैसे बनाओगे ?
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'रांझणा' में सोनम कपूर का पीछा करते दिखे धनुष
ये सोचते हैं कि फिल्म में हसीना मान जाती है तो असल जिंदगी में देर से ही सही, लेकिन मान जाएगी। लेकिन जरूरी नहीं ऐसा हो। अगर गौर फरमाएं तो कहीं ना कहीं इल मनचलों का तरीका फिल्मों से ही इंस्पायर्ड होता है। रील की जिंदगी को ये असल जिंदगी समझ बैठते हैं और उसी को असल जिंदगी में फॉलो करते हैं।
रील जिंदगी में तो लड़का तब तक लड़की का पीछा करता रहता है जब तक लड़की हां नहीं कहती और अंतत: वो मान भी जाती है। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं है। मनचले इसी रील लाइफ को असल जिंदगी में उतारने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब लाख कोशिशों के बावजूद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती तो वो हिंसक हो जाते हैं।
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'डर' में शाहरुख खान जूही चावला का पीछा करते दिखे।
शाहरुख खान की फिल्म 'डर', सलमान खान की 'तेरे नाम' और धनुष की 'रांझणा' सभी को याद होगी। इन फिल्मों में कुछ यही दिखाया गया....कैसे हीरो गुपचुप तरीके से हीरोइन का पीछा करता रहता है और जब सफलता नहीं मिलती तो वो क्या हथकंडा अपनाता है और आखिरकार हीरोइन मान जाती है। लेकिन ये कहां तक जायज है ?
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डेमो पिक
फिल्मों को समाज का आईना कहा जाता है यानि जो समाज में हो रहा है या होता है उसे ही फिल्मों में दिखाया जाता है। लेकिन अब तो स्थिति उलट ही नजर आती है। अब तो मनचले फिल्मों से सीखते हैं और उसे असल जिंदगी में अप्लाई करते हैं। सोचते हैं कि इस स्टाइल की वजह से फिल्म में हीरोइन मान गई तो असल जिंदगी में भी उनकी हसीना मान जाएगी। लेकिन इसका अंजाम बहुत बुरा है।
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