पूर्वांचल के व्यापार और राजनीतिक गठजोड़ को दर्शाती है वेब सीरीज मिर्जापुर की कहानी
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अमेजन प्राइम वीडियो पर मिर्जापुर वेब सीरीज आखिरकार रिलीज हो ही गई। वेब सीरीज ने हिंदुस्तान के उभरते निर्देशकों और पटकथा लेखकों को जो अवसर दिए हैं उनको वह विश्व स्तरीय कैसे बना सकते हैं उसकी झलक मिर्जापुर में दिखाई देती है। खून खराबे के दृश्य देखते हुए आपको हॉलीवुड के 300-राइजिंग ऑफ एन एंपायर जैसे विश्वस्तरीय एडीटिंग का एहसास होगा। मुंबई मूल के होने के बावजूद करन अंशुमन ने जिस तरह से सीरीज में जान डाली है वह देखने लायक है। सीरीज दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब दिखाई देती है इसकी बड़ी वजह उसमें कलाकारों की सशक्त एक्टिंग है।
सीरीज का टीजर देखकर अगर आपको लग रहा है कि यह आपको गैंग ऑफ वासेपुर जैसा मसाला पेश करेगी तो ये गलतफहमी हो सकती है। मिर्जापुर में कालीन के कारोबार और उसकी आड़ में सामाजिक वर्चस्व कायम करने के लिए किए जाने वाले धंधों को निभाने में क्या कुछ होता है, कैसे पुलिस, राजनीतिज्ञों से गठजोड़ किया जाता है यह सब कुछ इसमें फिल्माया गया है। इसके अलावा कॉलेज की राजनीति पूर्वांचल में जैसे की जाती है वैसी है। लड़कपन का प्यार देखने को नहीं मिलेगा। असल जिंदगी में एक व्यस्क के जीवन में प्यार के नाम पर जो कुछ घट सकता है उसे दिखाया गया है। लिहाजा आपको वो सब कुछ स्क्रिप्टेड नहीं लगेगा।
वेब सीरीज मिर्जापुर के कालीन कारोबार, तमंचों के धंधे और पुलिस-राजनीतिज्ञों के इर्द-गिर्द घूमती है। वेब सीरीज की एक बड़ी खासियत है कि यह बडे़ पर्दे की तरह केवल एक ही नाम या पात्र पर केंद्रित नहीं रहती। बल्कि हर पात्र को उसके किरदार को पूरी तरह निभाने का मौका देती है। वो इसमें दिखाई देता है। कालीन के बड़े कारोबारी अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के साम्राज्य का बोलबाला मिर्जापुर में हैं। उनके बेटे फूलचंद त्रिपाठी उर्फ मुन्ना भैया (दिव्येंदु शर्मा) शहर में अपना सिक्का जमाने के लिए हर कोशिश में लगे हुए हैं। इसी शहर के साधारण वकील रमाकांत पंडित (राजेश तैलंग) अपनी ईमानदारी को पूरी शिद्दत से निभाते हैं।
कॉलेज की राजनीति से लेकर विधानसभा की राजनीति तक हर गठजोड़ दिखाई देता है। पुलिस का अच्छा और बुरा दोनों किरदार दिखाए गए हैं। उनकी मजबूरी और जरूरत को भी बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया गया है। पंकज त्रिपाठी का किरदार ज्यादा सशक्त है। अपने बिहारी होने की खासियत उन्होंने इस सीरीज में इस्तेमाल की है। पूर्वांचल को वो अच्छे से जानते हैं लिहाजा उनकी एक्टिंग में यह दिखाई देता है। एक बाहुबली की गंभीरता को उन्होंने निभाते हुए किरदार के साथ न्याय किया है। अली फजल मूल रूप से लखनऊ से हैं तो उत्तर प्रदेश का पूरा पुट देने में कामयाब दिखाई दिए हैं।