सिनेमा के दो कलाकारों की एक अनोखी प्रेम कहानी आपने शायद नहीं ही सुनी होगी। ये प्रेम कहानी है अभिनेता गुलशन देवैया और उनकी पत्नी कलीरॉय जियाफेटा की। दोनों दशक भर पहले मिले, तलाकशुदा हुए और अब फिर एक हो गए हैं। कलीरॉय जियाफेटा इस हफ्ते रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘बरोज’ की हीरोइन हैं। फिल्म हिंदी में भी डब होकर रिलीज हो रही है। उनसे चटपटी चार बातें।
Kallirroi Tziafeta: फिल्म ‘बरोज’ के लिए मिल रही तारीफ से दमकीं काली, परिवार संग क्रिसमस मनाने ग्रीस पहुंची
मलयालम फिल्म ‘बरोज’ की हीरोइन कलीरॉय जियाफेटा से हुई कुछ दिलचस्प बातें..
आपकी पैकिंग देखकर लग रहा है कि आप लंबी छुट्टियों पर जाने वाली हैं?
‘ओमर्टा’, ‘बार्ड ऑफ ब्लड’ और ‘द एम्पायर’ में काम करने के साथ साथ मैंने हिंदुस्तान के बारे में काफी कुछ जाना है। लेकिन, मेरी अपनी जन्मभूमि (एथेंस, ग्रीस) मुझे क्रिसमस और नया साल मनाने के लिए बुलाती रहती है और मैं वहीं जा भी रही हूं लेकिन मुझे अपनी कर्मभूमि मुंबई से भी बेहद प्यार है। मेरा परिवार दुनिया के तमाम अलग अलग देशों में हैं और हम सब क्रिसमस पर ही एक साथ एक जगह इकट्ठा होते हैं।
लोग तो आपको बहुत मिस करेंगे आपकी नई फिल्म ‘बरोज’ देखकर?
मेरी इस हफ्ते रिलीज हुई फिल्म ‘बरोज’ का निर्देशन मलयालम सिनेमा के महान अभिनेता मोहनलाल ने किया है। उनके साथ एक ही जगह पर खड़े होना ही अलग अनुभव है और फिर उनके निर्देशन में फिल्म करने की अनुभूति जैसी रही है, मैं बता नहीं सकती। फिल्म चूंकि एक फंतासी फिल्म है लिहाजा इसकी शूटिंग के दौरान हमें काल्पनिक किरदारों को अपने सामने होने की कल्पना करके ही अभिनय करना पड़ा।
क्या है फिल्म ‘बरोज’ में आपका किरदार और कितना अच्छा लगा इसे निभाकर?
मेरे किरदार का नाम इस फिल्म में टेरेसा डि गामा है। मुझे अक्सर एक पूरी तरह से भले इंसान का किरदार करने के मौके कम ही मिले हैं। देखा जाए तो विदेशी कलाकारों के लिए विविधता लिए हुए किरदार लिखे भी भारतीय सिनेमा में कम ही जाते हैं। तो फिल्म ‘बरोज’ का ये किरदार एक ताजी हवा के झोंके जैसा आया और मैंने इसे तुरंत लपक लिया।
कॉस्ट्यूम्स यानी परिधान एक ऐसी चीज है, जिससे हर लड़की को प्यार होता ही है। बचपन में हमारे माता-पिता हमें बार्बी डॉल जैसा सजाते हैं, फिर बड़े होकर हम खुद किसी की प्रिंसेज होने का ख्वाब संजोते हैं। इस बार मुझे बड़े परदे पर ऐसा ही कुछ करने का मौका मिला और सजना, संवरना किस युवती को अच्छा नहीं लगता, खासकर त्यौहारी मौसम में।