19 अगस्त 1994 की तारीख हिंदी सिनेमा की यात्रा में मील का पत्थर जैसी है। इस दिन रिलीज हुई सलमान खान और श्रीदेवी की फिल्म 'चांद का टुकड़ा' सुपरफ्लॉप फिल्म रही। और, इसी दिन रिलीज हुई मिथुन चक्रवर्ती, अतुल अग्निहोत्री और पूजा भट्ट की फिल्म 'नाराज' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत के हिसाब से शानदार कारोबार किया। ये उन दिनों की बात है जब अतुल अग्निहोत्री अक्सर सलमान खान की बहन अलवीरा के साथ बांद्रा में दिख जाते थे और दोनों का रिश्ता परवान चढ़ रहा था। अतुल और अलवीरा ने 1996 में शादी की और अब दोनों के अयान व अलीजेह नाम के दो बच्चे भी हैं। सलमान खान और मिथुन चक्रवर्ती के रिश्ते भी बहुत ही भावुक रिश्ते रहे हैं। मुंबई में शूटिंग करते समय मिथुन को अगर अब भी पता चल जाए कि आसपास कहीं सलमान की शूटिंग चल रही है तो वह बीच में ब्रेक लेकर उनसे मिलने जरूर चले जाते हैं। सलमान भी मिथुन को बहुत प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। दोनों के बॉक्स ऑफिस पर हुए इस मुकाबले में से मिथुन वाली फिल्म 'नाराज' आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
बाइस्कोप: जब सलमान और श्रीदेवी पर भारी पड़ी मिथुन की फिल्म, पूजा भट्ट ने दिखाए थे खतरनाक जलवे
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दो किस्से 'चांद का टुकड़ा' के
आज का बाइस्कोप हालांकि है तो फिल्म 'नाराज' पर ही लेकिन यहां एक दो दिलचस्प किस्से 'चांद का टुकड़ा' के भी आपको बता ही देते हैं। ये फिल्म निर्माता निर्देशक सावन कुमार टाक ने अपनी सुपरहिट फिल्म 'सनम बेवफा' के तुरंत बाद शुरू की थी। 'सनम बेवफा' में भी सलमान हीरो थे और सावन कुमार की हर बात मानते थे, लेकिन 'चांद का टुकड़ा' बनाने में सावन कुमार को बहुत परेशानियां हुईं। यहां तक कि उन्हें सलमान की शिकायत लेकर उनके पिता सलीम खान के पास तक जाना पड़ा था। सलमान खान के चक्कर में श्रीदेवी को घंटों सेट पर इंतजार करना होता था। ये फिल्म तो श्रीदेवी ने किसी तरह पूरी कर ली, लेकिन फिर ये भी तय किया कि वह आगे से कभी सलमान खान के साथ कोई फिल्म नहीं करेंगी। श्रीदेवी के बारे में ये बात मशहूर रही है कि वह एक बार फैसला ले लेने के बाद उसके परिणाम की परवाह नहीं करती थी। सलमान के साथ श्रीदेवी ने फिर कभी काम नहीं किया।
मिथुन के 'ऊटी काल' की फिल्म
तो लौटते हैं फिल्म 'नाराज' की तरफ। ये फिल्म मिथुन के करियर के उस दौर की फिल्म है जब वह बंबई की सारी मोह माया त्याग कर ऊटी चले गए थे अपने पूरे परिवार समेत। मिथुन की बंबई छोड़ने की तमाम वजहें बताई जाती हैं लेकिन उनमें से जो सबके सामने रही वो ये कि उन्होंने अपनी लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाते हुए दनादन फिल्में साइन करनी शुरू कर दी थीं। ये बात भी कम लोगों को ही पता है या फिर हो सकता है कि इसकी तरफ ध्यान ही कम लोगों ने दिया हो और वो ये कि मिथुन चक्रवर्ती के नाम हिंदी सिनेमा में बतौर हीरो सबसे ज्यादा फिल्मों में नजर आने का रिकॉर्ड रहा है और रिकॉर्ड ये भी है कि मिथुन की एक ही साल में 19 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, ये साल था 1989 का। ऊटी जाने के बाद मिथुन एक दिन में ही चार चार फिल्मों तक की शूटिंग कर दिया करते थे। उनका अपना होटल है वहां। फिल्मों की पूरी यूनिट वहीं रुकती और सस्ती दरों पर सारी सुविधाएं मिथुन की कंपनी उन्हें मुहैया कराती। 1994 में मिथुन की आठ फिल्में रिलीज हुईं, इनमें प्रमुख रहीं, निर्देशक बापू की 'परमात्मा', निर्देशक हरमेश मल्होत्रा की 'चीता', निर्देशक उमेश मेहरा की 'यार गद्दार', निर्देशक राज सिप्पी की 'तीसरा कौन' और निर्देशक महेश भट्ट की 'नाराज'।
सोनी राजदान और पूजा के अंदाज
निर्देशक महेश भट्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री में वंशवाद के विरोध में चल रही लहर के निशाने पर हैं। लेकिन, एक जमाना ऐसा भी रहा है जब सोशल मीडिया पर उनकी तारीफों के हैशटैग ट्रेंड होते रहे हैं। साल 1999 में निर्देशन से संन्यास ले चुके अब 71 साल के हो चुके महेश भट्ट अपनी बेटी आलिया भट्ट के कहने पर ही 'सड़क 2' से निर्देशन में वापस लौटे हैं। वैसे फिल्म 'नाराज' में उनकी पहली पत्नी की बेटी पूजा भट्ट और उनकी दूसरी पत्नी सोनी राजदान दोनों ने काम किया है। दोनों ने फिल्म में इतने बिंदास रोल किए हैं कि फिल्म देखते समय आपको अचरज हो सकता है कि इस फिल्म के निर्देशक वाकई महेश भट्ट ही हैं। खासतौर से फिल्म के गाने 'रोजा रोजा सायंग सायंग रे...' में पूजा भट्ट और सोनी राजदान दोनों ने काफी बोल्ड सीन्स किए। यहां देखिए इस गाने की झलकियां..
कुमार गौरव संग बननी थी 'नाराज'
फिल्म 'नाराज' निर्देशक महेश भट्ट के करियर के भी उस दौर की फिल्म है जब वह अपनी तमाम कालजयी फिल्मों मसलन 'अर्थ', 'सारांश', 'नाम', 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं' और 'सड़क' के बाद दोनों हाथों से सिर्फ पैसा बटोर रहे थे। फिल्म चलेगी कि नहीं चलेगी, इससे उनको फर्क नहीं पड़ता था। महेश भट्ट का सिक्का बॉक्स ऑफिस पर चल चुका था और इसकी चमक कायम रहने तक वह इसे हर दुकान पर चला लेना चाहते थे। फिल्म 'नाराज' का सिलसिला शुरू होता है फिल्म 'नाम' की कामयाबी के बाद से। फिल्म के निर्माता राजेंद्र कुमार, लेखक सलीम खान और निर्देशक महेश भट्ट तीनों मिलकर 'नाराज' नाम की एक फिल्म पर काम शुरू कर चुके थे। इस फिल्म में तब राखी, कुमार गौरव, नसीरुद्दीन शाह और अमरीश पुरी को साइन किया गया था। ये फिल्म बनती तो महेश भट्ट और अमरीश पुरी के साथ काम करने का दस्तावेज भी होती, लेकिन ये फिल्म शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही बंद कर दी गई। वजह सिर्फ राजेंद्र कुमार जानते हैं या महेश भट्ट। इसी फिल्म का शीर्षक बाद में महेश भट्ट ने मिथुन की फिल्म के लिए इस्तेमाल कर लिया।