रक्षाबंधन के त्यौहार पर हिंदी सिनेमा में कई फिल्में बन चुकी हैं। इन सभी फिल्मों में रक्षाबंधन पर गाने भी थे जो आज भी रक्षाबंधन पर बजाए जाते हैं। भाई-बहन के इस प्यार को फिल्मी पर्दे पर बड़ी शिद्दत से दिखाया जाता है। वो बात अलग है कि समय बदलने के साथ बॉलीवुड में बहन-भाइयों की छवि बदलती गई और वे आधुनिक होते गए, फिर भी रक्षाबंधन से बॉलीवुड का जुड़ाव बना रहा। रक्षाबंधन के इस त्योहार पर आइए बात करते हैं उन फिल्मों की जो भाई-बहन के प्यार पर टिकी हैं।
ये 5 बॉलीवुड फिल्में न होतीं तो बदल जाते राखी के मायने, फीकी पड़ सकती थीं खुशियां
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'सिकंदर'
राखी के त्योहार को फिल्मों में दिखाने की शुरुआत 1941 में आई फिल्म 'सिकंदर' से हुई थी। इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर ने सिकंदर की भूमिका निभाई थी। महबूब खान की फिल्म 'हुमायूं' में भी इस त्यौहार को दिखाया गया था। हुमायूं में अशोक कुमार ने हुमायूं और वीना ने कर्णावती की भूमिका निभाई थी। इसके बाद तो फिल्मों में राखी का त्योहार दिखाने का सिलसिला ऐसा चला कि आज तक कायम है। कहा जाता है राखी की शुरुआत भी हुमायूं और कर्णावती के प्यार के बाद हुई थी।
आत्माराम के निर्देशन में बनी 1974 में आई फिल्म 'रेशम की डोरी' में भाई-बहन के बीच प्यार को बखूबी दिखाया गया। इस फिल्म में धर्मेद्र और उनकी बहन के प्यार ने दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए और इस फिल्म का गाना 'बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है..' आज भी बड़ी शिद्दत से सुना जाता है।
'हम साथ-साथ हैं'
रिश्तों को बखूबी बयां करती फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' आज भी दर्शकों को खूब पसंद आती है। इस फिल्म में नीलम और उसके तीन भाइयों सलमान, सैफ और मोहनीश बहल के प्रेम को दर्शकों ने बेहद प्यार किया।
'जोश'
समय बदला तो भाई-बहन के प्यार का अंदाज भी बदला। अब फिल्मों में आधुनिकता आने लगी। 'जोश' फिल्म में शाहरुख खान-ऐश्वर्या राय भाई-बहन के रोल में थे। फिल्म में शाहरुख अपनी बहन के प्यार के लिए विलेन बनते नजर आए। हालांकि दर्शक इस जोड़ी में भाई-बहन वाली इमेज नहीं देख पाए।