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इन फिल्मों पर पहलाज के एतराज हमेशा रहेंगे याद

Sat, 12 Aug 2017 08:05 AM IST
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी Updated Sat, 12 Aug 2017 08:05 AM IST
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These Censorship of Pahlaj Nihalani will remain in history
पहलाद निहलानी

सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का पूरा कार्यकाल विवादों से भरा रहा। पहलाज से पहले शायद ही किसी अध्यक्ष ने फिल्मों पर इतनी कैंची चलाई हो। बॉलीवुड की कई हस्तियों ने बोर्ड के इस रवैए पर सवाल भी खड़े किए लेकिन पहलाज तो पहलाज ही थे, अड़े रहे।

These Censorship of Pahlaj Nihalani will remain in history
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का
इन फिल्मों की वजह से हुआ जमकर विवाद

पहलाज से जुड़े विवादों का जिक्र होगा तो सबसे पहले नाम आएगा ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ फिल्म का। वजह इस फिल्म का बोल्ड विषय नहीं बल्कि सेंसर बोर्ड को उसी की पिच पर बोल्ड करना है। डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को जब बोर्ड ने यह कहकर रोकने की कोशिश की कि इसका विषय बहुत ज्यादा महिला संबंधी और फैंटेसी बेस्ड है तो फिल्म डायरेक्टर्स की टीम ने फिल्म प्रमाणन अपीलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा दिया। नतीजा ये हुआ की फिल्म ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज हो गई।
 
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These Censorship of Pahlaj Nihalani will remain in history
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का
फिल्म भी रिलीज हुई लेकिन उससे पहले उसका ट्रेलर आया। इस ट्रेलर ने सेंसर बोर्ड के हर सवाल का जवाब दिया। मीडिया की हर उस हेडलाइन को दिखाया जिसमें बोर्ड ने फिल्म में अड़ंगा लगाने की कोशिश की। ऑफबीट फिल्मों के लिहाज से देखें तो इस फिल्म ने बॉक्स आफिस पर धमाल मचा दिया। इस फिल्म ने अपनी लड़ाई न केवल जीती बल्कि सेंसर बोर्ड को चुनौती भी दी।
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जब हैरी मेट सेजल
सबसे हालिया मामला 'जब हैरी मेट सेजल' फिल्म से जुड़ा है। पहलाज निहलानी ने इस फिल्म के ट्रेलर में 'इंटरकोर्स' शब्द के इस्तेमाल से एतराज किया। लोगों ने जमकर विरोध किया। इस पर उन्होंने एक टीवी चैनल पर कहा कि अगर इसके पक्ष में एक लाख वोट आ जाएं तो वह इस शब्द को नहीं हटाएंगे। लेकिन एक लाख वोट आने के बाद भी जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तब उनका खूब मजाक बना।

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दम लगा के हईशा
आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की फिल्म 'दम लगा के हईशा' में 'लेस्बियन' शब्द के इस्तेमाल पर भी सेंसर बोर्ड ने अपनी आपत्ति जताकर इसे म्यूट कर दिया। समलैंगिकता के मुद्दे पर बनी फिल्म 'अलीगढ़' को सेंसर बोर्ड द्वारा 'ए' सर्टिफिकेट दिया गया इस पर डायरेक्टर हंसल मेहता का बयान आया कि सेंसर बोर्ड को समलैंगिकता से नफरत है।
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