इनकी 'गाली पर भी ताली' पड़ती है, क्योंकि इनके मन में 'गलती करने का ख्याल' भी आता है। इनकी मानें तो 'बीहड़ में बागी' मिलते हैं और 'मर्द गालियां इसलिए देते हैं, क्योंकि वो रोते कम' हैं। दरअसल, बात हो रही है तिग्मांशु धूलिया की, जिनके डायलॉग बॉलीवुड के नए नजरिए की नुमाइश पेश करते हैं। आज इन्हीं तिग्मांशु का बर्थडे है तो रूबरू होते हैं उनके बेहतरीन डायलॉग्स से, क्योंकि उनका मानना है...'जो कम बोलते हैं, वो ज्यादा जीते हैं!'
'जो कम बोलते हैं ना वो ज्यादा जीते हैं...', पढ़िए तिग्मांशु धूलिया के दमदार डायलॉग्स
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'सबसे ज्यादा पसंद मुझे ये दूरी है, क्योंकि अगर ये दूरी न हो...तो तुम्हारे करीब आने का बहाना ना मिले... फिल्म- दिल से
सोच समझ के तो इम्तिहान दिया जाता है इंतकाम नहीं- फिल्म- साहेब बीवी और गैंगस्टर
नजर का ही तो खेल है सब, वरना दिल तो हमारा भी साफ है, भगवान ने हमें ऐसी आंखें दे दी हैं क्या कहें..- हासिल
आपको पता है मर्द ज्यादा गालियां क्यों देते हैं, क्योंकि वो रोते कम' हैं- साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स
'अरे तू पूरो पत्रकार बन गओ है कि ट्रेनिंग पे है? जे इलाके का होक भी पतो नहीं है? बीहड़ में बागी होते हैं डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में'- पान सिंह तोमर
जंग में तो ना जाने दिया हमको, जान जोखिम में ना डालने दी. अब इज्जत को जोखिम में डालके, खेल को जंग का मैदान बना देंगे- पान सिंह तोमर
अभी गलती हुई कहां है, अभी तो सिर्फ गलती करने का ख्याल आता है- साहेब बीवी और गैंगस्टर
जो कम बोलते हैं ना वो ज्यादा जीते हैं- साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स