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Vineet Kumar Singh: ‘हवाई जहाज छोड़कर सब चला लेता हूं..’, संघर्ष पर बोले विनीत- अभिनय के लिए जरूरी सब सीखता था
Vineet Kumar Singh Exclusive Interview: अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने अमर उजाला से एक खास बातचीत में अभिनय की दुनिया में आने के लिए किए गए संघर्षों पर खुलकर बात की। उन्होंने पढ़ाई और एक्टिंग को किस तरह एक साथ मैनेज किया और बचपन की कई कहानियों को हमारे साथ साझा किया। पढ़ते हैं विनीत से हुई बातचीत…
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विनीत कुमार सिंह
- फोटो : इंस्टाग्राम @vineet_ksofficial
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‘जाट’ में खलनायक की भूमिका निभाने वाले अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने फिल्मों में आने के लिए किए गए संघर्ष की कहानी बताई। अभिनेता यह भी साझा किया कि किस तरह से उन्होंने एक्टिंग के लिए खुद को तैयार किया। पढ़िए अभिनेता से हुई दिलचस्प बातचीत…
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विनीत कुमार सिंह
- फोटो : इंस्टाग्राम @vineet_ksofficial
एक्टिंग के लिए परिवार को कैसे मनाया?
विनीत कुमार सिंह के पिता एक गणित के शिक्षक थे। वहीं, खुद अभिनेता की रुचि खेल में थी। उनसे जब बचपन और एक्टिंग के लिए, घरवालों को राजी करने के संघर्ष के बारे में पूछा गया, तो अभिनेता ने कहा, ‘यह बहुत ही साधारण सी बात है, ज्यादातर घरों में बच्चा जब लीक ले हटकर कुछ करना चाहता है, तो उन्हें चिंता होती है कि भाई यह कौन सी फील्ड में क्या कर रहा है? बच्चे का भला चाहते हैं मां बाप। मेरे साथ भी ऐसा ही था। पापा कभी नहीं चाहते थे कि मैं इस फील्ड में आऊं।’
‘मम्मी को जितना किताबों में लोक संगीत लिखा होता है, उतना मुंह जुबानी याद था। जैसे जो शादी में गीत गाए जाते हैं वो सब उनको याद रहता है। हम सब हैरान रहते थे कि इतना कैसे याद है इनको। उनका डांस के साथ गाने के साथ और नाटक से जुड़ाव रहा। शायद उनसे ही ये चीजें मुझमें आई हैं। पापा ने तो साफ मना किया था, लेकिन बेटा मैं उन्हीं का हूं, मैं भी जिद्दी हूं, चुपचाप मैं बारीकी से रास्ते बनाता रहा। अंत में चीजे हो गईं।’
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विनीत कुमार सिंह
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एक्टिंग के लिए कैसे इंस्पायर हुए?
अभिनेता से जब पूछा गया कि कोई ऐसी फिल्म जिसने उन्हें इंस्पायर किया हो? अभिनेता ने कहा, ‘कोई एक फिल्म नहीं थी। मुझे सिनेमा हमेशा जादू की तरह लगता रहा। मैं बनारस में जहां पला बढ़ा हूं, वहां सरस्वती पूजा में, शादी में और ऐसे कई सारे मौंको पर पर्दे पर सिनेमा दिखाया जाता है। वो हमारे लिए खास रहता था। वो बचपन में ही हो गया, तो मुझे ठीक-ठीक यह नहीं पता कि कब ये खयाल मुझे आया, लेकिन बचपन में 13-14 साल की उम्र में ही पता था कि मुझे करना एक्टिंग ही है। बस मैं यह तलाश रहा था कि कौन से रास्ते से वहां तक जाऊं। कोई एक फिल्म देखकर मुझे ऐसा लगा हो ये बात पाना मेरे लिए मुश्किल है, लेकिन हां जब भी सिनेमा देखता था तो वो मुझे अट्रैक्ट करता था।
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विनीत कुमार सिंह
- फोटो : इंस्टाग्राम
पढ़ाई और एक्टिंग को एक साथ कैसे मैनेज किया?
अभिनेता ने अपने शुरुआती संघर्ष के बारे में बात करते हुए कहा, ‘सारी चीजें साथ-साथ हो रही थीं, मेडिकल कॉलेज में जाना भी कहीं ना कहीं इसलिए था कि मैं एक्टिंग कर सकूं। पढ़ाई करता था, बाकी का पूरा समय मैं खुद को एक एक्टर के तौर बेहतर करने में लगाता था। हरिद्वार मेडिकल कॉलेज से दिल्ली जाता था। हर शुक्रवार का रात को बस लेकर मैं दिल्ली पहुंच जाता था, फिर सोमवार को वापस लौट आता था। वहां, जाकर एनएसडी और दिल्ली में जो चीजें भी देखता था। वो सिलसिला चलता रहा। किताबें पढ़ता रहता, लोकल कोई चीज मिल गई, जो फिल्म में काम आ सकती थी, वह करता था। फिल्म देखकर भी जो चीजें समझ आती थी, जो एक्टिंग में काम आ सकती हैं। वो करता रहा। जितने व्हीकल है, हवाई जहाज छोड़कर सब चला लेता हूं। डांस भी सीखा है। सभी आउटडोर खेल खेल लेता हूं।’
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विनीत कुमार सिंह
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संघर्ष के दिनों में सबसे ज्यादा साथ किसने दिया?
अभिनेता से जब उनके संघर्ष के दिनों के बारे में पूछा गया कि क्या कोई दोस्त है, जिसने उनका साथ दिया हो। इस पर विनीत ने कहा, ‘मेरे लिए मेरा छोटा भाई कार्तिकेय सिंह, मेरी छोटी बहन मुक्ति सिंह ये हमेशा से मेरे साथ खड़े रहे, मुंबई आने के पहले भी खड़े रहे। फिर जब मुंबई आया तो मेरी पत्नी रुचिरा से मुलाकात हुई, उनसे 2013-14 में मिला। अब हम शादीशुदा हैं। कहीं ना कहीं ये लोग साथ खड़े रहें। बहुत ज्यादा लोगों की जरूरत होती भी नहीं। मैंने अपने अनुभव से यही सीखा है कि बस अपना काम करते रहो।’
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