अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और राजनेता रहे सुनील दत्त ने जिस भी क्षेत्र में कदम रखा वहां उन्होंने लाजवाब ख्याति प्राप्त की। इंडस्ट्री में कदम रखने से पूर्व रेडियो एनाउंसर के तौर पर काम करने वाले सुनील दत्त ने फिल्मों में नायक से लेकर खलनायक दोनों तरह के किरदार निभाए। वह जब पांच वर्ष के थे तभी उनके पिता दीवान रघुनाथ दत्त की मृत्यु हो गई थी। उनकी परवरिश उनकी मां कुलवंती देवी ने की थी। कभी मुंबई की बस डिपो में चेकिंग क्लर्क की नौकरी कर चुके सुनील दत्त ने साल 1955 में फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' से अपने करियर की शुरुआत की। सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना नाम सुनील रख लिया। उन्होंने अपने करियर में संजीदा अभिनय से लेकर हास्य और भावुक सभी तरह की फिल्मों में काम किया। वहीं राजनेता के तौर पर वह पांच बार सांसद रहे और कांग्रेस की सरकार में युवा और खेल विभाग के मंत्री भी बने। 25 मई 2005 को सुनील दत्त ने इस दुनिया को अलविदा कहा। अपने करीब 50 साल के करियर में उन्होंने दर्जनों फिल्मों में अभिनय किया। उनकी इस लंबी फेरिस्त से हम आपसे उनके कुल 10 चुनिंदा किरदारों का ब्यौरा साझा कर रहे हैं।
बस डिपो में नौकरी से लेकर रेडियो तक में सुनील दत्त ने किया काम, बड़े पर्दे पर इन 10 किरदारों से छोड़ी अमिट छाप
फिल्म: मदर इंडिया (1957)
फिल्म 'मदर इंडिया' हिंदी सिनेमा जगत की यादगार फिल्मों में शुमार है। फिल्म का निर्देशन महबूब खान ने किया था। फिल्म में सुनील दत्त के अलावा नरगिस, राज कुमार और राजेंद्र कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म में सुनील दत्त ने पहली दफा अभिनेत्री नरगिस के साथ काम किया था। फिल्म में दोनों मां-बेटे के किरदार में थे। इस फिल्म के सेट से जुड़ा एक किस्सा बहुत ही मशहूर है कि फिल्म के सेट पर एक बार आग लग गई थी जिसमें सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेल कर नरगिस की जान बचाई थी और तब से दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ने लगा। फिल्म में सुनील दत्त ने बिरजू का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ ही फिल्मफेयर के कई पुरस्कार अपने नाम किए, साथ ही ऑस्कर की रेस में शुमार होने वाली पहली भारतीय फिल्म का तमगा भी हासिल किया।
किरदार: ठाकुर जरनैल सिंह
फिल्म: मुझे जीने दो (1963)
सुनील दत्त ने इस फिल्म के लिए पहली दफा फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया था। फिल्म में उन्होंने एक डकैत की भूमिका अदा की थी। इस किरदार में उन्होंने गजब का अभिनय किया था जिसके दर्शक कायल हो गए और देखते ही देखते यह उस साल की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई। फिल्म में सुनील दत्त के अलावा वहीदा रहमान, निरूपा रॉय, मुमताज और राजेंद्र नाथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। इस फिल्म का निर्माण भी खुद सुनील दत्त ने किया था
किरदार: अनिल
फिल्म: यादें (1964)
सुनील दत्त के करियर में 'यादें' पहली ऐसी फिल्म रही जिसमें वह मुख्य अभिनेता के साथ ही निर्माता और निर्देशक के तौर पर भी नजर आए थे। इसे हिंदी सिनेमा जगत की पहली ऐसी फिल्म कहा जाता है जो कि पूरी तरह से एक कलाकार पर आधारित थी। इसी वजह से यह फिल्म गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाने में भी कामयाब हुई। फिल्म में अनिल बने सुनील जब घर आते हैं तो अपनी बीवी और बच्चे को नहीं पाते हैं। जिसके बाद वह खुद से बात करना शुरू कर देते हैं। फिल्म में सुनील दत्त ने अव्वल दर्जे का अभिनय किया है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
किरदार- गोविंद शंकर लाल
फिल्म- खानदान (1965)
इस फिल्म के लिए सुनील दत्त ने दूसरी दफा फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्राप्त किया था। फिल्म का निर्देशन ए.भीमसिंह ने किया था। फिल्म में सुनील दत्त के अलावा नूतन, प्राण, ओम प्रकाश, ललिता पवार, हेलन और मुमताज ने भी अभिनय किया। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफलता प्राप्त हुई थी और यह उस साल की सातवीं सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई थी। यह एक तमिल फिल्म की रीमेक थी। इस फिल्म में सुनील दत्त ने एक अपाहिज का किरदार निभाया है।