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संडे बाइस्कोप: इन फिल्मों से समझिए जीवन का असली फलसफा, हैपी एंडिंग के लिए मेहनत पर भरोसा जरूरी

Sun, 23 Aug 2020 09:47 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sun, 23 Aug 2020 09:47 AM IST
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Sunday bioscope by Pankaj Shukla aashiqui tera jadoo chal gayaa naaraz Arjun pandit dil se
संडे बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला

सिनेमा अगर आपके जीवन का हिस्सा बन चुका है तो इसकी परछाई आपके व्यवहार में भी शामिल होती दिख ही जाती है। सिनेमा का सबसे बड़ा सबक यही है कि अगर जीवन में सब कुछ ठीक नहीं हो पाया है तो कहानी भी अभी पूरी नहीं हो पाई है। संघर्ष जीवन का हिस्सा है। मेहनत कामयाबी की सर्वमान्य सीढ़ी है और किस्मत भी साथ उन्हीं का देती है, जो खुद पर भरोसा रखते हैं। ऐसे ही जीवन चक्र से गुजरती हैं आज के संडे बाइस्कोप की ये फिल्में। अगर बीते हफ्ते आप इन्हें पढ़ने से चूक गए तो एक बार फिर दबाइए रिवाइंड बटन और पढ़िए इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प किस्से।


 

Sunday bioscope by Pankaj Shukla aashiqui tera jadoo chal gayaa naaraz Arjun pandit dil se
आशिकी फिल्म - फोटो : अमर उजाला

महेश भट्ट की प्रेम कहानी
महेश भट्ट की फिल्ममेकिंग की खासियत यही रही है कि वह अपनी फिल्मों को अपनी निजी जिंदगी का हिस्सा बनाकर उसे प्रचारित करते रहे हैं। फिल्म ‘आशिकी’ को भी महेश भट्ट अपनी और अपनी पहली पत्नी लॉरेन ब्राइट (किरण भट्ट) की कहानी बताते हैं। फिल्म मे दिखाए गए तमाम सीन भी महेश भट्ट के मुताबिक उनकी असल जिंदगी से प्रेरित रहे हैं। हालांकि, फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले दीपक तिजोरी का ये कहना रहा है कि इस फिल्म का मूल आइडिया उनका सुझाया हुआ है और इसके लिए एक विदेशी फिल्म का वीएचएस कैसेट भी उन्होंने महेश भट्ट को दिया था। दीपक तिजोरी ने तब फिल्म के लीड हीरो का किरदार करने के लिए महेश भट्ट की काफी सेवा की थी। हालांकि, मौका दीपक को फिल्म में सेकेंड लीड का ही मिला फिर भी इस फिल्म ने उनकी किस्मत चमका दी।

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तेरा जादू चल गया - फोटो : अमर उजाला

वाशू के करियर की पहली फ्लॉप
वाशू भगनानी साल 1995 में फिल्म ‘कुली नंबर वन’ से शुरू करके पांच लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में बना चुके थे। इन फिल्मों में शामिल रहीं फिल्में हैं, ‘हीरो नंबर वन’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘बीवी नंबर वन’। ‘तेरा जादू चल गया’ बतौर प्रोड्यूसर उनके करियर की पहली फ्लॉप फिल्म रही। हालांकि, फिल्म का म्यूजिक जरूर खूब बिका लेकिन उसकी वजह थी इसके संगीतकार इस्माइल दरबार। इस्माइल को साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में संगीत देने के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मफेयर ने भी उन्हें इसी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस्माइल ने उन दिनों के एक के बाद एक तमाम फिल्में साइन कर ली थीं। लेकिन, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के तुरंत बाद रिलीज होने वाली ये उनके करियर की दूसरी फिल्म रही। फिल्म का टाइटल सॉन्ग उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था।

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नाराज - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

कहानी दोस्ती और प्यार की
फिल्म ‘नाराज’ की कहानी है एक रईस अजय पंडित और एक गरीब देवा के रिश्तों की कहानी। दोनों का आपसी प्यार और एक दूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा ही फिल्म की अंतर्धारा है। देवा बने मिथुन चक्रवर्ती के साथ थीं फिल्म में पूजा भट्ट और अजय पंडित बने अतुल अग्निहोत्री की हीरोइन थी सोनाली बेंद्रे। महेश भट्ट के साथ मिथुन इससे पहले फिल्म ‘तड़ीपार’ कर चुके थे और उन दिनों एक अलग ही दुनिया में रहने लगे थे। उनके तमाम करीबी लोग मिथुन के इस दौर के बारे में कम ही जानते हैं। उन दिनों मिथुन जिस धारा में बह रहे थे, उसने निजी जिंदगी में उनको कष्ट भी काफी पहुंचाया। महेश भट्ट के कहने पर मिथुन ने उनकी फिल्म ‘नाराज’ कर तो ली, लेकिन फिर इसके बाद वह महेश भट्ट की किसी दूसरी फिल्म में नजर नहीं आए। हां, मिथुन, अतुल और पूजा भट्ट की तिकड़ी इसके अगले ही साल विक्रम भट्ट की फिल्म ‘गुनहगार’ में जरूर नजर आई।

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अर्जुन पंडित - फोटो : अमर उजाला

राज कपूर को देख निर्देशक बने रवैल
राहुल रवैल और ऋषि कपूर गहरे दोस्त रहे हैं। राहुल रवैल के पिता एस एस रवैल की बनाई फिल्म ‘लैला मजनू’ ने ऋषि कपूर को स्टारडम की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। राहुल रवैल का मन शुरू से न्यूक्लियर साइंटिस्ट बनने का था और उन्होंने इसके लिए विदेश जाने की तैयारियां भी कर ली थीं। लेकिन, ऋषि कपूर के साथ एक ‘मेरा नाम जोकर’ के सेट पर जाना उनके लिए जिंदगी का एक अलग ही सबक लेकर आया। राहुल रवैल ने वहां राज कपूर को एक साथ सैकडों की यूनिट को नियंत्रित करते देखा तो उनका मन बदल गया। वह राज कपूर के लंबे समय तक असिस्टेंट रहे। फिल्म ‘लव स्टोरी’ से राहुल रवैल मशहूर हुए। पर, फिल्म के हीरो कुमार गौरव के पिता और फिल्म के निर्माता राजेंद्र कुमार से उनकी ऐसी खटकी कि उन्होंने फिल्म के टाइटिल्स से अपना नाम ही वापस ले लिया।

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