बड़े परदे पर डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती के तेजी से बढ़ते करियर को जिस स्पीड ब्रेकर ने पहला झटका दिया, उसका नाम है गोविंदा। ‘विरार का छोकरा’ के नाम से मशहूर हुए गोविंदा आहूजा ने अपने करियर के पहले ही साल में लव 86 और इल्जाम जैसी दो सुपर हिट फिल्में देकर डांसिंग स्टार बनने की तरह अपने कदम मजबूती से बढ़ा दिए। मिथुन को भी इस बात का एहसास अपनी फिल्म डांस डांस के फ्लॉप हो जाने से हुआ और एक तय रणनीति के हिसाब से उन्होंने प्रेम प्रतिज्ञा जैसी फिल्में करनी शुरू कर दी थीं।
बाइस्कोप: गोविंदा का इस फिल्म ने बचा लिया था करियर, लाइन से फ्लॉप होती फिल्मों के बीच दिया जीवनदान
कम लोग ही जानते हैं कि गोविंदा के माता-पिता दोनों फिल्मों में काम किया करते थे लेकिन ये काम वैसा ही था जैसा हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचने वाले लाखों लोग करते हैं। वो सिनेमा में काम तो करते हैं लेकिन दोस्तों को भी बता नहीं पाते कि काम क्या करते हैं। गोविंदा ने इससे आगे जाने की ठानी। महीनों तक वह फिल्मों में काम पाने के लिए विरार से अंधेरी और जुहू रोज आते जाते। लेकिन जल्दी ही समझ आ गया कि जब सफर में ही रोज चार घंटे लग जाएंगे तो बाकी काम करना मुश्किल ही नहीं बहुत मुश्किल है। तो गोविंदा ने एक दिन उठाया अपना झोला और आ पहुंचे खार में रहने वाले अपने मामा आनंद सिंह के पास। आनंद सिंह फिल्म इंडस्ट्री में बरसों से जमे थे। उनके उस्ताद थे मशहूर निर्देशक ऋषिकेष मुखर्जी। गोविंदा की अपनी होने वाली पत्नी सुनीता मुंजाल से भी यहीं मुलाकात हुई। आनंद सिंह की पत्नी की छोटी बहन हैं सुनीता।
गोविंदा को अपनी एक फिल्म के लिए विमल कुमार ने तब साइन किया जब उनकी पहली फिल्म लव 86 बस रिलीज ही हुई थी। लेकिन लव 86 गोविंदा को मिली पहली फिल्म नहीं है। गोविंदा को पहली बार हीरो के किरदार में उनके मामा ने ही साइन किया था और वह फिल्म थी तन बदन। और, इस फिल्म का साइनिंग अमाउंट गोविंदा को मिला था एक चांटा। ये पूरा किस्सा फिर कभी। फिलहाल अभी लौटते हैं आज के बाइस्कोप की फिल्म जैसी करनी वैसी भरनी पर। फिल्म के निर्माता निर्देशक विमल कुमार ने गोविंदा को इस फिल्म से पहले फिल्म दरिया दिल के लिए तब साइन कर लिया था, जब वह स्टार बने भी नहीं थे।
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विमल कुमार को फिल्म इंडस्ट्री का लंबा अनुभव रहा है। वह मशहूर निर्माता निर्देशक जे ओम प्रकाश के लंबे समय तक असिस्टेंट रहे। राकेश रोशन से भी उनकी रिश्तेदारी है। और, राकेश रोशन की मदद से ही वह फिल्म निर्माता भी बने। फिल्म इंडस्ट्री में राकेश रोशन औऱ जितेंद्र की दोस्ती बहुत मशहूर है। दोनों आज भी शनिवार को जुहू के शनि मंदिर में साथ साथ दिख ही जाते हैं। लेकिन राकेश रोशन की मदद से पहले विमल कुमार ने मदद ली सुपरस्टार राजेश खन्ना की जिन्हें वह जे ओम प्रकाश की फिल्म आपकी कसम और आक्रमण के समय से जानते थे। विमल कुमार ने बतौर निर्माता अपनी पहली फिल्म राजेश खन्ना के साथ ही बनाई, अगर तुम ना होते।
विमल कुमार ने बतौर निर्माता फिल्म अगर तुम ना होते से खूब कमाई की। दूसरी फिल्म के लिए उन्होंने राकेश रोशन की मदद ली और जीतेंद्र व श्रीदेवी के साथ फिल्म बनाई, घर संसार। घर संसार की मेकिंग के दौरान विमल कुमार और कादर खान दोस्त बने। कादर खान के संवाद लेखन के विमल कुमार मुरीद हो गए और कादर खान को विमल कुमार की बेबाकी पसंद आ गई। दोनों ने मिलकर खूब लंबे समय तक साथ काम किया। जैसी करनी वैसी भरनी ने एक तरह से गोविंदा का डगमगाता करियर बचाया था। साल 1989 गोविंदा के लिए काफी खतरनाक साल साबित हो रहा था कि तभी इस फिल्म ने आकर उनकी पहचान गली में भटकते रोमियों से बदलकर घर परिवार वाले इंसान की कर दी।
फिल्म जैसी करनी वैसी भरनी की कहानी है तीन पीढ़ियों की। गंगाराम वर्मा आदर्शवादी सरकारी नौकर है और रिश्वत के सख्त खिलाफ है। पुश्तैनी मकान में वह अपनी पत्नी और बेटे विजय के साथ रहता है। विजय की आदतें बिल्कुल अलग हैं। शहर के बिल्डर की नजर गंगाराम की हवेली पर है। वह अपनी बेटी सपना की शादी विजय से करता है और उनके बेटे की देखभाल के लिए गंगाराम और उसकी पत्नी को अपने घर ले आता है। एक बार बंगले की जगह बिल्डिंग बनते ही गंगाराम और उसकी पत्नी मुश्किल में आ जाते हैं। कहानी कई साल आगे जाती है। विजय और सपना का बेटा रवि बड़ा हो चुका है। उसे समझ आने लगता है कि उसके माता पिता ने उसके दादा दादी के साथ क्या किया है। इसके बाद शुरू होता है रवि और उसकी प्रेमी राधा का असली खेल यानी जैसी करनी वैसी भरनी।
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किमी काटकर इससे पहले भी गोविंदा के साथ फिल्म मेरा लहू, शिव शक्ति और दरिया दिल में काम कर चुकी थीं। दरिया दिल ही वो पहली हिंदी फिल्म है जिसमें सुपरमैन और स्पाइडरमैन की कॉस्ट्यूम का इसके लीड कलाकारों ने इस्तेमाल किया। जैसी करनी वैसी भरनी में भी किमी काटकर और गोविंदा की जोड़ी खूब जमी। लेकिन, दोनों ने जो ड्रामे रवि वर्मा के माता पिता को लाइन पर लाने के लिए किए, उस पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। फिल्म में कादर खान और शक्ति कपूर के अलावा गुलशन ग्रोवर, दिनेश हिंगू, राजेश पुरी, युनूस परवेज, गुड्डी मारूती और पेंटल जैसे कलाकारो की पूरी फौज है।
गोविंदा के बचपन का किरदार इस फिल्म में नील नितिन मुकेश ने किया है। फिल्म में उनके पिता नितिन मुकेश का गाया गाना कालजयी गीत है, जो बोएगा वही पाएगा, तेरा किया आगे आएगा, सुख दुख है क्या फल कर्मों का, जैसी करनी वैसी भरनी..। ये गीत फिल्म में दो बार आता है एक बार इसे नील नितिन मुकेश पर ही फिल्माया गया औऱ दूसरी बार गोविंदा पर..
फिल्म जैसी करनी वैसी भरनी के गीत लिखे थे इंदीवर ने और संगीत दिया था राजेश रोशन ने। राजेश रोशन ने ही इस फिल्म में गायक कुमार शानू को मौका दिया जिन्होंने इसके अगले साल फिल्म आशिकी के गाने गाकर म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. इस फिल्म से और इसके म्यूजिक से निर्माता निर्देशक विमल कुमार ने खूब कमाई की। और, इसके दो साल बाद उन्होंने गोविंदा और जूही चावला को लेकर एक फिल्म बनाई कर्ज चुकाना है। ये फिल्म एक ऐसे बेटे के बारे में है जिसमें वह अपने नाकारा बाप की ख्वाहिशें पूरी करने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर देता है।
विमल कुमार ने हिंदी सिनेमा में कई साल तक धूम मचाई लेकिन फिर किस्मत ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। फिल्म कहो ना प्यार है के रशेज देखने के बाद विमल कुमार ने अमीषा पटेल को भी अपनी एक फिल्म के लिए साइन कर लिया था। ये फिल्म थी, सुनो ससुर जी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 3 जून को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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