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सीबीआई को सौंपा गया सुशांत सिंह राजपूत का केस, जानिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

Wed, 19 Aug 2020 08:13 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Avinash Pal Updated Wed, 19 Aug 2020 08:13 PM IST
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Supreme Court verdict in hindi on Sushant Singh Rajput Case and  Rhea Chakraborty petition including CBI Patna Police and Bihar Police
सुशांत- रिया केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने आज(बुधवार) को सुशांत सिंह राजपूत केस में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका पर अपना फैसला सुना दिया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराने का सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि बिहार सरकार के पास इस बात के पूरे अधिकार हैं कि वो पटना में एफआईआर दर्ज करे और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से करवाए। यह फैसला एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय ने सुनाया है। ऐसे में हम आपको बताते हैं 35 पन्नों के फैसले के बारे में।

Supreme Court verdict in hindi on Sushant Singh Rajput Case and  Rhea Chakraborty petition including CBI Patna Police and Bihar Police
रिया चक्रवर्ती, सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : Social Media

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को 14 जून 2020 को उनके बांद्रा, मुंबई स्थित निवास स्थान पर मृत पाया गया था। जिसके बाद मुंबई पुलिस ने धारा 174 के तहत अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था। मुंबई पुलिस की जांच से अंसतुष्ट  सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने पटना, बिहार में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। ये एफआईआर 341, 342, 380, 406, 420, 306, 506 और 120बी के तहत दर्ज करवाई गई थी।  इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस केस में रिया चक्रवर्ती की ओर से वकील श्याम दीवान, बिहार सरकार की ओर से मनिंदर सिंह, केके सिंह की ओर से विकास सिंह, महाराष्ट्र सरकार की ओर से  अभिषेक मनु सिंघवी सहित आर बसंत और सीबीआई की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश की थीं।



 

Supreme Court verdict in hindi on Sushant Singh Rajput Case and  Rhea Chakraborty petition including CBI Patna Police and Bihar Police
Sushant Singh Rajput

बिहार सरकार के वकील मनिंदर सिंह ने अपनी दलील में कहा कि शिकायत में एक अपराध का खुलासा किया गया है और इसलिए पटना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने और जांच के लिए आगे बढ़ना उचित समझा। चूंकि आपराधिक कृत, धोखाधड़ी और मृतक के खाते से पैसे के हेरफेर के आरोप हैं, इसलिए ऐसे में बिहार पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही थी। मनिंदर सिंह ने कहा कि चूंकि मुंबई पुलिस द्वारा एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है तो बिहार पुलिस मामले की छानबीन अलग धाराओं के तहत कर सकती है क्योंकि एफआईआर बिहार पुलिस के पास दर्ज हुई है। मनिंदर सिंह ने बिहार पुलिस की एसआईटी से महाराष्ट्र प्रशासन के व्यवहार का भी जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई पुलिस इस केस में सही दिशा में जांच नहीं कर रही है और तथ्यों को दबाने की कोशिश कर रही है। न सिर्फ दिवंगत अभिनेता के पिता केके सिंह बल्कि याचिकाकर्ता भी सीबीआई जांच की मांग कर चुकी हैं और जब सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में लेकर जांच करना शुरू किया तो कोर्ट में याचिका दे दी गई।

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Sushant Singh Rajput

केके सिंह की ओर से विकास सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया है। वहीं जिन हालात में सुशांत की मौत हुई है वो संदेह पैदा करते हैं। ऐसे में केस की निक्षपक्ष जांच बेहद अहम है। विकास सिंह ने आगे कहा कि जिन मुद्दों पर मुंबई पुलिस जांच कर रही है वो शिकायतकर्ता के आरोपों से एक दम अलग हैं। बिहार पुलिस के अलावा इस केस में कहीं कोई और एफआईआर दर्ज ही नहीं हुई है। ऐसे में धारा 406 के तहत इस केस को ट्रांसफर करना चाहिए।

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Sushant Singh Rajput – BMW K1300R

महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा मुंबई पुलिस ने अपनी जांच में 56 लोगों के बयान दर्ज किए, इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर भी विशेष ध्यान दिया। अगर इस पूरी जांच के दौरान कुछ भी संदेहजनक सामने आता तो मुंबई पुलिस एफआईआर दर्ज करती। अभिषेक ने आगे कहा चूंकि क्षेत्र महाराष्ट्र पुलिस के अधिकार में आता है तो बिहार पुलिस को भी अपनी रिपोर्ट आगे मुंबई पुलिस को सौंप देनी चाहिए। इसके साथ ही ये लोग जीरो एफआईर भी दर्ज कर मुंबई पुलिस को सौंप सकते थे। बिहार पुलिस के मनमाने रवैये से इस देश के कानून पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही अभिषेक ने ये भी कहा कि बिहार पुलिस इस मामले को दर्ज करने में हिचकिचा रही थी लेकिन राजनीतिक दबाव में आकर ऐसा किया गया। अभिषेक ने अपने बयान में आगे कहा कि शिकायतकर्ता ने मुंबई पुलिस पुलिस को कभी भी इन आरोपों का जिक्र नहीं किया जो बिहार पुलिस की एफआईआर में दर्ज करवाए गए। बिहार पुलिस के दावे इतने मजबूत नहीं कि केस उन्हें दिया जाए, ऐसे में जांच लोकल पुलिस (मुंबई पुलिस) को ही करनी चाहिए।

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