हैदराबाद में जन्मे एजाज खान कई टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में काम करने के बाद रियलिटी शो 'बिग बॉस' का हिस्सा हैं। 45 वर्षीय एजाज खान को 'काव्यांजलि', 'क्या होगा निम्मो का', 'ये मोह मोह के धागे' जैसे धारावाहिकों के लिए जाना जाता है। एजाज की बहुत बड़ी दिक्कत है कि कभी-कभी उन्हें दूसरे अभिनेता एजाज खान के नाम के चलते कुछ सामाजिक मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल वह बिग बॉस के घर में खुद की खोज करने जा रहे हैं। अमर उजाला ने खास बातचीत में एजाज से उनकी रणनीति और खासियत पर बात की।
Bigg Boss 14: एजाज खान बोले, 'अच्छे लोगों के साथ बुरा करने वालों को इसकी भरपाई करनी ही होती है'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक आप एजाज खान हैं जो अब इस शो का हिस्सा बनने जा रहे हैं। एक एजाज खान और हैं जो पहले इस शो का हिस्सा बन चुके हैं। एक जैसा नाम होने की वजह से आपको किस तरह के फायदे या नुकसान होते हैं?
क्या बताऊं मैं आपको? मेरी तो सबसे बड़ी परेशानी ही यही है। पहले थोड़ा बहुत अलग था लेकिन अब मेरा भी नाम 'बिग बॉस' से जुड़ चुका है इसलिए पता नहीं कि आगे और क्या क्या होने वाला है। जब मेरा इस शो से नाम जुड़ा तो मुझे लगता है, काम्या पंजाबी ने कहा था कि इस बार अच्छा वाला एजाज इस शो से जुड़ रहा है। वैसे मुझे से मुझे किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है। मैं उन एजाज खान से अलग-अलग मौकों पर मिलता रहता हूं। मेरी मुलाकात उनसे होती रहती है। उनका सोचना अलग है और मेरा सोचना अलग है।
फिर भी कुछ तो दिक्कतें होती ही होंगी?
हां, कभी-कभी तो मुझे मीडिया से ही फोन आते हैं और मुझे सुनने में आता है कि मैं जेल में हूं। और फिर मैं उन्हीं से पूछता हूं कि अगर मैं जेल में हूं तो फिर फोन कैसे उठा सकता हूं। मेरे पिताजी के पास रोटरी क्लब से फोन आया कि आपका बेटा जेल में है। फिर मेरे पिताजी का मेरे पास फोन आया कि बेटा तुम ठीक हो कि नहीं? तो इस तरह की घटनाएं मेरे साथ अक्सर होती रहती हैं।
आप अब बिग बॉस का हिस्सा बनने जा रहे हैं। क्या आप इसके बारे में पहले से परिचित थे? फिर उसे जानने के बाद आपने किस तरह तैयारी की?
मुझे लगता है कि 2006 में या फिर जब भी इस शो की शुरुआत हुई थी तब मेरा एक करीबी दोस्त इस शो का हिस्सा रहा। तब मुझे इसके बारे में जानने का थोड़ा मौका मिला। हालांकि, फिर हम अपने काम और जिंदगी में इतने व्यस्त हो गए कि इसे कभी देखने का वक्त ही नहीं मिल पाया। और मैं एक ऐसा इंसान हूं जब मेरे पास अगर थोड़ा खाली वक्त होता है तो घर में बैठकर टीवी देखने की बजाय वर्कआउट करने या फिर बाहर घूमने फिरने में ज्यादा यकीन रखता हूं। घर में मेरा मन नहीं लगता।
ये शो इंसानी फितरत को भी सामने लाता है, क्या कहना चाहेंगे इस बारे में?
कोशिश करूंगा कि शो में जब तक भी रहूं तब तक वह बनकर रहा हूं जो मैं हूं। हो सकता है कि बहुत से लोग किसी रणनीति के तहत अंदर जाते होंगे और हो सकता है कि वह सफल भी होते हों! लेकिन, मैं वैसा नहीं हूं। मैं दिमाग से पैदल हूं। जो कुछ मेरे दिल में आता है, वह मैं बोल देता हूं। अगर मैं गलत हूं तो माफी मांग लूंगा और अगर सही हूं तो डटा रहूंगा। बस यही मेरी सोच है।

कमेंट
कमेंट X