अपनी धुन के पक्के गायक रहे एस पी बालासुब्रमण्यम को कोरोना ने असमय ही बीते साल हमसे छीन न लिया होता तो वह चार जून को अपना 75वीं सालगिरह मना रहे होते। आज उनकी याद आई हिंदी सिनेमा को उनकी बिल्कुल अलग सी आवाज से परिचित कराने वाली फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ की 40वीं सालगिरह को लेकर। अमेरिका में थे एसपी जब उनके पास फोन पहुंचा कि वापसी की फ्लाइट उन्हें वाया बंबई बुक करानी है। एसपी आए। निर्देशक के बालाचंदर उन्हें लेकर संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के पास पहुंचे और उनका उच्चारण देखकर एलपी ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया।
Bioscope S2: ‘एक दूजे के लिए’ ने पूरे किए 40 साल, राज कपूर की मानते तो इतनी बड़ी हिट नहीं होती फिल्म
गुरु चेले की कालजयी जोड़ी
फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ में एसपी बालासुब्रमण्यम की एंट्री का किस्सा जितना रोचक है, उतनी ही मोहक रही इसकी बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की कहानी। तमिल सिनेमा के मशहूर निर्देशक के बालाचंदर ने साल 1973 में एक नए हीरो कमल हासन को अपनी फिल्म ‘अरंगेत्रम’ में लॉन्च किया। बचपन से लेकर जवानी तक कमल हासन ने फिल्मों में खूब काम किया लेकिन हीरो वह इसी फिल्म से बने। तमिल में खूब नाम चमका तो पड़ोस में तेलुगू फिल्में बनाने वाले कमल हासन के चक्कर लगाने लगे। रोज उनके पास लोग पहुंच जाते किसी न किसी नई कहानी का प्रस्ताव लेकर। और, कमल हासन ने भी एक दिन सबको बोल ही दिया, मेरी तेलुगू फिल्म बनेगी तो सिर्फ के बालाचंदर के साथ। कमल हासन ने बोल तो दिया लेकिन के बालाचंदर से पूछ के थोड़े ही बोला था।
कमल हासन की पहली तेलुगू फिल्म की रीमेक
के बालाचंदर ने इसी के बाद कहानी तैयार की। एक तमिल लड़का और एक तेलुगू लड़की। दोनों की प्रेम कहानी। फिल्म का नाम ‘मारो चरित्रा’ यानी एक और इतिहास। हीरो कमल हासन, हीरोइन एक स्कूल में पढ़ने वाली गुमनाम सी लड़की अभिलाषा। उसका नाम रखा गया सरिता। फिल्म में तेलुगू की ही उभरती स्टार माधवी को भी लिया गया। बालाचंदर ने एक कमाल और किया। पूरी फिल्म उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट में शूट कर डाली, ये दिखाने के लिए कहानी अच्छी हो तो उसके एहसासों के रंग के आगे दुनिया के सारे रंग फीके हैं। फिल्म सुपर हिट रही। कमल हासन तमिल और मलयालम के सुपरस्टार थे ही अब वह तेलुगू के भी हिट हीरो बन गए। पूरी फिल्म तेलुगू में और वह बोलते रहे तमिल। कमल हासन की इस डेब्यू तेलुगू फिल्म की ही रीमेक बनी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के रूप में।
जब राज कपूर ने डरा दिया
मशहूर फिल्म निर्माता एल वी प्रसाद ने ‘मारो चरित्रा’ के रीमेक राइट्स खरीदे और ओरीजनल के ही निर्देशक के बालाचंदर के हवाले ये हिंदी फिल्म भी कर दी। एल वी प्रसाद को फिल्म के प्रीमियर तक लोगों ने तमाम तरह की सलाहें दीं। निर्देशक के बालाचंदर के पास तो तब उनके असिस्टेंट रहे निर्देशक सुरेश कृष्णा ने आधी रात को फोन लगा दिया था। वजह ये थी कि फिल्म का मुंबई में प्रीमियर होने के बाद होटल में पार्टी रखी गई। वहां कमल हासन के दोनों हाथ राजकपूर ने चूम लिए थे। लेकिन थोड़ी ही देर बाद वह निर्देशक को तलाश करने लगे। पता चला कि निर्देशक तो नहीं है लेकिन सुरेश कृष्णा को लेकर लोग राज कपूर के पास पहुंच गए। राज कपूर का मानना था कि फिल्म का क्लाइमेक्स सुखांत होना चाहिए। के बालाचंदर को ये बात पता चली तो उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद जो टीस राज कपूर के मन को परेशान किए हुए है, वही टीस जब दर्शकों के मन में भी उठेगी तो फिल्म सुपरहिट होगी। हुआ भी यहीं, गिनती के प्रिंट्स के साथ रिलीज हुई फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ रविवार से ही रफ्तार पकड़ने लगी। और अगला शुक्रवार आते आते फिल्म के पांच गुना प्रिंट और सिनेमाघरों तक पहुंच चुके थे। फिल्म दो दो साल तक सिनेमाघरों में लग रही। वासू और सपना का नाम लैला मजनू, शीरीं फरहाद और हीरा रांझा की कहानियों की तरह युवाओं के किस्सों में तैरने लगा।
कहानी उत्तर और दक्षिण के प्यार की
फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ कहानी थी एक उत्तर भारतीय परिवार की लड़की सपना और एक तमिल लड़के वासू की। दोनों के परिवार गोवा में पड़ोसी हैं। दोनों का प्यार घरवालों को पता चलता है तो तूफान आ जाता है। मोबाइल और इंटरनेट टाइप की चीज तब दुनिया में आई नहीं थी तो घर वालों ने शर्त ये रखी कि अगर दोनों पूरा एक साल बिना एक दूसरे से किसी भी तरह का संपर्क किए बिता लेंगे तभी दोनों की शादी हो सकेगी। वासू हैदराबाद चला जाता है। रोज सपना को एक खत लिखता है लेकिन पोस्ट नहीं करता। एक विधवा युवती संध्या से हिंदी भी सीखने की कोशिश करता है। संध्या उसे भरतनाट्यम भी सिखाती है। फिर वासू और सपना में गलतफहमियां होती हैं। वासू की संध्या से शादी तय होती है। सपना को पता ही नहीं होता कि उसकी तरफ के लोगों ने क्या गुल खिला दिया है। वासू और सपना के चटकीले प्रेम पर हालात के काले बादल घिर आते हैं और जब तक आसमान साफ हो बहुत देर हो चुकी होती है।