अभिनेता गोविंदा की भांजी और कॉमेडियन कृष्णा अभिषेक की बहन आरती छोटे परदे पर बड़ा धमाका करने को फिर से तैयार हैं। नए धारावाहिक 'श्रवणी' में वह पहली बार एक नकारात्मक किरदार करने जा रही हैं और खुद आरती की मानें तो ये किरदार अपने आपको महिला चाणक्य समझती है। कितना कठिन रहा एक फिल्मी परिवार से होकर भी मुंबई फिल्म जगत में उनका सफर, बता रही हैं आरती ‘अमर उजाला’ से इस खास मुलाकात में।
Aarti Singh: पांच साल बाद छोटे परदे पर लौटीं आरती सिंह, पहली बार निभाने जा रहीं यूपी का ये खतरनाक किरदार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
2007 से आपने छोटे परदे पर कदम रखा, कैसा रहा अब तक का सफर?
अच्छा ही रहा क्योंकि अंत भला तो सब भला। कभी-कभार बीच में ऊंच नीच रहा है। आपके परिवार में अगर सभी लोग कलाकार जो एक दबाव होता है। मानसिक तौर पर कभी कभी परेशान हो जाती थी लेकिन ठीक है। एक समय ऐसा था जब मुझे भी नाम कमाना था लेकिन ऐसे किरदार आते थे जो मुझे पसंद ही नहीं आते थे तो ये कुछ चीजें थी जो कभी-कभी परेशान करती थीं। लेकिन हां ऊपर वाले की कृपा से मुझे पता था कि एक न एक दिन मैं करूंगी जो मुझे करना है और इस समय मैं उसी सफर पर हूं'।
इसे भी पढ़ें- Celebs OTT Debut: करीना कपूर से लेकर वरुण धवन तक, ये सितारे इन वेब सीरीज के साथ करने जा रहे डिजिटल डेब्यू
आप कहती हैं कि फिल्मी परिवार से होने के बाद भी आपको संघर्ष बाहर वालों की तरह ही करना पड़ा ऐसा क्यों?
मैं पांच साल बाद कोई शो कर रही हूं। लोगों को लगता है कि हमारे लिए यहां पहुंचना बहुत आसान है। मैं उनको सिर्फ यही बोलना चाहूंगी कि कभी हमारी जगह पर आ कर देखो। मुझे याद है शुरुआत में मैं जब काम नहीं करती थी तो परिवार के साथ होने पर पैपराजी मुझे फ्रेम से हटा देती थी। परिवार के साथ कोई होड़ नहीं है लेकिन हर कलाकार का संघर्ष उसका अपना होता है। लोग मुझे ‘बिग बॉस’ के बाद जानने लगे। वैसे कम लोग ही जानते हैं कि मैं मनोरंजन जगत में जूनियर आर्टिस्ट का काम भी कर चुकी हूं।
और, अब पहली बार एक लीड नकारात्मक किरदार...
इस किरदार की पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश की है और मैं लखनऊ में पली बढ़ी हूं तो भाषा पकड़ने में आसानी हुई। कई बार ऐसा होता है कि शूट के दौरान अपने आप ही कुछ अच्छे शब्द निकल आते हैं। जैसे आमतौर पर एक नकारात्मक किरदार में लोग मुंह बनाते हैं या फिर विलेन की तरह वेशभूषा में रहते हैं, वैसा कुछ भी नहीं है इस शो में। थीम ये है कि आम जीवन में लोग पीठ में छुरा भोंक कर चले जाते हैं लेकिन आपके मुंह पर वे बहुत अच्छे होते हैं। मैंने इसी किरदार को जताने की कोशिश की है।
‘बिग बॉस’ के बाद आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आए?
मैं हमेशा चाहती थी कि लोग मुझे जाने और ‘बिग बॉस’ ने वह कर दिखाया। फिर लोगों को पता लगा कि मैं कृष्णा की बहन हूं। बिग बॉस के बाद लोग मुझसे पूछते थे कि आप कोई काम नहीं कर रही हैं तो कोई चिड़चिड़ाहट तो नहीं होती? मैं उन सबको बताना चाहती हूं कि मुझे कोई चिड़चिड़ाहट नहीं हुई। मैं खुश हूं कि जो मुझे बनना था मैं वोह बनी। मुझे अपनी पहचान बनानी थी और मैंने वह बनाई। लोग मुझे जानने लगे हैं और वह भी इज्जत से।