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पुण्यतिथि विशेष: उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के महात्मा गांधी भी थे मुरीद, लता मंगेशकर से 50 फीसदी ज्यादा लेते थे फीस

Mon, 25 Apr 2022 12:19 PM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Mon, 25 Apr 2022 12:19 PM IST
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ustad bade ghulam ali khan death anniversary Mahatma Gandhi Tansen Lata Mangeshkar Mohammad Rafi
उस्ताद बड़े गुलाम अली ख़ान - फोटो : सोशल मीडिया

'जगत उस्ताद' के नाम से मशहूर बड़े गुलाम अली ख़ान की आज 54वीं पुण्यतिथि है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पटियाला घराने के गायक को जो सम्मान, प्रसिद्धि और स्थायित्व मिला, वो शायद ही किसी अन्य कलाकार को कभी भी मिला होगा। ऐसा माना जाता है कि तानसेन सुरों के सम्राट थे और ताल उनकी दासी थी। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मियां तानसेन जैसी आवाज कभी किसी की नहीं हो सकती। लेकिन संगीत प्रेमियों के विचार इससे भिन्न हैं। उस समय रिकॉर्डर न होने की वजह से तानसेन की आवाज को कभी रिकॉर्ड नहीं किया जा सका, लेकिन यदि उनके पास रिकॉर्डिंग की सहूलियत होती और उनकी आवाज को संरक्षित किया गया होता, तब भी संगीत प्रेमी उस्ताद बड़े गुलाम अली ख़ान को ही ज्यादा श्रेष्ठ गायक मानते। 

यहां पढ़िए जगत उस्ताद के बारे में कुछ अनसुने किस्से

ustad bade ghulam ali khan death anniversary Mahatma Gandhi Tansen Lata Mangeshkar Mohammad Rafi
उस्ताद बड़े गुलाम अली ख़ान - फोटो : सोशल मीडिया

महात्मा गांधी ने पत्र में कही थी ये बता
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी बड़े गुलाम अली खान के मुरीद थे। यह बात 26 मई 1944 की है। राष्ट्रपिता ने बड़े खान साहब की महान कला के सम्मान में एक पत्र लिखा था। इस पत्र में गांधी जी लिखते हैं, आपने मुंबई की प्रार्थना सभा में आकर मधुर भजन सुनाया इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मुझे संगीत की समझ नहीं हैं। मैं उस्तादों का गाना बहुत कम सुनता हूं। लेकिन जिस गीत में ईश्वर का नाम आ जाए, वह मुझे बहुत अच्छा लगता है।

ustad bade ghulam ali khan death anniversary Mahatma Gandhi Tansen Lata Mangeshkar Mohammad Rafi
उस्ताद बड़े गुलाम अली ख़ान - फोटो : सोशल मीडिया

रिकॉर्डिंग कराने वाले गायक का निधन...
सन 1877 में पहली बार दुनिया में रिकॉर्डिंग होना शुरू हुई थी। संयुक्त भारत में, गोहर जान, वो पहली गायिका थीं, जिनकी आवाज को 1902 में रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि उस दौरान लोगों के बीच यह मानसिकता बन गई थी कि जो भी गायक संगीत रिकॉर्ड कराएगा, वही मारा जाएगा। क्योंकि संयोग से उस दौर में अपना संगीत रिकॉर्ड कराने वाले कुछेक गायकों का निधन हो गया था। इसलिए लोग रिकॉर्डिंग से डरने लगे। लेकिन बड़े गुलाम अली खान ने इस धारणा को गलत साबित किया। दरअसल गौहर जान, उस्ताद गुलाम अली खान के चाचा और उस्ताद काले खान की शागिर्द थी। उन्होंने ही इस धारणा को गलत साबित करते हुए युवावस्था में रिकॉर्डिंग शुरू की और अपने बहुत सारे गाने रिकॉर्ड कराए।

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ustad bade ghulam ali khan death anniversary Mahatma Gandhi Tansen Lata Mangeshkar Mohammad Rafi
उस्ताद बड़े गुलाम अली ख़ान - फोटो : सोशल मीडिया

लता मंगेशकर से 50 फीसदी ज्यादा फीस 
फिल्मी इतिहास की क्लासिक फिल्म 'मुग़ल.ए.आज़म' के लिए उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने 25 हजार रुपये तक की फीस चार्ज की थी। उस समय में प्रसिद्ध दिवंगत गायिका लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे गायक एक गाने के लिए चार सौ से लेकर पांच सौ रुपये तक चार्ज करते थे।

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