पहली बार डिज्नी ने 1994 में ‘द लायन किंग’ को रिलीज किया था। यह फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई थी, क्योंकि इसमें परिवार, प्यार, अपनी पहचान और एक उम्मीद की कहानी को उम्दा तरीके से दिखाया गया था। फिल्म की कहानी एक शेर की है, जो जंगल में अपनी जगह वापस पाना चाहता है, वह अपने पिता की तरह ही एक अच्छा शेर और राजा बनना चाहता है। इस फिल्म को लगभग रिलीज हुए 30 साल हो चुके हैं। साल के शुरू में डिज्नी ने ‘द लायन किंग’ की 30वीं सालगिरह का जश्न भी मनाया था। अब एक बार फिर से मुफासा: द लायन किंग (फ्रैंचाइज फिल्म) 20 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज को तैयार है। इस बार क्या खास है फिल्म में, जो इसे थिएटर में देखने लायक बनाता है? विस्तार से जानिए।
Mufasa The Lion King: शाहरुख की बेटे अबराम संग पहली फिल्म, इन 5 वजहों से भी देखनी चाहिए 'मुफासा: द लायन किंग'
जल्द ही ‘मुफासा: द लायन किंग’ सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके हिंदी वर्जन में शाहरुख खान और पहली बार उनके बेटे अबराम ने मुख्य किरदारों को अपनी आवाज दी है। इस फिल्म को देखने का मजा सिनेमाघर में ही है। जानिए, इस फिल्म से जुड़ी 5 खास बातें।
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मानवीय अनुभव की कहानी
फिल्म ‘मुफासा: द लायन किंग ’ एक अनाथ शेर के बच्चे की कहानी है। इस बार फिल्म में उसके और भाई ताका के बीच के जटिल रिश्तों को दिखाया गया है। साथ ही टिमोन, पुंबा जैसे किरदार भी फिल्म में हैं, जो दर्शकों को अपनी बातों और हरकतों से खूब हंसाते हैं। लेकिन यह कहानी महज एक शेर के बारे में नहीं है, इसके जरिए मानवीय अनुभवों को बयां किया जा रहा है। जैसे मुफासा अपनी पहचान की तलाश में है, उसके सामने कई मुश्किलें आती हैं लेकिन वह हार नहीं मानता है। मजबूती से हर मुश्किल का सामना करता है। आखिर में वह अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है। इस तरह से मुफासा, आशा और उम्मीद का एक प्रतीक है। मुफासा की कहानी हमें सीख देती है कि ईमानदारी और मजबूत इरादों से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। हम भी मुफासा की तरह एक अच्छे लीडर बन सकते हैं।
बैरी जेनकिंस का अलग नजरिया
‘मूनलाइट’ और ‘इफ बील स्ट्रीट कुड टॉक’ जैसी इमोशनल फिल्म बनाने के बाद बैरी जेनकिंस ‘मुफासा’ में एक नया नजरिया दिखा रहे हैं। बैरी ने मुफासा की साधारण कहानी को प्यार, धोखे और विरासत की कहानी में बदल दिया है। इस तरह से फिल्म में एक नया आयाम जुड़ा है, जो दर्शकों को काफी पसंद आएगा। इन दिनों भारत में फिल्म ‘मुफासा : द लायन किंग’ की कहानी की तुलना फिल्म ‘बाहुबली’ से भी की जा रही है।
शाहरुख खान की आवाज का जादू
बैरी जेनकिंस ने एक इंटरव्यू में बताया कि मुफासा: द लायन किंग में दिवंगत जेम्स अर्ल जोन्स (साल की शुरुआत में 93 साल की उम्र में निधन) की आवाज शुरुआत में सुनाई देगी, यह उनको एक श्रद्धांजलि है। साल 1994 में रिलीज हुई मुफासा में उन्होंने ही अपनी आवाज दी थी। फिल्म मुफासा के किरदारों को हमेशा से नामी कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। जल्द रिलीज होने वाली फिल्म ‘मुफासा : द लायन किंग’ में भी नामी हॉलीवुड कलाकारों की आवाज सुनाई देगी। वहीं हिंदी वर्जन में बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान ने मुफासा को आवाज दी है। साथ ही उनके बेटे आर्यन और अबराम ने भी, सिम्बा और यंग मुफासा को अपनी आवाज दी है। वहीं संजय मिश्रा ने पुंबा और श्रेयस तलपड़े ने टिमोन के किरदारों को अपनी आवाज दी है। तेलुगू में महेश बाबू ने मुफासा के किरदार को आवाज दी है।
मन को छू लेने वाला संगीत
फिल्म ‘द लायन किंग’ का म्यूजिक यानी संगीत हमेशा से ही फिल्म की जान रहा है। फिल्म ‘मुफासा द लायन किंग’ में लिन-मैनुअल मिरांडा ने इस बात का पूरा ख्याल रखा है। साथ ही फिल्म का साउंड ट्रैक अफ्रीकी थीम से इंस्पायर है, जो कि लेबो एम. का है। यह सॉन्ग थीम इस फ्रैंचाइज की पहचान बन चुकी है।