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Haryana: बेटे की चाह में 42 साल की महिला का 12 बार गर्भधारण, आखिरी बार बेटी देख मां बोली-अब और नहीं

करिश्मा रंगा, रोहतक Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 29 Jan 2026 07:20 AM IST
सार

रोहतक में बेटे की चाह में एक महिला ने 12 बार गर्भधारण किया। बीते 23 जनवरी को महिला ने 12वीं बार भी बेटे की चाह में बच्ची को जन्म दिया। महिला की गर्भावस्था हाई-रिस्क वाली थी जिसको लेकर डॉक्टरों ने चेताया था। डिटेल में पढ़ें खबर...

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42 year old woman became pregnant 12 times in her desire to have a son in Rohtak
सुदेश ने बच्चे की चाह में 12 बार किया गर्भधारण - फोटो : संवाद
बेटे की चाह में बहुजमालपुर की सुदेश (42) ने 12 बार गर्भधारण किया। 23 जनवरी को फिर बेटी हो गई तो उन्हें समझ आई। बोलीं, अब और बच्चे नहीं करूंगी। वैसे, उन्हें एक बेटा हुआ था लेकिन बचा नहीं। कुल सात बेटियों में से वह दो की शादी कर चुकी हैं। एक के तो दो बच्चे भी हैं।
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42 year old woman became pregnant 12 times in her desire to have a son in Rohtak
बेटी निशा, मनीषा, प्रेरणा, प्रिया व राधिका के साथ पिता श्रीभगवान - फोटो : संवाद

साल 1998 में हुई थी शादी 

रोहतक शहर से 15 किमी दूर गांव बहुजमालपुर के श्रीभगवान से सुदेश की शादी 1998 में हुई थी। घर की माली हालत शुरू से ही खस्ताहाल थी। खुद मजदूरी करती हैं। पति मजदूरी के साथ-साथ ऑटो भी चलाते हैं। सुदेश बताती हैं कि परिवार की शुरू से ही एक बेटे की चाह थी। इसी कारण शादी के बाद 27 वर्षों में बच्चा पैदा करने वाली मशीन-सी हो गईं। 

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दंपती का घर - फोटो : संवाद

साल 2001 में हुई थी पहली बेटी

कुल 12 में से सात बच्चे ही जीवित हैं। उन्हें 2001 में पहली बेटी हुई तो घर में ही बहुतों के चेहरे उतर गए। मां ने उसका नाम निशा रखा। शायद इसी कामना में कि कभी घर में उम्मीदों का ''सूरज'' भी पैदा होगा। शरीर इतनी सामर्थ्य वाला नहीं रहा तो भी वह गर्भधारण करती रहीं। फिलहाल, दो बेटियों निशा (25) और मनीषा (23) की शादी हो चुकी है। मनीषा को एक बेटा-बेटी भी हैं। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण निशा मायके में ही रहती है।

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सुदेश की मां लक्ष्मी हुईं भावुक - फोटो : संवाद

23 जनवरी को पीजीआई में हुआ बेटी का जन्म 

तीन बेटियां काजल (12वीं), राधिका (11वीं) और प्रेरणा (7वीं में) पढ़ रही हैं। सात साल की प्रिया स्कूल नहीं जाती है। 23 जनवरी को आखिरी बेटी का जन्म पीजीआई में हुआ। कम हीमोग्लोबिन के बावजूद डॉक्टर उनकी नॉर्मल डिलीवरी कराने में सफल रहीं। सुदेश कहती हैं, अभी बेटी का नाम नहीं सोचा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर डॉ. नैंसी बताती हैं कि सुदेश को कई बार समझाया भी कि गर्भधारण से उनकी जिंदगी दांव पर लग सकती है। मगर, पति और परिवार की चाह के आगे वह चुप्पी साधे रहीं।

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राजेश कुमारी, एएनएम - फोटो : संवाद

मौत और अधूरे जन्मों का दर्द भी झेला

सुदेश की दास्तां बार-बार मां बनने तक सीमित नहीं है। उन्होंने बच्चों को खोने का दर्द भी झेला है। पति श्रीभगवान बताते हैं कि जन्म के बाद दो बेटियों की मौत हो गई। वर्ष 2020 में पैदा हुआ इकलौता बेटा भी कुछ ही घंटों में दुनिया छोड़ गया। दो बार गर्भपात भी कराना पड़ा।

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