संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने अपनी काबिलियत का अंदाजा दिलाने के लिए हिंदी सिनेमा के कुछ बेहतरीन गाने बनाए हैं। उनमें से एक गाना है आठ साल पहले आज ही के दिन रिलीज हुई फिल्म राउठी राठौर का गाना, चिंता ता चिता चिता, चिंता ता ता ता..। गाना गाया भी वाजिद ने मीका सिंह के साथ मिलकर और ये गाना फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली और रॉनी स्क्रूवाला को इतना पसंद आया कि इसे उन्होंने हिंदी सिनेमा की अनोखी झांकी ही बना दिया। प्रभु देवा खुद तो इसमें नाचे ही, अपने साथ वह साउथ के सुपरस्टार विजय को भी ले आए और करीना कपूर का तो इस गाने में कहना ही क्या। वाजिद खान का ये गाना बरसों बरस याद दिलाता रहेगा और इसी गाने को याद करते हुए शुरू करते हैं आज का बाइस्कोप, जो है आज ही के दिन 2012 में रिलीज हुई फिल्म राउडी राठौर पर।
बाइस्कोप: आज ही रिलीज हुई थी अक्षय की 'राउडी राठौर', वाजिद खान ने मीका संग गाया था ये हिट गाना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आपसे पूछा जाए कि एस एस राजामौली का नाम आपने बाहुबली फिल्म देखने से पहले कब सुना था तो शायद आप बता न पाएं। हिंदी में डब होकर रिलीज हुईं बाहुबली सीरीज की दोनों फिल्मों ने इनके निर्देशक राजामौली और ये फिल्में लिखने वाले उनके पिता के विजयेंद्र प्रसाद का नाम देश दुनिया में मशहूर कर दिया। राजामौली ने बतौर निर्देशक अब तक 11 फिल्में बनाई हैं। इनमें से दो को छोड़कर बाकी सब फिल्मों में उनके पिता के विजयेंद्र प्रसाद फिल्म की राइटिंग टीम से जुड़े रहे। के विजयेंद्र प्रसाद और राजामौली की जोड़ी का ही कमाल थी 2006 में रिलीज हुई फिल्म विक्रमारकुडु। इस सुपरहिट फिल्म के हिंदी रीमेक राइट्स संजय लीला भंसाली ने खरीदे और अपने प्रोडक्शन हाउस के लिए अक्षय कुमार को लेकर इस कहानी पर उन्होंने बनाई हिंदी फिल्म राउडी राठौर। फिल्म का निर्देशन प्रभुदेवा ने किया। सलमान खान के साथ 2009 में सुपरहिट फिल्म वांटेड बना चुके प्रभुदेवा के लिए उनके फिल्म निर्देशन करियर का ये बड़ा धमाका था।
राउठी राठौर उन लोगों को ज्यादा अच्छी नहीं लगी जो हिंदी सिनेमा में सुभाष घई की बनाई धमाकेदार फिल्म कालीचरण देख चुके थे लेकिन उन लोगों को ये फिल्म खूब भाई जिनको सलमान खान की दबंग बहुत पसंद आई थी। हिंदी सिनेमा में दबंग और उसके बाद बनी तमाम फिल्मों ने दक्षिण भारत के एक्शन स्टाइल को कॉपी करना शुरू किया और एक ऐसे छद्म सिनेमा का आवरण तैयार करना शुरू किया जिसमें शोर शराबे और धूम धड़ाके के बीच दर्शक इतना सन्न गन्न रहने लगा कि न उसका ध्यान कहानी पर जाता है और न ही कलाकारों के अभिनय पर। संजय लीला भंसाली को इसका दोष भी नहीं दिया जा सकता क्योंकि उन्होंने जब गुजारिश जैसी बेहतरीन फिल्म बनाई तो लोग सिनेमाघर तक गए ही नहीं। भंसाली का ये एक तरह से दर्शकों से बदला था कि अब वह वही बनाएंगे जो बाजार को भाता है। उन्होंने गब्बर इज बैक भी बनाई और शुक्र है कि जल्दी संभल गए। अब लोग उनकी गंगूबाई काठियावाड़ी और उसके बाद बैजू बावरा की राह तक रहे हैं। राउडी राठौर 2 बनाने की भी सुगबुगाहट पिछले साल शुरू हुई थी लेकिन फिलहाल इस पर और कोई अपडेट अब तक नहीं है।
राउठी राठौर कहानी शिवा और चिंकी की कहानी है। चिंकी को शिवा के साथ देख पारो समझती है कि उससे झूठ बोला गया लेकिन असल में शिवा को भी नहीं पता कि चिंकी कौन है और उसके पास की फोटो का राज क्या है और उस फोटो में उसके जैसा दिखने वाला शख्स कौन है। बदमाशों की पूरी एक सेना शिवा के पीछे लगी है लेकिन शिवा को कोई नुकसान पहुंचे उससे पहले ही वहां पहुंचता है एसीपी राठौर। दोनों की शक्ल एक है। वर्तमान में शिवा को राठौर का भूतकाल पता चलता है, और राठौर चिंकी का भविष्य उसके हाथों में सौंप दम तोड़ देता है। अब शिवा ही एसीपी राठौर है। उसे ही वापस राठौर की तैनाती वाले इलाके जाकर पारो और चिंकी दोनों को वापस लाना है।
फिल्म राउठी राठौर कमाई के मामले में सुपर डुपर हिट रही लेकिन सिनेमा के मामले में इसने प्रभुदेवा को इतना कुछ उल्टा सीधा सिखा दिया कि वह उसे ही दर्शकों की असली पसंद मान बैठे। नतीजा? प्रभुदेवा ने खुद को नए जमाने का मनमोहन देसाई या प्रकाश मेहरा समझ लिया और बनाने लगे फिल्में, रमइया वस्तावइया, आर..राजकुमार, एक्शन जैक्सन और सिंह इज ब्लिंग। इन चारों फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर जो भी हुआ, वो आपको पता ही है। पिछले साल प्रभुदेवा फिर लौटकर वहीं पहुंचे जहां से उन्होंने इकन्ना एक पढ़ना शुरू किया था यानी सलमान खान के पास। फिल्म दबंग 3 में प्रभुदेवा फिर लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे, अब उनका अगला इम्तिहान राधे-योर मोस्ट वांटेड भाई में होना है।