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Ajeeb Daastaans Review: बासी रोटी का करण की टीम ने फिर बनाया बेस्वाद चिल्ला, 75 फीसदी टाइम वेस्ट

Fri, 16 Apr 2021 07:17 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 16 Apr 2021 07:17 PM IST
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Ajeeb Daastaans Review by Pankaj Shukla Dharmatic Karan Johar Netflix India Jaideep Aditi Shefali
अजीब दास्तान्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review: अजीब दास्तान्स

निर्देशक: शशांक खेतान, राज मेहता, नीरज घेवन और कायोजे ईरानी
कलाकार: जयदीप अहलावत, अभिषेक बनर्जी, मानव कौल, फातिमा सना शेख, नुसरत भरुचा, कोंकणा सेन शर्मा, अदिति राव हैदरी और शेफाली शाह
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: *1/2



शुक्रवार को हिंदी फिल्म जगत की सबसे बड़ी खबर रही अभिनेता कार्तिक आर्यन का करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्म ‘दोस्ताना 2’ से बाहर होना। कारण बताया गया कार्तिक का गैरजिम्मेदाराना रवैया। बताते हैं कि उन्हें फिल्म की समलैंगिक थीम से अब दिक्कत होने लगी थी। करण की कंपनी का अपना एक एजेंडा है। उनके निर्देशक उनकी जैसी ही कहानियां ढूंढ भी लाते हैं। ‘मसान’ बनाने वाले नीरज घेवन को धर्मा में बने रहने के लिए वही करना पड़ रहा है जो शशांक खेतान कर रहे हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई नई फिल्मावली ‘अजीब दास्तान्स’ इतनी बोरिंग है कि ये ‘घोस्ट स्टोरीज’ को भी पीछे छोड़ सकती है। पता नहीं इतने दिग्गज निर्देशक सिर्फ करण जौहर का नेटफ्लिक्स से हुए करार में कंटेंट भरने के लिए ये सब कर रहे हैं या फिर धर्मा में भी टी सीरीज जैसा कोई नया फॉर्मूला चल निकला है कि एक फिल्म के साथ एक शॉर्ट फिल्म फ्री।
 
Ajeeb Daastaans Review by Pankaj Shukla Dharmatic Karan Johar Netflix India Jaideep Aditi Shefali
अजीब दास्तान्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शशांक खेतान से इस फिल्मावली के नामकरण के बारे में जब पूछा गया कि  ‘दास्तान्स’ क्यों? तो उनका कहना था कि थोड़ा ‘कैची’ लगता है। अब आप समझ ही गए होंगे कि जब किसी फिल्मावली का शीर्षक रखने का तर्क ये है तो फिर फिल्म की कहानियों का क्या होगा। ये फिल्में देखकर समझ आता है कि ये सब बासी और इधर उधर पड़े माल की रीपैकेजिंग हैं। रात को बची रह गई रोटी को सुबह बेसन में लपेटकर बने चिल्ले जैसी हैं ये कहानियां। ढंग से चिल्ला बने तो उसमें भी स्वाद होता है। लेकिन यहां तो न स्वाद है और न बनाने का सलीका। कम से कम शुरू की तीन फिल्में तो हैं ही, बहुत ही बोरिंग। आखिर में कायोजे ईरानी की कहानी को शेफाली शाह और मानव कौल ने अच्छा संभाला है।

Ajeeb Daastaans Review by Pankaj Shukla Dharmatic Karan Johar Netflix India Jaideep Aditi Shefali
अजीब दास्तान्स - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्मावली की पहली कहानी में जयदीप अहलावत और फातिमा सना शेख हैं। फिल्म तब की है जब ‘पाताल लोक’ का नाम भी जयदीप ने नहीं सुना था। लेकिन अब हाथीराम चौधरी का किरदार कर चुके अभिनेता को ऐसे दोयम दर्जे के किरदार में देखना ही अजीब दास्तान है। खूबसूरत बीवी पर नजर डालने वाले के गुप्तांग वह आंच पर भूनने का दम तो रखता है लेकिन उसका पौरुष स्त्रैण्य गुणों में सुख पाता है। उसकी ये आदत ही उस पर तब भारी पड़ती है जब घर के ड्राइवर का बेटा मियां को चूना लगाता है और बीवी को बेटा दे जाता है। दम चाहिए इतनी सस्ती सी कहानी पर बनी इतनी धीमी और बोरिंग फिल्म देखने के लिए।

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Ajeeb Daastaans Review by Pankaj Shukla Dharmatic Karan Johar Netflix India Jaideep Aditi Shefali
अजीब दास्तान्स - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्मावलियों की खासियत ये भी होती है कि ये लगातार उम्मीदें बंधाती रहती है कि शायद अब मामला सेट हो जाए। दूसरी कहानी खिलौना थोड़ा और आगे निकलती है। अभिषेक बनर्जी और नुसरत भरुचा को ये फिल्म कठपुतली की तरह नचाती है। दोनों को दम भी नहीं मिलता कि किरदारों के कलेवर वे ठीक से सजा पाएं। दोनों ऐसे अभिनय करते दिखते हैं कि बोरीवली की लास्ट लोकल पकड़नी है। यहां भी वही सब कुछ है। गालियां हैं, सेक्स है, कुकर में पकता बच्चा है और जो भी कुछ वीभत्स हो सकता था, वह सब है इसमें। जिगरा मजबूत चाहिए ऐसी मनोहर कहानियां टाइप फिल्म देखने के लिए।

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Ajeeb Daastaans Review by Pankaj Shukla Dharmatic Karan Johar Netflix India Jaideep Aditi Shefali
अजीब दास्तान्स - फोटो : सोशल मीडिया

तीसरी फिल्म और माशाअल्ला है। नीरज घेवन भी अपने गुरु अनुराग कश्यप की राह पर हैं। शर्मा नाम की लड़की से वह मंडल सरनेम वाली लड़की को जिस चम्मच से पुलाव खिलाते हैं, वह चम्मच मिसेज शर्मा फिर अपने मुंह में धर लेती है। कोरोना जैसे संक्रमण काल में ऐसे दृश्यों से वह क्या कहना चाहते हैं, वह ही जानें। अगले पिछड़े के रिश्तों का सिनेमा नीरज घेवन का प्रिय विषय हो सकता है लेकिन उन्हें अपने दर्शकों को क्या प्रिय लगेगा, सीखना बाकी है। कोंकणा सेनशर्मा यहां बेरंग हो चुकी चादर सी फैली हैं जिसे खूबसूरत गुड़िया सी दिखतीं अदिति राव हैदरी के किरदार को ओढ़ना है। नीरज घेवन से एक उम्दा फिल्म की उम्मीद लोग कब से लगाए बैठे हैं लेकिन वह दोयम दर्जे की कहानी पर फिल्म बनाकर और उनकी झूठी तारीफें करवाकर ही खुश हो जा रहे हैं। नीरज में माद्दा है अच्छा सिनेमा बनाने का लेकिन उसके लिए उन्हें अपने गुरु अनुराग कश्यप की तरह फैनब्वॉयज के झुंड से बाहर आना होगा।

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