प्रत्येक वर्ष थियेटर प्रेमी 27 मार्च को वर्ल्ड थियेटर डे के मौके पर शहर के मशहूर नाटक देखने के लिए घर से बाहर निकलते हैं। मुंबई जैसी जगहों पर ऐसे दर्शकों की संख्या अधिक होती है, यहां लोगों के अंदर नाटकों को लेकर उत्साह देखा जाता है। वे बढ़-चढ़ कर नाटकों के साक्षी बनते हैं। हालांकि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते पूरा देश अपने घरों में कैद है। लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। आज के इस डिजिटल युग में सब कुछ आपकी पहुंच में आ गया है। थियेटर प्रेमी सिनेमा जगत के कलाकरों से सजे हुए नाटकों को जी थियेटर के जरिए जी5 से लेकर डिश टीवी, डी टू एच समेत दूसरे प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।
वर्ल्ड थियेटर डे पर घर बैठे उठाइए इन मशहूर नाटकों का लुत्फ, कोरोना भी नहीं डाल पाएगा खलल
अग्निपंख
यह टेलीप्ले 1948 की दमनकारी जमींदारी प्रणाली के खिलाफ है। नाटक में दुर्गेश्वरी, परिवार और समाज में अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास करती हैं। यह किरदार मीता वशिष्ठ द्वारा निभाया गया है।
बगिया बंचाराम की
यह ग्रामीण भारत में सामंती जमींदारी प्रथा की पृष्ठभूमि के खिलाफ सत्ता और गौरव की एक हास्य कहानी है। एक बुजुर्ग बंचाराम अपने बाग को दो लालची जमींदारों के हाथों से सुरक्षित रखने के लिए लड़ रहा है। जिनमें से एक भूत होता है।
सविता दामोदर परांजपे
सविता दामोदर परांजपे एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है। इस नाटक में शरद और कुसुम की कहानी देखने को मिलती है जिनकी शादी को आठ साल हो चुके हैं। हालांकि, कुसुम के स्वास्थ्य के चलते उनकी खुशी में खलल पड़ जाती है। उनका जिदंगी तब बदल जाती है जब उनके पड़ोसी के भतीजे अशोक की एंट्री होती है। उसके आने से छिपे हुए रहस्य उजागर होने लगते हैं। इसमें शिल्पा तुलास्कर ने मुख्य भूमिका निभाई है।
रॉन्ग टर्न
एक युवा व्यक्ति की जिंदगी में तब बदलाव आ जाता है जब वह तीन सेवानिवृत्त वकीलों के साथ एक अस्थायी परीक्षण में भाग लेता है। जो खेल के रूप में शुरू होता है वह जल्द ही एक बुरे सपने में बदल जाता है। इस नाटक में वरुण बडोला, गोविंद नामदेव, लिलिपुट फारुकी, ललित तिवारी और सुनील सिन्हा जैसे कलाकार अहम किरदार में हैं।