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फिल्मी सितारों के बाद सरकार के फैसले के विरोध में उतरे 8 टीवी सेलेब्स, बोले-मत काटो ये जंगल
Tue, 10 Sep 2019 12:29 PM IST
anand anand
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Tue, 10 Sep 2019 12:29 PM IST
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ira sone, Mrinal Deshraj, Shashank Vyas
- फोटो : amar ujala mumbai
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मुंबई यानी मायानगरी में इन दिनों फिल्मसिटी के पास बसी आरे कालोनी में पेड़ों के काटने के फैसले के खिलाफ आम जनता से लेकर फिल्मी जगत के लोग गुस्से में हैं। मेट्रो शेड के लिए आरे कालोनी के 2702 पेड़ों के काटे जाने या ट्रांसप्लांट किए जाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद से ही इसके खिलाफ कई जानी मानी हस्तियां अपनी बातें रख चुकी हैं। लेकिन जिस हिसाब से इस प्रस्ताव पर आगे काम हो रहा है, उस हिसाब से इसका रुकना मुमकिन नहीं लग रहा। अब टीवी जगत के कई जाने माने चेहरों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है।
Mrinal Deshraj
- फोटो : amar ujala mumbai
मृणाल देशराज
यह पूरा मुद्दा बेहद ही दिल दहला देने वाला है। आज हम कई पर्यावरणीय मुद्दों के किनारे पर खड़े हैं। हमने अपने लगभग सभी प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण रूप से उपयोग कर चुके हैं। वहां जो 3000 पेड़ काटे जाने हैं, उन्हें बचाने के लिए हमें एक साथ आना चाहिए । हमें अमेज़न में लगी आग से सीखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की पर्यावरण की सुरक्षा और पुनरजीवन आज का अहम मुद्दा हो, साथ ही साथ आने वाली पीढ़ी को भी इसका महत्व बताना बेहद जरूरी है।
यह पूरा मुद्दा बेहद ही दिल दहला देने वाला है। आज हम कई पर्यावरणीय मुद्दों के किनारे पर खड़े हैं। हमने अपने लगभग सभी प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण रूप से उपयोग कर चुके हैं। वहां जो 3000 पेड़ काटे जाने हैं, उन्हें बचाने के लिए हमें एक साथ आना चाहिए । हमें अमेज़न में लगी आग से सीखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की पर्यावरण की सुरक्षा और पुनरजीवन आज का अहम मुद्दा हो, साथ ही साथ आने वाली पीढ़ी को भी इसका महत्व बताना बेहद जरूरी है।
Shashank Vyas
- फोटो : amar ujala mumbai
शशांक व्यास
मैं पेड़ काटने के समर्थन में नहीं हूं। हम सभी पेड़ों के महत्व को जानते हैं, फिर भी हम प्रकृति के खिलाफ जा रहे हैं। इससे बारिश में देरी होगी, भारी गर्मी होगी, ग्लोबल वार्मिंग होगी ... अगर इमारतें बन गईं तो वन्यजीव कहां जाएंगे ? अगर पेड़ नहीं हैं और पानी नहीं है, तो सभी को पानी कहाँ से मिलेगा ? मुंबई में पहले से ही पर्याप्त विकास है, आइए अब इन संसाधनों को संरक्षित करें।
मैं पेड़ काटने के समर्थन में नहीं हूं। हम सभी पेड़ों के महत्व को जानते हैं, फिर भी हम प्रकृति के खिलाफ जा रहे हैं। इससे बारिश में देरी होगी, भारी गर्मी होगी, ग्लोबल वार्मिंग होगी ... अगर इमारतें बन गईं तो वन्यजीव कहां जाएंगे ? अगर पेड़ नहीं हैं और पानी नहीं है, तो सभी को पानी कहाँ से मिलेगा ? मुंबई में पहले से ही पर्याप्त विकास है, आइए अब इन संसाधनों को संरक्षित करें।
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Sharad Malhotra
- फोटो : Social Media
शरद मल्होत्रा
मैं आरे कालोनी के पेड़ों के काटे जाने के सख्त खिलाफ हूं। मेरे लिए इस कॉन्क्रीट के जंगल जिसे हम मुंबई शहर कहते हैं, उसके बीचो बीचे ऐसी हरियाली होना किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हमें इस स्वर्ग को स्वस्थ रखने के साथ साथ इसका बचाव भी करना है। हमारे स्वास्थ से लेकर हमारे इंद्रियों के लिए यह हरियाली बेहद जरूरी है। हमारी सरकार और निर्धारित किए गए अधिकारियों को इन 2702 पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ सख्त कदम लेने चाहिए हैं।
मैं आरे कालोनी के पेड़ों के काटे जाने के सख्त खिलाफ हूं। मेरे लिए इस कॉन्क्रीट के जंगल जिसे हम मुंबई शहर कहते हैं, उसके बीचो बीचे ऐसी हरियाली होना किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हमें इस स्वर्ग को स्वस्थ रखने के साथ साथ इसका बचाव भी करना है। हमारे स्वास्थ से लेकर हमारे इंद्रियों के लिए यह हरियाली बेहद जरूरी है। हमारी सरकार और निर्धारित किए गए अधिकारियों को इन 2702 पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ सख्त कदम लेने चाहिए हैं।
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Atul Verma
- फोटो : amar ujala mumbai
अतुल वर्मा
मुझे नहीं लगता कि कोई चाहेगा कि पेड़ काटे जाएं। दुर्भाग्य से, मुंबई में बड़े शेड बनाने के लिए ज्यादा जगह नहीं बची है और हमारे शहर को मेट्रो की जरूरत है। मुझे यकीन है कि अधिकारियों ने इस तरह का बड़ा फैसला लेने से पहले इस मुद्दे का गहराई से विश्लेषण किया होगा। इस स्थिति में सरकार के खिलाफ होने के बजाय, हमें सरकार के साथ रहना चाहिए और इस मुद्दे का समाधान खोजना चाहिए।
मुझे नहीं लगता कि कोई चाहेगा कि पेड़ काटे जाएं। दुर्भाग्य से, मुंबई में बड़े शेड बनाने के लिए ज्यादा जगह नहीं बची है और हमारे शहर को मेट्रो की जरूरत है। मुझे यकीन है कि अधिकारियों ने इस तरह का बड़ा फैसला लेने से पहले इस मुद्दे का गहराई से विश्लेषण किया होगा। इस स्थिति में सरकार के खिलाफ होने के बजाय, हमें सरकार के साथ रहना चाहिए और इस मुद्दे का समाधान खोजना चाहिए।