दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर अपने करियर में अब तक करीब 500 फिल्मों में काम कर चुके हैं। जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं, अपनी एक अलग छाप छोड़ते हैं। मुंबई में आयोजित डिज्नी प्लस हॉटस्टार की सीरीज 'द फ्रीलांसर द कंक्लूजन' के प्रेस कांफ्रेंस के अवसर पर अभिनेता अनुपम खेर ने बातचीत के दौरान बताया कि एक्टिंग बिल्कुल भी बाएं हाथ का खेल नहीं है। आज भी वह अच्छे काम के लिए संघर्ष करते हैं। और, हफ्ते काम मांगने के लिए मुंबई भ्रमण पर भी निकलते हैं। इस दौरान वह अपने परिचितों के साथ खाना खाते हैं। खाना तो बस बहाना होता है, असल काम काम मांगना होता है।
Anupam Kher: ऐसा लगता है कि व्हीलचेयर पर बैठकर काम मांगने जा रहा हूं, जानिए अनुपम खेर ने क्यों कही ऐसी बात
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निर्माता और रचयिता नीरज पांडे की सीरीज 'द फ्रीलांसर' का दूसरा सीजन डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर 15 दिसंबर से स्ट्रीम होने जा रहा है। अभिनेता अनुपम खेर एक बार फिर डॉ. आरिफ अजमल खान की भूमिका में नजर आएंगे। अभिनय में लंबे समय से अनुपम खेर सक्रिय हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब अनुपम खेर से पूछा गया कि अब तो अभिनय करना उनके बाएं हाथ का खेल होगा। अनुपम खेर ने कहा, 'अभिनय करना बिल्कुल भी बाएं हाथ का खेल नहीं हैं। इसमें हमेशा दिल दिमाग और पूरा शरीर लगा रहता है।'
अभिनेता अनुपम खेर कहते हैं, 'द फ्रीलांसर में मेरे लिए काम करना एक ऑडिशन जैसा था। मुझे लगा कि इसने मेरा काम अच्छा होगा तो इसके दूसरे सीजन में और बेहतर काम करने का मौका मिलेगा। पहले सीजन की अपेक्षा 'द फ्रीलांसर द कंक्लूजन' में मेरा किरदार और भी ज्यादा प्रभावी है। एक एक्टर होने के नाते मन में यह लालच जरूर होता हैं कि हर फ्रेम में मैं ही नजर आऊं। लेकिन मेरी मां कहती हैं कि भरपेट कभी भी काम नहीं करना चाहिए ताकि अगली फिल्म या सीरीज में काम करने की भूख बरकरार रहे।'
अभिनेता अनुपम खेर आज इस मुकाम पर हैं कि आज उन्हें किसी के दफ्तर में जाकर काम मांगने की जरूरत नहीं है। लेकिन, अनुपम खेर कहते हैं, 'मेरे जो पसंदीदा निर्देशक हैं, उनसे हफ्ते में एक बार जरूर मिलने जाता हूं। भले ही उनके साथ लंच करने के बहाने मिलता हूं, लेकिन इसके पीछे मेरा मकसद काम मांगना होता है। मुझे लीजेंड शब्द सुनकर बहुत बुरा लगता हैं। जब यह शब्द सुनता हूं तो मुझे ऐसा अनुभव होता है कि बैसाखी पकड़कर या फिर व्हील चेयर पर बैठकर काम करने जा रहा हूं।'
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