आज रोमांस के बादशाह यश चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी है। साल 2012 में डेंगू के बुखार के कारण उनका निधन हो गया था। उन्होंने 'चांदनी', 'दिल तो पागल है', 'वीरा-जारा', 'सिलसिला' और 'जब तक है जान' जैसी बेहतरीन रोमांटिक फिल्में बनाकर सिने जगत को एक अलग मुकाम पर पहुंचाया। उनकी फिल्मों में हीरोइनें ज्यादातर सफेद कपड़ों में नजर आती थीं।
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यश चोपड़ा इंजीनियर बनना चाहते थे लेकिन कुछ जिम्मेदारियों के चलते अपने भाई और फिल्मकार बीआर चोपड़ा और आईएस जौहर के सहायक बन गए। काम करते-करते उनमें भी फिल्म निर्देशित करने की इच्छा हुई। लेकिन वो खुलकर अपने बड़े भाई से नहीं कह पाए। कुछ समय बाद उन्होंने बतौर डायरेक्टर फिल्म 'धूल का फूल' बनाई। साल 1971 में उन्होंने भाई से अलग होकर अपनी कंपनी खोल दी।
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यश ने अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम यशराज प्रोडक्शन रखा। जबकि उनका नाम यश चोपड़ा था। अपने प्रोडक्शन हाउस के लिए उन्होंने घर तक छोड़ दिया था। 1973 में यश ने अपने ही प्रोडक्शन हाउस में राजेश खन्ना के साथ फिल्म 'दाग' बनाई। इस तरह ‘यशराज’ फिल्म्स को अपना नाम मिला। इसमें यश चोपड़ा के नाम से यश और राजेश खन्ना के नाम से राज लेकर एक नाम बनाया गया।
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यही यशराज प्रोडक्शन आज तक बेहतरीन फिल्में दे रहा है। यश चोपड़ा ने बहुत सी यादगार फिल्में बनाईं लेकिन उनकी सबसे फेवरेट फिल्म 'लम्हें' थी। इसमें अनिल कपूर और श्रीदेवी ने काम किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। फिर भी ये यश चोपड़ा की फेवरेट थी। क्योंकि ये फिल्म उस दौर की सोच के हिसाब से कहीं आगे थी।
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यश चोपड़ा की पसंदीदा जगह स्विट्जरलैंड थी। उन्होंने स्विट्जरलैंड की एक झील के किनारे इतनी बार शूटिंग की थी कि उस झील को यश चोपड़ा लेक के नाम से जाना जाता है। यहां तक कि स्विट्जरलैंड के जंगफ्रौ रेलवे स्टेशन पर यश चोपड़ा के नाम से एक ट्रेन भी शुरू की गई। इस ट्रेन की शुरुआत खुद यश चोपड़ा से करवाई गई थी।