हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ लेखक वह समय लौटाने की कोशिश कर रहे हैं जहां वे निर्माताओं को घुटने टेकने पर फिर से मजबूर कर सकें। सत्तर के दशक में ये सिलसिला मशहूर लेखक जोड़ी सलीम जावेद ने शुरू किया था और अब कोई पचास साल बाद इस चिंगारी को फिर से एक हवा देने की कोशिश में हैं आर्टिकल 15 से चर्चा में आए लेखक गौरव सोलंकी। खबर हैं कि गौरव ने प्राइम वीडियो की चर्चित सीरीज दिल्ली का दूसरा सीजन लिखने से इसलिए इनकार कर दिया है क्योंकि कथित रूप से इसके हीरो सैफ अली खान ने सेट पर उनकी मौजदूगी पर सवाल खड़ा कर दिया था। वहीं इस बारे में सीरीज के निर्माता अली अब्बास जफर ने अमर उजाला से कहा कि ये सब खबरों में बने रहने के चोंचले हैं।
गौरव सोलंकी के ‘नखरों’ को अली अब्बास जफर का जवाब, ‘खबरों में बने रहने को कुछ भी करते हैं लोग’
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यशराज फिल्म्स के साथ रहकर टाइगर जिंदा है, सुल्तान और भारत जैसी फिल्में निर्देशित कर चुके अली अब्बास जफर के लिए गौरव ने एक वेब सीरीज लिखी जिसकी लंबी शूटिंग दिल्ली और दूसरे इलाकों में सर्दियों के समय से चलती रही है। सैफ अली खान इसके हीरो हैं। प्राइम वीडियो पर इसे प्रसारित होना है और सैक्रेड गेम्स के दूसरे सीजन का जो भी हश्र हुआ हो, सैफ अली खान के तुर्रे अब भी कम नहीं हुए हैं। पिछली दो फिल्मों जवानी जानेमन और तानाजी में उनके काम की तारीफ होने के बाद से तो वह फिर से स्टाइल में हैं ही। कहा जाता है कि उनको शूटिंग के वक्त सीरीज के राइटर के सेट पर मौजूद होने पर एतराज रहा और ये बात सोलंकी को नागवार गुजरी।
अब जबकि कोरोना संकट में अली अब्बास जफर की इस सीरीज की ओटीटी पर बड़ी डिमांड हो रही है। गौरव सोलंकी ने ये कहते हुए धमाका कर दिया है कि वह इसका दूसरा सीजन नहीं लिखेंगे। माना यही जाता है कि ओटीटी पर बिना राइटर के कुछ होता नहीं और अगर गौरव सोलंकी के कागज पक्के हैं तो प्राइम वीडियो बिना उनकी सहमति के दूसरा सीजन बना भी नहीं पाएगा। लेकिन प्राइम वीडियो के सूत्र ये भी बताते हैं कि सीरीज के सृजनकर्ता चूंकि अली अब्बास जफर है लिहाजा गौरव सोलंकी के अगले सीजन में होने न होने से खास फर्क पड़ता नहीं है। इस बारे में जब अमर उजाला ने अली अब्बास जफर से संपर्क किया तो उन्होंने इन सारी खबरों को निराधार बताया। उन्होंने बिना गौरव सोलंकी का नाम लिए यही कहा कि लोग बस खबरों में बने रहना चाहते हैं। उधर, शुक्रवार सुबह सुबह इस खबर के सामने आने के बाद से तमाम लोग गौरव सोलंकी से संपर्क करने के लिए उन्हें फोन कर रहे हैं पर उनका नंबर आउट ऑफ कवरेज एरिया बता रहा है।
कौन हैं गौरव सोलंकी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बागियों के शहर मेरठ में जन्मे गौरव सोलंकी रुड़की से आईआईटी पास हैं। अनुराग कश्यप का आभामंडल उन्हें मुंबई खींच लाया और तब से वह अगली, दास देव और वीरे दी वेडिंग जैसी फिल्मों में गाने लिखते रहे हैं। उनकी किताब 'ग्यारहवीं ए के लड़के' काफी चर्चित किताब रही हैं। चर्चा उनकी इस बात के लिए भी खूब रही कि उन्होंने भारतीय ज्ञानपीठ का नवसाहित्य लेखन पुरस्कार ठुकरा दिया था। उत्तर प्रदेश की जातीय व्यवस्था पर उन्होंने दमदार कहानी लिखी, आर्टिकल 15 जिसके लिए उन्हें तमाम पुरस्कार भी मिले। लेकिन, इसी किस्से को किताब की शक्ल में प्रकाशित करने के दौर में उन्हें फिल्म जगत के तमाम सच्चे अनुभव भी मिले।
अतीत के पंगे
हिंदी मनोरंजन जगत में आमतौर पर लेखकों को निर्माताओं से शुरू से शिकायत रही है, लेकिन बीच में कुछ साल के लिए सलीम जावेद ने ये सूरत बदली थी। अपनी फिल्म जंजीर के पोस्टर पर अपना नाम न छपा देख इन दोनों ने एक पेंटर की सेवाएं ली और उसे एक स्टैंसिल देकर मुंबई के ओपेरा हाउस से लेकर जुहू तक लगे सारे पोस्टरों पर अपना नाम छपवा दिया था। राइटर्स का ये रुतबा फिर लौट रहा है। स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने भी इसके लिए नियम कड़े किए हैं और फिल्मों के बजट के हिसाब से राइटर्स की न्यूनतम फीस भी तय की है।