हॉरर फिल्मों का अपना एक अलग दर्शक वर्ग है। समय- समय पर भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों को स्वरूप काफी बदला है। रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्मों से लेकर अब तक हॉरर फिल्मों की मेकिंग में काफी बदलाव आया है। फिर भी बॉलीवुड अभिनेत्री गुल पनाग का मानना है कि दक्षिण कोरिया और जापान में जिस तरह की हॉरर फिल्में बनती है, वैसी फिल्में अभी भी भारत में नहीं बन रही है। हाल ही में गुल पनाग की एक शॉर्ट हॉरर फिल्म 'द हॉन्टिंग' रिलीज हुई है।
Gul Panag: गुल पनाग की देसी हॉरर फिल्मों से गंभीर शिकायत, बोलीं, अब भी नहीं बना रहे स्तरीय डरावनी कहानियां
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हॉरर थ्रिलर फिल्म 'द हॉन्टिंग' में गुल पनाग ने मनोचिकित्सक की भूमिका निभाई हैं। गुल पनाग कहती हैं, 'हॉरर-थ्रिलर शैली की फिल्मों के बारे में एक अभिनेत्री और एक दर्शक के रूप में मैं यह सोचती हूं कि अभी हमने भारत में हॉरर-थ्रिलर शैली के साथ न्याय नहीं किया। इस जॉनर पर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। हॉलीवुड की फिल्मों की तरह इसका दायरा बढ़ना चाहिए।'
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भारत में बनने वाली हॉरर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनने वाली फिल्मों की तुलना करते हुए गुल पनाग कहती हैं, 'देखो बाकी दुनिया क्या कर रही है? कोरियाई और जापानी अपनी हॉरर फिल्मों को किस स्तर पर बना रहे हैं। बेशक, हॉलीवुड ने लंबे समय तक अविश्वसनीय हॉरर फिल्मों का निर्माण किया है। इसलिए, मुझे लगता है कि हॉरर में प्रदर्शन करने का दायरा और अविश्वसनीय दृश्य प्रभावों वाली फिल्मों का हिस्सा बनने का दायरा बहुत बड़ा है। अब, एक दर्शक के रूप में मुझे व्यक्तिगत रूप से डरावनी फिल्में देखने से डर लगता है। लेकिन फिल्में ऐसी होनी चाहिए जिसे देखकर दर्शकों को डर का अहसास हो, एक डरावनी फिल्म का अंतिम लक्ष्य डर होना चाहिए।'
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अभिनेत्री गुल पनाग मानती हैं कि उनकी हॉरर- थ्रिलर फिल्म 'द हॉन्टिंग' एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को बांधे रखती है। यह फिल्म सत्य घटना पर आधारित है। फिल्म की कहानी मौसमी नाम की एक लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर भूतों का साया है और उस पर अपने सबसे करीबी दोस्त की हत्या का आरोप है। यह एक दिल दहला देने वाली कहानी है। गुल पनाग कहती हैं, 'द हॉन्टिंग' में काम करने एक अलग ही अनुभव रहा है। भारत में बनने वाली थ्रिलर- हॉरर फिल्मों से यह काफी अलग है। शुरू से ही मैं ऐसी भूमिकाओं का चुनाव करती हूं, जो मुझे उत्साहित करता है।'
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अभिनेत्री गुल पनाग के फिल्मी करियर पर नजर डाले तो फिल्मों के चयन को लेकर शुरू से ही सावधानी बरतती आई हैं। चाहे वह 'धूप' हो, 'डोर', 'मनोरमा सिक्स फीट अंडर', या फिर 'द फैमिली मैन', 'रंगबाज', 'पाताल लोक' जैसी वेब सीरीज हो। गुल पनाग ने अपने समकालीन अभिनेत्रियों के मुकाबले बहुत कम काम किया है, लेकिन जितना भी काम किया हैं, उनमें उनके किरदार को नोटिस किया गया है।
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