सवा सौ करोड़ रुपये की लागत से बनी कंगना रनौत की मणिकर्णिका की बॉक्स ऑफिस से विदाई हो रही है और इस बीच सामने आ गई है छोटे परदे की मणिकर्णिका। सीरियल झांसी की रानी में मुख्य भूमिका निभा रहीं अनुष्का सेन से अमर उजाला की खास बातचीत।
टीवी की 'झांसी की रानी' को देख भूल जाएंगे कंगना रनौत को भी, इस तरह मिला था रोल
सिर्फ आठ साल की उम्र में अभिनय शुरू कर देने की क्या चुनौतियां रहीं?
पहले मुझे इन सब चीजों की समझ ही नहीं थी पर मुझे लगता है भगवान ने मेरा बहुत साथ दिया है। मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। मैंने सबसे पहले राकेश ओमप्रकाश मेहरा के म्यूजिक वीडियो में काम किया था। तब मुझे कैमरा और एक्टिंग दोनों के ही बारे में कुछ पता नहीं था। इसके बाद मैं अमूल के एड के लिए सेलेक्ट हो गई थी। अमूल के इस विज्ञापन ने मेरी किस्मत बदल दी।
हां, इस टर्निंग प्वाइंट के बारे में बताइए?
अमूल के ए़़ड के बाद बिना ऑडीशन दिए मैं सीरियल 'यहां मैं घर घर खेली' के लिए सेलेक्ट हो गई थी। मुझे उसमें एक दृष्टिहीन का किरदार निभाना था। मुझे परेशान देख मेरे पिता ने मुझे बढ़ावा दिया और कहा कि जैसे ब्लैक में रानी मुखर्जी ने किरदार निभाया था वैसे ही तुम भी कर सकती हो। उसके बाद मैंने देवों के देव महादेव में काम किया और उसे करने में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई।
अपना सबसे पसंदीदा किरदार किसे मानती हैं?
बालवीर मेरा अब तक का सबसे पसंदीदा किरदार रहा है। मैं इस शो के साथ ही बड़ी हुई हूं, वह चार साल चला है। चौथी क्लास से लेकर नौवीं क्लास तक मैं ये सीरियल करती रही। पूरे 1111 एपिसोड किए मैंने इसके।
अपनी उम्र के बच्चों से क्या कहना चाहेंगी?
मैं यही कहना चाहूंगी कि अवसर मिलना बहुत जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है इस मौके के लिए खुद को तैयार रखना। जीवन में मौके तो सबको मिलते हैं लेकिन मौका मिलने के बाद खुद को साबित कम लोग ही कर पाते हैं क्योंकि किसी बड़े मौके के लिए खुद को तैयार रखना आसान नहीं है। खूब लड़ी मर्दानी, झांसी की रानी शो मुझे 20 दिन की नोटिस पर शुरू करना पड़ा है लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं उन सब लोगो की, जिन्होंने मुझे पिछले पांच साल में निखारकर हीरा बना दिया। ये शो आप देखेंगे तो झांसी की रानी पर बने पिछले सारे शोज या फिल्में आप भूल जाएंगे।
