आज के बाइस्कोप की फिल्म के बारे में बताने से पहले आपको हिंदी सिनेमा की एक महान हस्ती के बारे में बताते हैं। अगर आपने अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्में ‘डॉन’, ‘द ग्रेट गैम्बलर’, ‘त्रिशूल’ और ‘दीवार’ आदि देखी हैं तो इन फिल्मों में विलेन के गिरोह में आपको एक हट्टा कट्टा पहलवान टाइप कलाकार जरुर याद होगा, जिसकी आंखों में ही दहशत झलकती है। सिर पर बाल न होने की वजह से भी इस कलाकार को पूरी दुनिया पहचानती है, नाम – शेट्टी। पूरा लोकप्रिय नाम मुद्दू बाबू शेट्टी। असली नाम मधू बलवंत शेट्टी। साल 1931 में मैंगलोर में जन्मे शेट्टी ने काम की तलाश में एक दिन ट्रेन पकड़ी और पहुंच गए बंबई। आपको शायद यकीन न हो कि हिंदी और कन्नड़ की मिलाकर करीब 700 फिल्मों में स्टंट डायरेक्टर रहे शेट्टी की बंबई में पहली नौकरी कॉटन ग्रीन में वेटर की थी। मुक्केबाजी और बॉडी बिल्डिंग के शौक ने शेट्टी को फिल्मी दुनिया के लोगों से मिलाया और बतौर फाइट इंस्ट्रक्टर उन्हें पहली फिल्म 1956 में मिली ‘हीर’। शेट्टी के बेटे छोटे बेटे हृदय शेट्टी की फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है, जिसमें जोड़ी दिखी फिल्म ‘बॉबी’ में लॉन्च हुए दो कमाल के कलाकारों ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की।
बाइस्कोप: ऋषि कपूर को इस फिल्म ने 15 साल पहले दिया था बर्थडे गिफ्ट, ‘बॉबी’ की स्टार के साथ बनी जोड़ी
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ऋषि कपूर का बर्थडे गिफ्ट
ऋषि कपूर हमारे बीच होते तो 4 सितंबर को अपना 68वां जन्मदिन मना रहे होते। उनके बर्थडे गिफ्ट के तौर पर 15 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ अपनी तमाम खूबसूरती के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर भले बड़ा कमाल न दिखा पाई हो लेकिन ऋषि कपूर के चाहने वालों के लिए उनके करिश्मे के लगातार बढ़ते जादू का एक और कमाल रही। हिंदी की तमाम चर्चित फिल्मों जैसे ‘पारसमणि’, ‘हम हैं कमाल के’, ‘आतिश’, ‘राम शास्त्र’, ‘खौफ’ और ‘कुछ ना कहो’ के मुख्य सहायक निर्देशक या सहयोगी निर्देशक रहे हृदय शेट्टी ने ये फिल्म बड़े मन से बनाई। हृदय शेट्टी का नाम पढ़कर अगर आपके मन में बार बार रोहित शेट्टी का नाम आ रहा है तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। हृदय और रोहित का खून का रिश्ता है। दोनों ही एम बी शेट्टी के बेटे हैं। शेट्टी ने विनोदिनी से शादी की और चार बच्चों छाया शेट्टी, किरन शेट्टी, उदय शेट्टी और हृदय शेट्टी के पिता बने। बाद में उन्हें रत्ना नाम की एक कलाकार से प्रेम हुआ और उनसे जो बेटा हुआ वो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का हिट डायरेक्टर रोहित शेट्टी के नाम से पहचाना गया। हालांकि, जो मेहनत रोहित शेट्टी ने निर्देशक बनने से पहले की है, वह सबके बस की बात नहीं, इसका पूरा किस्सा फिर किसी दिन।
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खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे..
आज बात हो रही है फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ की। 2 सितंबर 2005 को रिलीज हुई फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ के लिए डिंपल और ऋषि को तैयार कर लेना ही फिल्म के निर्देशक हृदय शेट्टी की सबसे बड़ी जीत है। अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी को फिल्म ‘बागबान’ में जिस तरह का प्यार लोगों से मिला, वैसा ही कुछ करने की कोशिश फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ में भी की गई। इन दोनों फिल्मों ने ही आगे चलकर धर्मेंद्र और नफीसा अली की लव स्टोरी की फिल्म ‘लाइफ इन ए मेट्रो’ और अमिताभ औऱ तब्बू की लव स्टोरी की फिल्म ‘चीनी कम’ में बुनियाद रखी। ‘प्यार में ट्विस्ट’ दरअसल ऋषि कपूर का एक तरह से अपनी जिंदगी का ही फलसफा है। वह हमेशा अपने जानने वालों से कहते, ‘जिंदगी खुल के जियो। जिससे मोहब्बत करते हो, खुल के करो। दबा छुपाके जीने में कुछ नहीं रखा।’ अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला – ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ के लॉन्च में उन्होंने जिस गाने पर खूब ठुमके लगाए, वह गाना भी तो यही था, ‘खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों...।’ और, दिलचस्प बात ये है फिल्म ‘खेल खेल में’ के इसी गाने को फिर से रीक्रिएट किया गया फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ में।
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बाबुल सुप्रियो ने गाया कालजयी गाना
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ में ये गाना गाया है। वह कहते हैं, ‘ऋषि कपूर जी के लिए जो पहला गाना मैंने गाया वह था 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रेम योग’ में। इसके बाद मुझे ‘खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे’ गाने का मौका मिला फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ में। ऋषि कपूर जी के बारे में एक बात जो हर गायक ने नोटिस की है वह है गानों की शूटिंग के दौरान उनकी कमाल की अदाकारी। वह गानों को जिस तरह से लिप सिंक करते हैं और जिस तरह के भाव गाने की शूटिंग के दौरान लाते हैं, उससे लगता ही नहीं कि गाना कोई और गा रहा है। इतना बेहतरीन परफॉरमेंस गानों में बहुत कम कलाकार ही हिंदी सिनेमा में कर पाए हैं।’
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‘कलाकार कभी बुजुर्ग नहीं होता’
ऋषि कपूर पिछली सदी के आखिरी तीन दशकों में रुपहले पर छा जाने वाले ऐसे सुपर सितारों में से रहे जिनका जमाना दीवाना हुआ करता था। वह जैसे जैसे उम्र दराज होते गए, उनकी बातों की खनक बढ़ती गई। आवाज की बुलंदी बढ़ती गई। और उनका करिश्मा लगातार बढ़ता ही रहा। फिल्म ‘प्यार में ट्विस्ट’ रिलीज होने के करीब भी उनके आमना सामना हुआ और यूं ही शरारतन मैंने उनसे सवाल पूछ लिया था, ‘चिंटूजी आपके हिसाब किसी पुरुष को बुजुर्ग लिखने की सही उम्र क्या होती है?’ ऋषि कपूर की खासियत ये थी कि वे शरारत का बुरा नहीं मानते थे। खासतौर से जब ये एक कॉम्प्लीमेंट के तौर पर की गई हो। वह बोले, ‘मुझे तो पता नहीं क्योंकि मैं तो बुजुर्ग अभी हुआ नहीं हूं। हां, मैंने हीरो के रोल करने भले बंद कर दिए हैं लेकिन मेरे भीतर का कलाकार अब भी उतना ही जवान है जितना 1973 में ‘बॉबी’ के वक्त था।’ फिल्म ‘बॉबी’ में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की जो केमिस्ट्री है, उसे दोबारा परदे पर पेश करने की पहली कोशिश रमेश सिप्पी ने की थी फिल्म ‘सागर’ में। इसके बाद ‘प्यार में ट्विस्ट’ से पहले दोनों ‘अजूबा’ और ‘पटियाला हाउस’ में भी दिखे। ‘सागर’ की बात चल ही पड़ी है तो उसका ये गाना भी देख ही लीजिए जो इन दोनों की केमिस्ट्री की बानगी भर है..
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