हिंदी सिनेमा का ऐसा महामुकाबला सिनेमाघरों में भी हुए जमाना बीत गया जैसा इस बार ओटीटी पर हुआ है। एक के बाद एक दनादन चार फिल्में सीधे दर्शकों के घरों तक पहुंच गई, मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी के सहारे। कोई ओपनिंग का कलेक्शन किसी के पास नहीं है और न ही ये गिनती करने का कोई सार्वजनिक तरीका कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा लोगों ने देखी। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इस हफ्ते कौन सी फिल्म आपके लिए हैं नंबर वन और कौन सी फिल्म है इसकी मेकिंग के हिसाब से सबसे आखिरी पायदान पर।
BoxOffice@Home: इस हफ्ते विद्युत की फिल्म 'यारा' रही नंबर वन, बाकी फिल्मों को मिले इतने स्टार
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खूब जमी जब मिल बैठे दीवाने चार
स्याह रातों की धुंधली सुबहों के सुलगते उजालों की कहानी कहती ‘यारा’ में विद्युत जामवाल नायक बनकर उभर पाते हैं तो इसलिए कि उनके साथी कलाकारों में विजय वर्मा का दीवार का अमिताभ बच्चन बनने का स्वांग, अमित साध का उसका दाहिना हाथ बने रहने का राग और केनी की मटरगश्तियां तस्वीर के बाकी रंग सलीके से भरते रहते हैं। चारों कलाकारों ने उम्र के दो अलग अलग पड़ावों में अपना अभिनय हकीकत के करीब रखने की पूरी कोशिश की है। वजन बढ़ाकर देह रूपांतरण करने के मामले में यहां अमित साध ने बाजी मारी है और एक्शन के मामले में विद्युत जामवाल ने। विजय वर्मा का तालाब के किनारे दोस्त की गोली खाने के बाद का गुस्सा अच्छा बन पड़ा है। ट्रक में साड़ी पहने श्रुति हसन बिल्कुल ‘गीत गाता चल’ की सारिका नजर आती हैं।
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कॉमेडी का कमाल का डोज
फिल्म ‘लूटकेस’ की कहानी इसके नवोदित निर्देशक राजेश कृष्णन ने कपिल सावंत के साथ मिलकर लिखी है। फिल्म में उत्तर भारत की संवेदनाएं समझ सकने वाले एक टीम मेंबर की कमी साफ दिखती है। कहानी फिल्म की लाइन भर की इतनी सी है कि दौलत उतनी ही अच्छी है जितनी आप खर्च कर सको। अथाह दौलत मिल जाना भी कितनी बड़ी मुसीबत है, ये यहां देखने को मिलता है। स्कूल से दूसरे की रबर ले आने पर मां की डांट खाने वाले बच्चे का बाप घर में ब्रीफकेस भर के नोट ले आता है। एक तरफ उसकी समस्या है इस दौलत को खपाने की दूसरी तरफ डर है सारा मामला बीवी के सामने खुल जाने की। कोरोना काल में सबके घरों में बन रही चाय की तरह यहां इसमें दालचीनी, तुलसी की पत्ती और काली मिर्च बनकर आते हैं, गजराज राव, रणवीर शौरी और विजय राज।
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गणित के सवाल सारे हल, जिंदगी के बाकी
तमाम लोगों ने ये फिल्म इसलिए देखी कि जरा समझा जाए आखिर शकुंतला देवी ये सब करती कैसे थीं? या फिर कि उनके पिता इतने लालची क्यों थे कि एक बेटी की कमाई का पैसा इकट्ठा करने के चक्कर में दूसरी बेटी का इलाज ही नहीं कराया? समझना ये भी जरूरी था कि आखिर किसने शकुंतला देवी को इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया होगा और आखिर ऐसा क्या था कि शकुंतला ने अपने ही पति को समलैंगिक बताकर किताब लिख डाली? शकुंतला के तिलिस्म में बसे ऐसे सवाल तमाम हैं, लेकिन फिल्म शकुंतला देवी इन सारे सवालों से बचकर निकल जाती हैं।
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अकेले राधिका के कंधे पर टिकी फिल्म
इस हफ्ते एक्टर तिगमांशू धूलिया का डायरेक्टर तिगमांशू धूलिया से मुकाबला भी है। डायरेक्टर तिगमांशू की फिल्म यारा का रिव्यू आप पढ़ चुके हैं। अब बारी एक्टर तिगमांशू धूलिया की है। तिगमांशू ने एनएसडी में एक्टिंग ही सीखी। बैंडिट क्वीन के वह ऑफिशियल कास्टिंग डायरेक्टर थे और बाद में कमाल के डायरेक्टर बने। इस महीने मुकेश छाबड़ा के बाद कास्टिंग डायरेक्टर से फिल्म डायरेक्टर बनने वाले दूसरे तकनीशियन हैं, हनी त्रेहन। उनकी डेब्यू फिल्म रात अकेली है, आपको बांधने की कोशिश पूरी करती है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी एक नंबर है, राधिका आप्टे, पद्मावती राव, श्वेता त्रिपाठी, शिवानी रघुवंशी, रिया शुक्ला और इला अरुण की अदाकारी ने फिल्म को दूसरे नंबर पर सपोर्ट किया है, बाकी सब इसके बाद है।
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